वेदांता बॉयलर विस्फोट: चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 8 पर FIR, हादसे में 20 श्रमिकों की गई थी जान
छत्तीसगढ़ के कोरबा में वेदांता पावर प्लांट बॉयलर हादसे के बाद पुलिस ने कंपनी प्रबंधन पर कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने पर ...और पढ़ें

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बायलर हादसे के बाद पुलिस ने कंपनी प्रबंधन पर कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही के संकेत मिलने पर वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
14 अप्रैल को हुए इस हादसे में अब तक 20 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 घायल विभिन्न अस्पतालों में उपचाररत हैं। मृतकों में पांच छत्तीसगढ़ के और 15 अन्य राज्यों के श्रमिक शामिल हैं। एसपी प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि प्लांट में सुरक्षा मानकों के पालन में गंभीर कमी रही। तकनीकी खामियों के साथ-साथ निगरानी व्यवस्था भी कमजोर पाई गई है। इसी आधार पर प्रबंधन के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे और धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।सहायक कंपनियां तक भी पहुंचेगी जांच की आंच :बायलर क्षेत्र के मेंटेनेंस और संचालन से जुड़ी सहायक कंपनियां की भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्लांट के कई तकनीकी कार्य पेटी ठेका और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कराए जा रहे थे। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि क्या सहायक संस्थाओं ने तय मानकों के अनुसार काम किया या लापरवाही बरती गई।
आने वाले दिनों में इन एजेंसियों से जुड़े जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की आंच पहुंच सकती है। उत्पादन बढ़ाने के समय हुआ हादसा :चीफ बायलर इंस्पेक्टर और डिप्टी चीफ बायलर इंस्पेक्टर की जांच के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि फर्नेस के भीतर अचानक हुए आंतरिक विस्फोट के कारण अत्यधिक दबाव उत्पन्न हुआ, जिससे वाटर वाल क्षतिग्रस्त हुआ और जुड़े पाइप कुछ ही सेकंड में फट गए।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मेन डाउनकमर से जुड़े हाई प्रेशर ट्यूब समेत सभी 14 कनेक्शन पाइप क्षतिग्रस्त हुए और यह प्रक्रिया महज कुछ सेकेंड में हुई। हालांकि, तकनीकी दृष्टिकोण से यह भी कहा गया है कि यदि कंट्रोल रूम से तुरंत सिस्टम ट्रिप किया जाता, तो घटना टल सकती थी। विशेषज्ञों का मानना है कि दो सेकेंड में निर्णय लेना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं था।
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