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    Vaibhav Suryavanshi कहता 'उसका सिर दुख रहा है', 15 साल के क्रिकेटर के पहले कोच ने सुनाई अनोखी कहानी

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 09:40 PM (IST)

    वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच ने एक अनसुनी कहानी बताई है। वैभव के पास आयरलैंड के खिलाफ T20I डेब्‍यू करके इतिहास रचने का गोल्‍डन चांस है। ...और पढ़ें

    वैभव सूर्यवंशी

    वैभव सूर्यवंशी

    HighLights

    1. वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड के खिलाफ मिल सकता है डेब्‍यू का मौका

    2. वैभव अंतरराष्‍ट्रीय डेब्‍यू करने वाले सबसे युवा भारतीय क्रिकेटर बन सकते हैं

    3. वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच ने एक अनसुनी कहानी बताई

    स्‍पोर्ट्स डेस्‍क, नई दिल्‍ली। वैभव सूर्यवंशी का परिवार और भारतीय फैंस की नजरें शुक्रवार को टीम शीट पर टकटकी लगाए होंगी कि युवा क्रिकेटर आयरलैंड के खिलाफ पहले टी20 इंटरनेशनल मैच में एक्‍शन में नजर आएंगे या नहीं।

    अगर सूर्यवंशी को प्‍लेइंग 11 में मौका मिला तो वो अंतरराष्‍ट्रीय मैच खेलने वाले सबसे युवा भारतीय क्रिकेटर बन जाएंगे। सूर्यवंशी को इंग्‍लैंड के खिलाफ आगामी टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए भी चुना गया है। ऐसे में वैभव के जल्‍द ही डेब्‍यू करने के अवसर प्रबल हैं।

    पिता के कारण शुरू हुआ सफर

    सूर्यवंशी भले ही 16 साल की उम्र से पहले ही भारत के लिए डेब्‍यू कर लें, लेकिन उनकी क्रिकेट यात्रा लंबी और संघर्षभरी रही। वैसे, वैभव के क्रिकेट यात्रा की शुरुआत उनके पिता संजीव के कारण हुई, जो मोतीपुर के गांव में क्‍लब क्रिकेटर रह चुके हैं। संजीव तो अपने सपने को साकार नहीं कर सके, लेकिन उन्‍होंने वैभव में खूब निवेश किया ताकि वो एक बेहतर क्रिकेटर बन सके।

    शुरुआत में मिल गए संकेत

    वैभव सूर्यवंशी के पहले कोच ब्रजेश झा ने द एथलेटिक से बातचीत में कहा, 'जब वो पहली बार आया तो समस्‍तीपुर जिला में कुछ बल्‍ले क्रिकेट खेलते थे। सभी सीनियर में यह छोटा बच्‍चा आया था। उसे कुछ बोलो, वो उसे तुरंत करने लगता। उसे बताया कि कैसे स्‍टांस लेना है, कैसे दौड़ना है। उसे जो भी समझाया, वो उसने जल्‍द ही अपना लिया।'

    कोच ने आगे कहा, 'जब हम वैभव को ट्रायल्‍स के लिए पटना ले गए तो पूरे क्षेत्र में खबर फैली कि समस्‍तीपुर से बाएं हाथ का बल्‍लेबाज आ रहा है, जिसमें गजब की प्रतिभा है। वो साढ़े आठ साल का था, जब राज्‍य की अंडर-17 टीम में चयन हुआ।'

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    पहला प्‍यार बल्‍लेबाजी

    मनीष ओझा ने भी वैभव सूर्यवंशी को क्रिकेट का कहकरा सिखाया। ओझा ने कहा, 'बैटिंग हमेशा से उसका पहला प्‍यार है। उसके अभ्‍यास सत्र में मुश्किल का स्‍तर देखने लायक रहता था। मैं जितना स्‍तर बढ़ाऊं, वो उतनी आसानी से उसमें ढल जाता था। उसके ढलने की आदत कमाल की है।'

    सिरदर्द का बहाना

    ओझा ने बताया, 'जब वैभव ट्रेनिंग करता था। अगर आपने उसे फील्डिंग के लिए भेज दिया तो वो 10 मिनट के अंदर आपके पास आकर बोलेगा कि सिर दुख रहा है। मगर आप उसे बल्‍लेबाजी का बोलो तो वो कभी नहीं कहेगा कि थक गया है। आज वैभव टी20 क्रिकेट में तूफानी शतक जमा रहा है, लेकिन एक समय उसने 100 गेंदों में 30 रन की पारी भी खेली है।'

    ब्रजेश झा ने याद किया, 'वैभव महज 9 साल का था। तब 100 गेंदों में 30 रन बनाए। मैं इस बात से बहुत खुश था कि उसने 100 गेंदें खेली क्‍योंकि इससे उसकी क्षमता नजर आई। वो राज्‍य स्‍तरीय गेंदबाजों का सामना कर रहा था, जो कि उसकी उम्र से बड़े थे। ऐसा नहीं था कि शक्ति के कारण वो रन नहीं बना पा रहा था, लेकिन उसने 100 गेंदें खेली तो बहुत खुशी हुई।'

    सफलता की राह पर वैभव

    समस्‍तीपुर से वैभव और उनके पिता पटना पहुंचे। फिर युवा क्रिकेटर के जीवन में आईपीएल की एंट्री हुई। राजस्‍थान रॉयल्‍स ने 13 साल के लड़के को 1.10 करोड़ रुपये में खरीदा। 14 की उम्र में वैभव ने राजस्‍थान रॉयल्‍स के लिए डेब्‍यू किया और अपनी बल्‍लेबाजी का डंका बजाया। आज वैभव सफलता की राह पर गौरवशाली अंदाज में आगे बढ़ रहे हैं।

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