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    UGC की शिकायत पर अल फलाह यूनिवर्सिटी का चेयरमैन हुआ गिरफ्तार, चार दिन की पुलिस रिमांड में उगलेगा राज

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 09:05 PM (IST)

    दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को धोखाधड़ी, वित्तीय गड़बड़ी और छात्रों से गलत जानकारी देकर फीस वसूलने ...और पढ़ें

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    अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को साकेत कोर्ट ने चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को यूनिवर्सिटी में धोखाधड़ी, वित्तीय गड़बड़ी और गलत जानकारी देकर छात्रों से फीस वसूलने के मामले में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) की शिकायतों के आधार पर की गई है। पुलिस ने सिद्दीकी के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं।

    गिरफ्तारी के बाद सिद्दीकी को साकेत कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए उसे चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उसके खिलाफ मनी लान्ड्रिंग के मामले में चार्जशीट दाखिल की है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 13 फरवरी को तय की है।

    ईडी ने 16 जनवरी को अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और सिद्दीकी के खिलाफ प्रिवेंशन आफ मनी लान्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत चार्जशीट दायर की थी। एजेंसी के अनुसार, जांच दिल्ली पुलिस की एफआइआर के आधार पर शुरू की गई। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (एनएएसी) से मान्यता होने का गलत दावा किया था, जबकि उसकी मान्यता समाप्त हो चुकी थी।

    जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी ने छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर फर्जी या भ्रामक जानकारी के जरिए दाखिले लिए और मोटी फीस वसूली। ईडी का कहना है कि इस तरह इकट्ठा किया गया पैसा अवैध कमाई की श्रेणी में आता है। एजेंसी ने कुछ संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच भी किया है।

    तलाशी के दौरान कई जगहों से नकदी, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए। ईडी ने दावा किया है कि कुछ फंड्स को सिद्दीकी के परिवार से जुड़ी कंपनियों और संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया। साथ ही, पैसों के लेन-देन को छिपाने के लिए अलग-अलग एंटिटीज के जरिए ‘लेयरिंग’ की गई।

    एजेंसी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के बड़े वित्तीय फैसलों में सिद्दीकी की सीधी भूमिका थी और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है। मामले की जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम एक अन्य गंभीर मामले में भी सामने आया है। पिछले साल 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए आतंकी हमले की जांच के दौरान यूनिवर्सिटी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के बीच कुछ संदिग्ध कड़ियां सामने आई थीं। विस्फोटक से भरी कार के ड्राइवर की पहचान डीएनए जांच से यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. उमर उन नबी के रूप में हुई थी।

    इसके अलावा यूनिवर्सिटी के कुछ अन्य स्टाफ सदस्यों को भी आतंकी संगठनों से संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि इन मामलों की जांच अलग से चल रही है। फिलहाल, क्राइम ब्रांच और ईडी दोनों एजेंसियां मिलकर पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि वित्तीय अनियमितताओं और अन्य आरोपों की सच्चाई सामने लाई जा सके।