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    लॉर्ड्स में जीत और पुराना इतिहास... पुरुष टीम ने जो काम 54 साल में किया वो पहली ही बार में कर गई महिला क्रिकेट टीम

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 10:53 AM (IST)

    लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर जीत भारत के लिए सपना रही है। यहां भारत की पुरुष टीम को पहली जीत के लिए 54 साल का इंतजार करना पड़ा था, लेकिन महिला टीम ने पह ...और पढ़ें

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स में फहराया परचम

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स में फहराया परचम

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    स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लंदन के लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर कल यानी 13 जुलाई 2026 को इतिहास रचा गया। ऐसा इतिहास जिसने नई रिकॉर्डबुक की शुरुआत की है। ये इतिहास रचा हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने। टीम इंडिया ने 142 साल बाद इस मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मैच में इंग्लैंड महिला टीम को 270 रनों से हरा दिया।

    ये जीत आम जीत नहीं है क्योंकि ये लॉर्ड्स पर आई है। कुछ मैदान सिर्फ मैदान नहीं होते बल्कि वो इमोशंस और विरासत का हिस्सा होते हैं जहां हर टीम अपनी याद रखने वाली मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है। भारत के लिए लॉर्ड्स उन मुश्किल मैदानों में से एक रहा है जहां जीत सपना होती है क्योंकि इस मैदान पर भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच साल 1932 में खेला था और तब से सिर्फ चार जीत ही उसके हिस्से आई हैं जिसमें से एक जीत महिला टीम की है।

    पुरुष टीम को लगे 54 साल

    भारत को इस मैदान पर अपनी पहली जीत महान कपिल देव की कप्तानी में साल 1986 में मिली थी। 1932 से 1986 जोड़ें तो 54 साल होते हैं। यानी क्रिकेट के घर पर भारत की पुरुष टीम का खाता 54 साल बाद खुला। ऐसा नहीं था कि फिर टीम इंडिया यहां लगातार जीत रही थी। कपिल देव के बाद भारत को लॉर्ड्स पर अगली जीत के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ा।

    भारत को लॉर्ड्स पर फिर अपनी अगली टेस्ट जीत मिली जून 2014 में एमएस धोनी की कप्तानी में। यानी 28 साल बाद। तीसरी जीत के लिए भारत को कम इंतजार करना पड़ा। अगस्त 2021 में विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने इस मैदान पर अपनी तीसरी टेस्ट जीत हासिल की।

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    1932 से जिस टीम ने क्रिकेट खेलना शुरू किया था वो इस मैदान पर अभी तक सिर्फ तीन ही टेस्ट जीत पाई है। ये बताता है कि इस मैदान पर जीत के भारत के लिए क्या मायने हैं।

    महिला टीम ने पहली बार में ही मारा छक्का

    लेकिन महिला टीम ने इतना लंबा इंतजार नहीं किया। भारतीय महिला क्रिकेट टीम पहली बार इस मैदान पर टेस्ट मैच खेल रही थी और पहली ही बार में उसने यहां जीत हासिल की। ये जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि जिस मैदान पर पुरुष टीम को सिर्फ तीन जीत मिली हैं वहीं महिला टीम पहली हीर बार में छक्का मार गई और जीती भी तो ऐसे जिसने कई रिकॉर्ड बना दिया।

    यास्तिका भाटिया ने शतक बनाते हुए इतिहास रचा। वह इस मैदान पर शतक जमाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनीं। क्रांति गौड़ ने पहली पारी में पांच विकेट लिए। वह इस मैदान पर पांच विकेट लेने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं। भाटिया ने वो काम किया जो सचिन तेंदुलकर नहीं कर पाए। सचिन का नाम लॉर्ड्स के ऑनर बोर्ड पर नहीं है क्योंकि उन्होंने यहां टेस्ट शतक नहीं बनाया, लेकिन अपने पहले ही टेस्ट में भाटिया ने ये काम कर दिया। क्रांति का नाम भी गेंदबाजों के ऑनर बोर्ड पर आ गया।

    जीत थी सपना

    इस मैदान पर जीत सपना थी और हासिल करना सातवें आसमान पर पहुंच जाना। इस मुश्किल काम को महिला टीम ने पहले ही प्रयास में अंजाम दे दिया। ये सिर्फ स्कोरकार्ड में लिखी जीत नहीं है बल्कि इस जीत ने भारतीय महिला क्रिकेट को नए आयाम दिए हैं और एक नया अध्याय जोड़ा है। कुछ दिनों पहले इंग्लैंड में महिला टी20 वर्ल्ड कप में भारत का सफर बुरी तरह से खत्म हुआ था, लेकिन ऊपर वाले ने कहानी तो कुछ और ही लिखी थी। वो कहानी यही टेस्ट मैच था। ये जीत बताती है कि भारत की महिलाओं में टैलेंट की कमी नहीं है। इन्हें मौका मिलता है और वो इतिहास रच देती हैं।

    ये मुकाम भारतीय महिला क्रिकेट को आसानी से नहीं मिला है। इसमें कई सालों की मेहनत, बलिदान और धैर्य की कहानी जुड़ी हुई है। ये भी मत मानिए कि ये सिर्फ मौजूदा टीम की उपलब्धि है। पर्दे के पीछे इस जीत में मिताली राज, अंजुम चोपड़ा, झूलन गोस्वामी जैसी तमाम पूर्व खिलाड़ियों की मेहनत भी है जिनके दम पर भारत में महिला क्रिकेट जिंदा ही नहीं रहा बल्कि लगातार आगे बढ़ता रहा।

    इस जीत का जश्न मनाइए क्योंकि ये भावुकता से भरी है। इसमें नई शुरुआत की चमक है और दुनिया पर राज करने की आहट। 

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