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    दिल्ली हाई कोर्ट ने रेखा सरकार की पेड़ कटाई-छंटाई संबंधी SOP की वैधता पर उठाए सवाल, विभिन्न विभागों को नोटिस जारी

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 11:54 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार की पेड़ कटाई-छंटाई संबंधी एसओपी की वैधता पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा कि एसओपी का खंड-दो उसके 2023 के फैसले के विपर ...और पढ़ें

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    दिल्ली सरकार की पेड़ों की कटाई-छंटाई संबंधी एसओपी पर उठे सवाल।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार द्वारा दो मई व छह जून 2025 को जारी पेड़ों की कटाई-छंटाई से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की वैधता को चुनौती देने वाली दिल्ली हाई कोर्ट ने एसओपी के हिस्से पर सवाल उठाया है।

    एक तरफ जहां मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने कहा कि अदालत को रोजाना होने वाले उन हादसों का भी पता है जो फुटपाथ पर फैली डालियों की वजह से होते हैं।

    वहीं, दूसरी तरफ कहा कि दिल्ली सरकार का वन विभाग अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करते समय शिकायतों की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी देगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि एसओपी का खंड-दो इस कोर्ट के 2023 के फैसले के विपरीत कैसे है।

    अदालत ने रिकार्ड पर लिया कि एसओपी में प्रविधान किया गया है कि सामान्य देखभाल और हल्की छंटाई के लिए ट्री-आफिसर से किसी अनुमति की जरूरत नहीं होगी, भले ही डालियों की मोटाई 15.7 सेंटीमीटर से कम हो। पीठ ने कहा कि उक्त प्रविधान इस अदालत के 29 मई 2023 के एक फैसले के सीधे तौर पर विरोधाभास में है। उक्त निर्णय में कहा गया था कि 15.7 सेंटीमीटर परिधि के पेड़ को काटने की कोई मंजूरी नहीं है।

    चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने के निर्देश

    अदालत ने वन विभाग, पुलिस कमिश्नर, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी), केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) और दिल्ली छावनी बोर्ड को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

    जन सेवा वेलफेयर सोसाइटी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया कि दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम (डीपीटीए) के तहत पेड़ों को हटाने या उनकी छंटाई करने से पहले ट्री-आफिसर से पहले से अनुमति लेना जरूरी होता है।

    अधिनियम के एक प्रविधान में कहा गया है कि यदि पेड़ को तुरंत न काटा जाए, तो जान-माल या यातायात को गंभीर ख़तरा हो सकता है; ऐसी स्थिति में जमीन का मालिक पेड़ को काटने के लिए तत्काल कार्रवाई कर सकता है और पेड़ काटने के 24 घंटों के भीतर इस बात की सूचना ट्री आफिसर को दे सकता है।

    याचिका में कहा गया कि एक तरफ दिल्ली में हवा की गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है और फिर भी पेड़ों की कटाई कर रहे हैं।

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