IND vs AUS: सिडनी में सचिन तेंदुलकर की ऐतिहासिक पारी से प्रेरणा लें विराट कोहली, टेंशन हो जाएगी खत्म!
भारतीय टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली की ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंद से छेड़खानी की परेशानी जगजाहिर हो चुकी है। कोहली को सचिन तेंदुलकर से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने सिडनी में 241 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी। सचिन तेंदुलकर भी तब ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों पर अपना विकेट गंवा रहे थे। फिर सिडनी में मास्टर ब्लास्टर ने इस कमी को दूर किया।

अभिषेक त्रिपाठी, जागरण ब्रिस्बेन। विराट कोहली का लगातार ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों पर आउट होना भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। गाबा में सोमवार को विराट फिर बाहर जाती वाइड गेंद को छेड़ बैठे और जोश हेजलवुड ने उन्हें एलेक्स कैरी के हाथों कैच कराया।
पर्थ टेस्ट की दूसरी पारी में शतकीय पारी को छोड़ दे तो विराट हर बार विकेट के पीछे कैच आउट हुए हैं। आफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों के विरुद्ध विराट की कमजोरी जगजाहिर है और विरोधी गेंदबाज इसका लाभ उठा रहे हैं। लगातार फ्लॉप हो रहे कोहली को यहां सचिन तेंदुलकर की 2004 में सिडनी में खेली गई 241 रन की पारी से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सचिन की अनुशासनात्मक पारी
सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी) में 33 चौकों की मदद से 436 गेंद पर 241 रनों की असाधारण पारी खेली थी जबकि उस दौरे पर वह भी विकेट के पीछे कैच आउट होने की समस्या से जूझ रहे थे। सचिन की उस पारी को उनकी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक माना जाता है क्योंकि उन्होंने 10 घंटे से अधिक समय तक बल्लेबाजी की और ड्राइव करने की अपनी प्रवृत्ति पर लगाम लगाई।
उन्होंने अपने अधिकतर रन ऑन साइड पर बनाए। सिडनी टेस्ट 2003-04 दौरे का अंतिम मैच था और सीरीज 1-1 से बराबर थी। यह स्टीव वॉ का अंतिम टेस्ट भी था। पहले बल्लेबाजी करते हुए आकाश चोपड़ा (45) और वीरेंद्र सहवाग (72) ने तेंदुलकर के लिए मंच तैयार किया।
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कवर ड्राइव खेलना भूले
लगातार विकेट के पीछे कैच आउट हो रहे सचिन ने अपने खेल से कवर ड्राइव को पूरी तरह से हटा लिया। मिड ऑफ और प्वाइंट के बीच रन बनाने से परहेज किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों द्वारा आफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों को छुआ ही नहीं। उस दिन एससीजी में सचिन ने जो दिखाया वह बल्लेबाजी का एक सबक था।
सचिन ने अपना तीसरा टेस्ट दोहरा शतक और 32वां शतक बनाया। इस दौरान सचिन ने वीवीएस लक्ष्मण (178) के साथ 353 रन जोड़े। ब्रेट ली ने 39.3 ओवर में 201 रन दिए और भारत ने 705/7 के विशाल स्कोर पर पारी घोषित की।
सचिन ने दिखाई मास्टर क्लास
ऑस्ट्रेलिया के लिए मैच बचाने के लिए स्टीव वॉ को दूसरी पारी में जी-जान से बल्लेबाजी करनी पड़ी। उस पारी में तेंदुलकर का दृष्टिकोण चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के अनुकूल ढलने और व्यक्तिगत कमजोरियों पर काबू पाने में एक मास्टरक्लास था। यह पारी उनकी मानसिक दृढ़ता और धैर्य का प्रमाण थी।
ऑफ स्टंप के बाहर जाती गेंदों को छोड़कर और सुरक्षित क्षेत्रों में रन बनाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को पूरी तरह बेअसर कर डाला था। कोहली भी अपनी परेशानियों को ठीक करने के लिए इसी तरह का धैर्य और अनुशासन ला सकते हैं।
सचिन की पारी के मायने
विराट गेंदबाजों को अपनी शर्तों पर चलने की अनुमति न देकर इसका लाभ उठा सकते हैं। सचिन की यह अविजित 241 रन की पारी केवल गलतियों को दुरुस्त करने के बारे में नहीं थी, बल्कि यह क्रीज पर ज्यादा से ज्यादा समय बिताने और विपक्षी गेंदबाजों को कमजोर करने के बारे में भी थी।
उन्होंने 600 मिनट से ज्यादा समय तक बेजोड़ एकाग्रता दिखाई, जिससे पता चला कि बेहतरीन पारी के लिए निरंतर ध्यान की जरूरत होती है। लंबी पारी खेलने में माहिर विराट परिस्थितियों के अनुसार जोखिम भरे शॉट खेलने से बचकर लंबे समय तक बल्लेबाजी करने की अपनी क्षमता को दोगुना करने से लाभ उठा सकते हैं।
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