TV पर लंबे एड ब्रेक से मिलेगा छुटकारा, 1 घंटे में सिर्फ 12 मिनट; दिल्ली HC ने चैनलों को दिया झटका
दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्राई के उस नियम को बरकरार रखा है, जिसके तहत टीवी चैनलों को प्रति घंटे अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की अनुमति है। ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला।
HighLights
दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्राई के विज्ञापन नियम को वैध ठहराया।
टीवी चैनलों को प्रति घंटे 12 मिनट विज्ञापन की अनुमति।
दर्शकों को बेहतर अनुभव देने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीकाम रेगुलेटरी अथारिटी आफ इंडिया (ट्राई) के उस नियामकीय ढांचे को वैध ठहराया है, जिसके तहत टीवी चैनलों को प्रत्येक घंटे में अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन प्रसारित करने की अनुमति है।
अदालत ने कहा कि विज्ञापनों की अवधि तय करना ट्राई के अधिकार क्षेत्र में आता है और यह व्यवस्था दर्शकों को बेहतर देखने का अनुभव देने तथा लंबे विज्ञापन ब्रेक रोकने के उद्देश्य से बनाई गई है।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने टीवी प्रसारकों और उद्योग संगठनों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि वर्ष 2004 में प्रसारण और केबल सेवाओं को दूरसंचार सेवाओं के दायरे में लाए जाने के बाद ट्राई को गुणवत्ता मानक तय करने का अधिकार मिला, जिसमें विज्ञापनों की अवधि निर्धारित करना भी शामिल है।
अदालत ने कही ये बातें
अदालत ने कहा कि नियम के अनुसार प्रत्येक एक घंटे में अधिकतम 10 मिनट व्यावसायिक विज्ञापन और दो मिनट सेल्फ-प्रमोशनल कंटेंट ही प्रसारित किया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विज्ञापनों को पूरे घंटे में संतुलित ढंग से प्रसारित करना और दर्शकों को लगातार लंबे विज्ञापन ब्रेक से राहत देना है।
याचिका दायर करने वाले प्रसारकों का मुख्य विरोध 12 मिनट की कुल सीमा से नहीं, बल्कि इसे प्रति घंटे लागू किए जाने से था। उनका कहना था कि इससे कार्यक्रमों की योजना और विज्ञापन स्लाट का प्रबंधन प्रभावित होता है।
समाचार चैनलों ने यह भी दलील दी कि ट्राई के टैरिफ नियमों के कारण उनकी सदस्यता से होने वाली आय पहले ही सीमित है। कई समाचार चैनल फ्री-टू-एयर हैं या बेहद कम शुल्क लेते हैं, इसलिए विज्ञापन ही उनकी आय का प्रमुख स्रोत हैं। उनका कहना था कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(अ) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है।
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हालांकि, हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि टीवी माध्यम प्रिंट मीडिया से अलग है, क्योंकि दर्शक प्रसारण के दौरान आने वाले विज्ञापनों को आसानी से छोड़ नहीं सकते।
सभी चैनलों पर समान नियम लागू करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं
विज्ञापनों की अवधि नियंत्रित करने से कार्यक्रमों या समाचार की सामग्री पर कोई रोक नहीं लगती, बल्कि केवल विज्ञापनों के प्रसारण के तरीके को विनियमित किया जाता है।
अदालत ने यह भी कहा कि सभी प्रकार के टीवी चैनलों पर समान नियम लागू करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं है। यह नियम सभी प्रसारकों पर समान रूप से लागू होता है और दर्शकों के हित में बनाया गया है।
विवाद टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले विज्ञापनों की समय-सीमा को लेकर है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2006 में केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 में संशोधन कर टीवी चैनलों के लिए प्रति घंटे अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन की सीमा तय की थी।
इसके बाद ट्राई ने वर्ष 2012 में स्टैंडर्ड्स आफ क्वालिटी आफ सर्विस (ड्यूरेशन आफ एडवरटाइजमेंट्स इन टेलीविजन चैनल्स) रेगुलेशंस जारी किए और वर्ष 2013 में संशोधन कर स्पष्ट किया कि प्रत्येक घंटे में अधिकतम 10 मिनट व्यावसायिक विज्ञापन और दो मिनट सेल्फ-प्रमोशनल सामग्री ही दिखाई जा सकेगी।
कई मीडिया प्रसारकों ने इस व्यवस्था को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि प्रति घंटे की सख्त सीमा से विज्ञापन प्रबंधन और राजस्व प्रभावित होता है।
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