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    हरीश राणा की इच्छामृत्यु मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एम्स में मंथन, पैलिएटिव केयर में भर्ती की तैयारी

    Updated: Thu, 12 Mar 2026 10:32 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एम्स हरीश राणा के इच्छामृत्यु मामले में चिकित्सकीय प्रक्रिया तय करेगा। उन्हें एम्स के पैलिएटिव केयर सेंटर में भर्ती किया ...और पढ़ें

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    चिकित्सकीय प्रक्रिया की दिशा और दशा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ‘इम्प्लीमेंटेशन कमेटी’ तय करेगी।

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। गाजियाबाद के हरीश राणा मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार चिकित्सकीय प्रक्रिया की दिशा और दशा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ‘इम्प्लीमेंटेशन कमेटी’ तय करेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बृहस्पतिवार को एम्स में दिनभर इस मामले को लेकर मंथन चलता रहा। अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार वरिष्ठ चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर यह विचार किया जा रहा है कि अदालत के निर्देशों को किस प्रक्रिया के तहत और कैसे लागू किया जाए।

    आगे की कार्रवाई का खाका करेंगे तैयार

    एस्म सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप हरीश राणा को एम्स के पैलिएटिव केयर सेंटर में भर्ती किया जाना है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उनकी देखभाल और आगे की चिकित्सकीय प्रक्रिया तय की जाएगी। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक हरीश राणा को एम्स में भर्ती नहीं किया गया था।

    अस्पताल सूत्रों का कहना है कि इस मामले में आगे की पूरी प्रक्रिया और कार्ययोजना एम्स की इम्प्लीमेंटेशन कमेटी तय करेगी। यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट के आदेश, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और तय चिकित्सा प्रोटोकाल को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई का खाका तैयार करेगी।

    गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एम्स के विशेषज्ञों के सेकेंडरी मेडिकल बोर्ड ने हरीश राणा की चिकित्सकीय स्थिति का मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी, जिसमें उन्हें स्थायी वेजिटेटिव अवस्था में बताया गया और सुधार की संभावना अत्यंत कम बताई गई थी।

    क्या होता है पैलिएटिव केयर?

    एम्स विशेषज्ञों के अनुसार पैलिएटिव केयर ऐसी चिकित्सा देखभाल होती है, जिसका उद्देश्य गंभीर या असाध्य बीमारी से पीड़ित मरीज को आराम देना और उसकी जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाना होता है।

    इसमें बीमारी को पूरी तरह ठीक करने के बजाय मरीज के दर्द, सांस लेने में तकलीफ, घबराहट, बेचैनी या अन्य शारीरिक-मानसिक परेशानियों को कम करने पर ध्यान दिया जाता है।

    पैलिएटिव केयर में डाॅक्टर, नर्स, काउंसलर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मिलकर मरीज और उसके परिवार की सहायता करते हैं। यह देखभाल आमतौर पर कैंसर, गंभीर न्यूरोलाजिकल रोग या लंबे समय से बेड पर पड़े मरीजों के लिए दी जाती है, ताकि उन्हें अधिकतम आराम और गरिमा के साथ देखभाल मिल सके।

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