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    आईसीसी के लिए सिरदर्द बना पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों का भारतीय वीजा, टीमों को हो रही है परेशानी

    Updated: Tue, 13 Jan 2026 08:30 PM (IST)

    आईसीसी को पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों के भारतीय वीजा को लेकर सिरदर्द का सामना करना पड़ रहा है। वीजा संबंधी जटिलताओं के कारण कई क्रिकेट टीमों को परेशा ...और पढ़ें

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    आईसीसी के लिए सिरदर्द बना वीजा का मुद्दा

    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली: टी-20 विश्व कप को होने में अब एक महीने से भी कम समय बचा है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के सामने बड़ा संकट खड़ा गया है। विश्व कप में हिस्सा लेने वाली अमेरिकी क्रिकेट टीम के चार पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों को वीजा देने से भारत सरकार ने इन्कार कर दिया है।

    जिसके बाद टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाली कम से कम आठ टीमों ने पाकिस्तानी मूल के खिलाड़ियों के लिए भारतीय वीजा मंजूरी को लेकर आईसीसी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। भारत के सख्त आव्रजन नियमों और दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे भू-राजनीतिक तनाव इस समस्या की मुख्य वजह बने हुए हैं।

    ये है नियम

    भारतीय विदेश मंत्रालय के नियमों के अनुसार, पाकिस्तान में जन्मे व्यक्ति या जिनके माता-पिता अथवा दादा-दादी/नाना-नानी पाकिस्तान में पैदा हुए हों, उन्हें भारतीय वीजा के लिए पाकिस्तानी पासपोर्ट पर ही आवेदन करना अनिवार्य है। यह नियम खिलाड़ी की मौजूदा नागरिकता से अलग उनके पारिवारिक मूल पर लागू होता है। इसी नियम के चलते कई क्रिकेट बोर्ड मुश्किल में हैं।

    संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की टीम सबसे अधिक प्रभावित नजर आ रही है। टीम के कप्तान मोहम्मद वसीम सहित सात खिलाड़ी पाकिस्तान में जन्मे हैं। चूंकि यूएई नागरिकता नहीं देता, इसलिए ये खिलाड़ी पाकिस्तानी पासपोर्ट पर ही यात्रा करते हैं, जिससे वीजा प्रक्रिया और जटिल हो जाती है। ओमान की टीम भी इसी समस्या से जूझ रही है। ऑलराउंडर फैयाज बट समेत कई अहम खिलाड़ी पाकिस्तान में जन्मे हैं, जिनकी उपलब्धता पर अनिश्चितता बनी हुई है।

    कई देशों ने आईसीसी से मांगी मदद

    यूएई और ओमान के अलावा कनाडा, इटली, नीदरलैंड्स और अमेरिका (यूएसए) जैसे देशों ने भी औपचारिक रूप से आईसीसी को पत्र लिखकर मदद मांगी है। सूत्रों के मुताबिक, वीजा आवेदन जमा किए जा चुके हैं, लेकिन उच्चस्तर के हस्तक्षेप के बिना समय पर मंजूरी मिलना मुश्किल माना जा रहा है। इन टीमों का कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो कई प्रमुख खिलाड़ी विश्व कप में हिस्सा नहीं ले पाएंगे, जिससे प्रतियोगिता की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।

    पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी दिक्कत

    इससे पहले भी कई खिलाडि़यों को इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। पिछले साल इंग्लैंड के स्पिनर शोएब बशीर को अपने पिता के जन्मस्थान के कारण वीजा मिलने में देरी हुई थी। ऑस्ट्रेलिया के उस्मान ख्वाजा को 2023 में भारत दौरे से पहले प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ा था। वहीं 2019 में नीदरलैंड्स में जन्मे सिकंदर और साकिब जुल्फिकार भाइयों का वीजा भी उनके पाकिस्तानी मूल के कारण रोक दिया गया था, जबकि उनके अन्य साथी खिलाड़ियों को मंजूरी मिल चुकी थी।

    भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों का असर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शेड्यूल पर पड़ता रहा है। भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान जाने से इन्कार कर दिया था, जिसके बाद टूर्नामेंट को तटस्थ स्थान पर कराना पड़ा। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भारत में होने वाले महिला विश्व कप में अपनी टीम भेजने से इन्कार कर दिया और एशिया कप को भी यूएई में स्थानांतरित करना पड़ा।

    आईसीसी के लिए मुश्किल

    अब यह मामला आईसीसी की कूटनीतिक क्षमता की बड़ी परीक्षा बन चुका है। विश्व कप बेहद नजदीक है और समय तेजी से निकल रहा है। अगर समाधान नहीं हुआ तो कई टीमें अपने प्रमुख खिलाड़ियों के बिना उतरने को मजबूर होंगी।

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