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    लॉर्ड्स के जिस मैदान पर भारत ने जीता था पहला वर्ल्ड कप, वहां कभी उगाई गई थीं सब्जियां; दो बार बदला गया स्टेडियम का ठिकाना

    Updated: Mon, 22 Jun 2026 07:12 PM (IST)

    लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड क्रिकेट का सबसे प्रतिष्ठित मैदान है। ये कई ऐतिहासिक पलों का गवाह रहा है। यहां पर मेंस वर्ल्ड कप के अब तक पांच फाइनल मुकाबले खे ...और पढ़ें

    लॉर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम

    लॉर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम

    HighLights

    1. लॉर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम का दो बार बदला स्थान

    2. लॉर्ड्स में खेले गए 5 विश्व कप फाइनल

    3. लॉर्ड्स के मैदान की भी है अनोखी बनावट

    स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। लंदन का लॉर्ड्स मैदान क्रिकेट के सबसे ऐतिहासिक मैदानों में शामिल है। लॉर्ड्स में कई ऐसे मुकाबले खेले गए हैं, जो इसे और भी अधिक प्रतिष्ठित बनाते हैं। यहां पर अब तक 5 मेंस वर्ल्ड कप के फाइनल खेले जा चुके हैं, जो किसी एक मैदान पर सबसे अधिक है। भारत ने भी अपना पहला वर्ल्ड कप कपिल देव की कप्तानी में यहीं पर जीता था।

    लॉर्ड्स स्टेडियम को क्रिकेट का मक्का भी कहा जाता है। इस मैदान ने पिछले 200 सालों में कई ऐतिहासिक पड़ाव देखे हैं। यहां तक कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यहां पर सब्जियां भी उगाई गई थी। इस मैदान को दो बार अलग-अलग जगहों पर शिफ्ट भी किया जा चुका है। आइए इस स्टेडियम से जुड़ी कुछ रोचक बातें आपको बताते हैं।

    क्रिकेट स्टेडियम का नाम लॉर्ड्स कैसे पड़ा?

    लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड का नाम उसके संस्थापक थॉमस लॉर्ड के नाम पर रखा गया है। स्कॉटलैंड में जन्मे लॉर्ड गेंदबाज होने के साथ बिजनेसमैन भी थे। 1780 के दशक में लंदन के अमीर लोग 'बाइट कॉन्ड्यूइट क्लब' के जरिए क्रिकेट खेलते थे। वो एक ऐसा मैदान चाहते थे, जहां अधिक भीड़ न हो और आराम से क्रिकेट खेल सकें। नया स्टेडियम बनाने की जगह ढूंढ़ने की जिम्मेदारी थॉमस लॉर्ड को सौंपी गई। लॉर्ड ने 1787 में लंदन की भीड़भाड़ से दूर एक निजी क्रिकेट मैदान विकसित किया।

    यह मैदान जल्द ही रईसों और खिलाडियों का पसंदीदा केंद्र बन गया। समय के साथ यह मैदान दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट मैदानों में शामिल हो गया। पहले और दूसरे मेंस वर्ल्ड कप के फाइनल के अलावा इस मैदान पर कुल मिलाकर पांच आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल खेले गए।

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    1814 में खेला गया पहला मैच

    22 जून 1814 को यहां पहला मैच खेला गया था। दो बार इस स्टेडियम का स्थान बदला गया और उसके बाद इसे स्थायी पहचान मिली। इस मैदान ने 1932 में भारत के पहले टेस्ट मैच की मेजबानी की, 1976 में यहां पहला महिला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला गया।

    लॉर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम का दो बार बदला गया स्थान

    आज जिस मैदान को लॉर्ड्स कहा जाता है, उसे अपनी स्थायी जगह तक पहुंचने के लिए दो अलग-अलग ठिकानों से गुजरना पड़ा। पहला लॉर्ड्स मैदान आज के डॉर्सेट स्क्वॉयर क्षेत्र में था, लेकिन भूमि से जुड़े बदलावों के कारण उसे छोड़ना पड़ा। इसके बाद 1811 में दूसरा मैदान बनाया गया। यह भी ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया, क्योंकि उस इलाके से रीजेंट्स नहर निकालने की योजना बन गई। तब थॉमस लॉर्ड ने एक बार फिर नया स्थान तलाशा। आखिरकार सेंट जॉन्स वुड में वर्तमान परिसर तैयार हुआ और 22 जून 1814 को यहां पहला मैच खेला गया।

    लॉर्ड्स में उगाई सब्जियां

    दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन जब भयंकर खाद्य संकट से जूझ रहा था। जर्मन यू बोट्स ने समुद्री आपूर्ति को रोक दिया था, जिससे सरकार ने 'डिग फॉर विक्ट्री' अभियान चलाया। इस अभियान के तहत हर खाली जगह को खेती योग्य बनाया गया। इस अभियान से लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड भी इससे अछूता नहीं रहा। इसके आउटफील्ड के कुछ हिस्सों को सब्जियों की खेती के लिए तैयार कर दिया गया, जहां मकई समेत अन्य फसलें उगाई गई थी। युद्ध खत्म होने के बाद इसे फिर से क्रिकेट के लिए तैयार किया गया।

    लॉर्ड्स को क्यों कहा जाता है क्रिकेट का मक्का?

    लॉर्ड्स के पास क्रिकेट के नियम बनाने की विरासत, एमसीसी का मुख्यालय (जो क्रिकेट से जुड़े नियम बनाती है), ऐतिहासिक मैचों की मेजबानी और 200 सालों से अधिक समय से क्रिकेट खेले जाने के कारण इसे क्रिकेट का मक्का कहा जाता है। टेस्ट क्रिकेट की सबसे फेमस सीरीज एशेज की असली ट्रॉफी यहीं पर रखी जाती है।

    मैदान की बनावट भी है अनोखी

    मैदान की एक और अनोखी पहचान उसकी प्राकृतिक ढलान है, जिसे 'लॉर्ड्स स्लोप' कहा जाता है। मैदान का एक सिरा दूसरे सिरे की तुलना में लगभग 8 फीट ऊंचा है। यह अंतर सेंट जॉन्स वुड एरिया के प्राकृतिक भूमि के कारण है। मैदान बनाते समय इसको पूरी तरह से समतल नहीं किया गया था।

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