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    अवैध बोरवेल से दिल्ली का भूजल 'खाली', एनजीटी के निर्देश पर कार्रवाई तेज; बढ़ती मांग के बीच भूजल दोहन 100% पार

    Updated: Fri, 06 Feb 2026 01:30 AM (IST)

    दिल्ली में बढ़ती जनसंख्या के कारण पेयजल की मांग आपूर्ति से अधिक है, जिससे अवैध भूजल दोहन बढ़ रहा है। 2024 में भूजल दोहन रिचार्ज से 100% से अधिक रहा। ए ...और पढ़ें

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    दिल्ली के कई क्षेत्रों में अवैध भूजल दोहन हो रहा है। आने वाले दिनों में मांग और बढ़ेगी।

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    संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ रही जनसंख्या को पेयजल उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती है। वर्तमान समय में मांग लगभग 1250 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) की है। इसकी तुलना में लगभग एक हजार एमजीडी पानी उपलब्ध है। इससे दिल्ली के कई क्षेत्रों में अवैध भूजल दोहन हो रहा है। आने वाले दिनों में मांग और बढ़ेगी। इससे समस्या और बढ़ेगी। इसके समाधान के लिए बोरवेल का सर्वेक्षण कराने और उसके अनुसार कदम उठाने का निर्णय लिया गया है।

    जनसंख्या में वृद्धि होने की संभावना

    हाल ही में यमुना की सफाई और पेयजल आपूर्ति को लेकर केंद्र सरकार के साथ दिल्ली व पड़ोसी राज्यों की हुई बैठक में अत्यधिक भूजल दोहन पर चर्चा कर इसके प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।

    वर्ष 2041 तक दिल्ली में पानी की मांग 1418 एमजीडी तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041, ओओडी स्कीम, लैंड पूलिंग स्कीम से जनसंख्या में वृद्धि होने की संभावना है।

    बोरवेल सील किए जा रहे

    आवश्यकता को देखते हुए दिल्ली को विभिन्न बांधों से अधिक पानी उपलब्ध कराने पर बल दिया गया। दिल्ली के पास पानी का कोई स्त्रोत नहीं है। इससे भूजल पर निर्भरता बढ़ रही है। अभी दिल्ली जल बोर्ड पांच हजार से अधिक ट्यूबवेल से लगभग 135 एमजीडी पानी का दोहन कर रहा है।

    दिल्ली सरकार द्वारा सांख्यिकी पुस्तिका के अनुसार, दिल्ली में सिंचाई के लिए 21,477 ट्यूबवेल हैं। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में अवैध बोरवेल से भूजल दोहन किया जा रहा है। इसे लेकर एनजीटी नाराजगी जता चुका है। उसके निर्देश पर बोरवेल सील किए जा रहे हैं।

    सर्वेक्षण करने का काम सौंपा

    जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड भूजल दोहन की सही मात्रा निर्धारित करने के लिए केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड (डब्ल्यूएपीसीओएस) को सर्वेक्षण करने का काम सौंपा गया है।

    20 माह में सर्वे का काम पूरा किया जाएगा। उसके आधार पर आगे की योजना तैयार की जाएगी। वहीं, दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग द्वारा कैबिनेट निर्णय के अनुसार नई बोरवेल नीति बनाने पर कार्य आरंभ कर दिया गया है।

    दिल्ली में भूजल दोहन की स्थिति

    • वर्ष 2024 में 34,190.5 क्यूबिक हेक्टेयर भूजल रिचार्ज किया गया और 34453.6 क्यूबिक हेक्टेयर मीटर दोहन किया गया। भूजल दोहन की दर 100.77 प्रतिशत है। वर्ष 2023 में दोहर की दर 99.13 प्रतिशत थी।
    • 34 में से 14 तहसील अत्यधिक दोहन श्रेणी में, 13 गंभीर श्रेणी में, दो अर्ध गंभीर श्रेणी में हैं। सिर्फ पांच सुरक्षित श्रेणी में।
    • दिल्ली में 41.18 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक भूजल दोहन वाले क्षेत्र हैं। 38 प्रतिशत क्षेत्र खतरनाक श्रेणी में पहुंच गए हैं।
    • नई दिल्ली जिला में सबसे अधिक भूजल दोहन।
    • शाहदरा, उत्तर, दक्षिण और उत्तर पूर्व जिलों में अधिक भूजल दोहन।

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