दिल्ली में कम करने के बजाय प्रदूषण बढ़ाने में मदद कर रहीं एंटी स्मॉग गन, विशेषज्ञों ने बताया खतरनाक
दिल्ली में ग्रेप के चौथे चरण के दौरान सड़कों पर धूल कम करने के लिए इस्तेमाल हो रही एंटी-स्मॉग गनें अनजाने में प्रदूषण बढ़ा रही हैं। इनकी धीमी गति से य ...और पढ़ें
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सड़कों पर पानी का छिड़काव करते एंटी स्मॉग गन।
निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी में वायु प्रदूषण के कारण ग्रेप का चौथा चरण लागू हो गया। ऐसे में सड़कों पर उड़ने वाली धूल को खत्म करने के लिए चल रही एंटी स्मॉग गन प्रदूषण खत्म करने के बजाय अनजाने में इसे बढ़ाने में सहायक बन रही है। क्योंकि सड़कों पर धीमी गति के कारण पानी छिड़काव करते हुए चलने वाली इस एंटी स्मॉग गन से कई स्थानों पर जाम लगता है। इस जाम में फंसने के कारण वाहनों का प्रदूषण बढ़ता है।
दिल्ली में जैसे ही वायु गुणवत्ता स्तर बढ़ता है तो एमसीडी से लेकर डीडीए, एनडीएमसी और लोक निर्माण विभाग एंटी स्मॉग गन का उपयोग बढ़ा देते हैं। इस समय करीब 300 एंटी स्मॉग गन सड़कों पर दौड़ रही हैं। एक एंटी स्मॉग प्रतिदिन 25-30 किलोमीटर चलती है और उस इलाके में जाम का कारण बनती है। इसमें पीडब्ल्यूडी की ही करीब 200 मशीनें हैं।
इसके अलावा एडीएमसी की आठ, डीडीए की सात, दिल्ली जल बोर्ड की 21, एनसीआरटीसी की नौ, डीएसआईआईडीसी की आठ, डीएमआरसी की छह, एमसीडी की 28, एनएचएआई की चार, आईएफसीडी की एक एंटी स्माग गन पानी का छिड़काव करते हुए सड़क पर चलती है।
एंटी स्मॉग गन एक भारी वाहन पर स्थापित होती है। इसमें मौजूद पानी का छिड़काव सड़क पर किया जाता है। इससे हवा में उड़ने वाली धूल तो नीचे बैठने लगती है लेकिन छिड़काव के लिए वाहन की गति धीमी रखनी पड़ती है। इसके कारण इस वाहन पीछे गति थम जाती है।
इसकी वजह से कई स्थानों पर जाम जैसी स्थिति बन जाती है। जाम से फंसे वाहनों से कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रोजन के आक्साइड, कार्बन डाइआक्साइड हाइड्रोकार्बन और बेंजीन जैसे हानिकारक गैसें व कण निकलते हैं। जब एक ही स्थान पर गाड़ियां जाम में फंसती हैं तो इनका उत्सर्जन बढ़ जाता है।
दैनिक जागरण की टीम ने दिल्ली में शनिवार को विभिन्न स्थानों पर एंटी स्मॉग गन के संचालन से लगने वाले जाम की स्थिति को कैमरे में भी कैद किया। रफी मार्ग पर दौड़ती एनडीएमसी की एंटी स्माग गन के कारण पीछे जाम लगा हुआ था।
इसी तरह पूर्वी दिल्ली में आनंद विहार बस अड्डे के बाहर की सड़क पर चलती एंटी स्माग गन पानी का छिड़काव करती हुई नजर तो आ रही थी लेकिन इसके पीछे 300-400 मीटर लंबा जाम भी नजर आया। दक्षिणी दिल्ली के आउटर रिंग पर नेहरू प्लेस बस टर्मिनल के पास भी कुछ ऐसा ही दृश्य था। यहां एंटी स्मॉग गन के पीछे वाहनों की कतार लगी हुई थी। लोग पांच से दस मिनट तक जाम में फंस रहे थे।
एंटी स्माग गन के कारण लगने वाले जाम पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या के निजात के लिए ही मिस्ट स्प्रे का उपयोग किया जा रहा है। सड़कों पर बिजली के खंभों पर मिस्ट स्प्रे लगाया जा रहा है जिससे पानी का छिड़काव तो होता है लेकिन जाम भी नहीं लगता है। इसके लिए मिस्ट स्प्रे की संख्या बढ़ाने की योजना है।
एंटी स्मॉग गन के पीछे गाड़ी भी धोने लगते हैं लोग
एंटी स्मॉग गन का उपयोग वैसे तो सड़क पर धूल न उड़े, इसके लिए किया जा रहा है लेकिन कई लोग अपने वाहन भी इससे धो रहे हैं। इसके लिए कई वाहन इस मशीन के पीछे-पीछे चलते नजर आते हैं, जो कि जाम की वजह बनते हैं। इससे उस गाड़ी की भी धीमी गति दूसरों को भ्रम में डाल देती है और दूसरे वाहन चालक भी अपने वाहन को धीमा कर लेते हैं, जिससे जाम लग जाता है।
यह मशीन वायु प्रदूषण को कम करने में कितनी मददगार है इसका कोई अध्ययन नहीं हुआ है। बस सरकार को अधिकारियों को कुछ न कुछ करना है तो वायु प्रदूषण के नाम पर एंटी स्माग गन चला रखी है, जो कि धीमी गति से चलने के कारण जाम का कारण बनती हैं। इस तरह से ये अनजाने में प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके स्थान पर अन्य विकल्प को देखना चाहिए। - जगदीश ममगांई, शहरी मामलों के जानकार व पूर्व चेयरमैन एमसीडी निर्माण समिति
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