दिल्ली में बनेगा पहला अंडरग्राउंड परमाणु और केमिकल कमांड सेंटर; युद्ध और रेडिएशन में भी रहेगा एक्टिव
दिल्ली को जल्द ही भूमिगत केमिकल, बायोलाॅजिकल, रेडियोलाॅजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) कमांड सेंटर मिलेगा। यह सुविधा परमाणु आपातकाल, रासायनिक आपदाओं और बड़े ...और पढ़ें

दिल्ली को मिलेगा पहला सीबीआरएन कमांड सेंटर। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
दिल्ली को मिलेगा पहला भूमिगत CBRN कमांड सेंटर
परमाणु, रासायनिक आपदाओं से निपटने में सहायक होगा
दिल्ली फायर सर्विसेज मुख्यालय में होगा स्थापित
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की सुरक्षा को चाक चौबंद करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दिल्ली को जल्द अपना पहला भूमिगत केमिकल, बायोलाॅजिकल, रेडियोलाॅजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) कमांड सेंटर मिलने जा रहा है।
दिल्ली फायर सर्विसेज के नए मुख्यालय में बनने वाली यह अत्याधुनिक सुविधा परमाणु आपातकाल, रासायनिक आपदाओं और बड़े पैमाने पर आने वाले संकटों से निपटने में राजधानी की तैयारियों को नई मजबूती देगी।
दिल्ली फायर सर्विस सूत्रों के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है, जिसमें दिल्ली फायर सर्विसेज के नए मुख्यालय के निर्माण और विशेष आपातकालीन-प्रतिक्रिया बुनियादी ढांचे को तैयार करने के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं।

यह प्रस्तावित मुख्यालय एक 'प्लग-एंड-प्ले' अंडरग्राउंड CBRN कमांड सेंटर से लैस होगा। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह परमाणु युद्ध, रेडियोलॉजिकल लीक या खतरनाक रासायनिक आपदाओं के दौरान भी बिना किसी रुकावट के पूरी तरह चालू रहेगा।
यह राजधानी में इस तरह का पहला कमांड सेंटर होगा। इसे इस तरह से इंजीनियर किया जा रहा है कि बाहर फैले खतरनाक रेडिएशन का अंदर मौजूद कर्मियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इससे बेहद नाजुक और गंभीर परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से कमांड और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखा जा सकेगा। फायर अधिकारी ने बताया कि किसी भी आपदा के समय यह मेन कमांड सेंटर दिल्ली में पहले से मौजूद तीन आपदा केंद्रों के साथ मिलकर ऑपरेशन को कोआर्डिनेट करेगा, उनमें नेहरू प्लेस, लक्ष्मी नगर और रोहिणी है।

इसके साथ ही, यह सेंटर दिल्ली फायर सर्विसेज की 'सर्च एंड रेस्क्यू' बटालियन का भी मार्गदर्शन करेगा। यह पूरा प्रोजेक्ट मौजूदा डीएफएस मुख्यालय की जमीन पर ही बनाया जाएगा और इसके अगले पांच वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है।
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एक अधिकारी का कहना है कि किसी भी बड़ी आपदा, आगजनी या रेस्क्यू ऑपरेशन में फायर डिपार्टमेंट अपनी भूमिका निभाता है। ऐसे में इस कमांड सेंटर का बनना दिल्ली के लिए बेहद जरूरी कदम है।
इससे न केवल हाई-रिस्क परिस्थितियों में सभी संबंधित एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल बेहतर होगा, बल्कि घटना पर एक्शन लेने का रिस्पाॅन्स टाइम भी काफी कम हो जाएगा।
अगले एक साल में आएंगे ये बदलाव
सेंट्रलाइज्ड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर: अगले एक साल में एक मुख्य केंद्र बनेगा जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जीपीएस और जीआईएस आधारित प्रणालियों से लैस होगा ताकि लाइव माॅनिटरिंग की जा सके।
जोनल कमांड सेंटर्स: दिल्ली के सभी पांच आपरेशनल जोन में अलग-अलग कमांड सेंटर भी बनाए जाएंगे
25 साल का लाॅन्ग-टर्म प्लान: यह पूरा प्रोजेक्ट डीएफएस के 25 साल के लाॅन्ग-टर्म एक्शन प्लान का हिस्सा है। इसे तत्काल, मध्यम और दीर्घकालिक चरणों में बांटा गया है, ताकि बढ़ती आबादी और आपदा प्रबंधन की जरूरतों के हिसाब से दिल्ली के बुनियादी ढांचे, मैनपावर और तकनीकी क्षमताओं को ग्लोबल स्टैंडर्ड के मुताबिक अपग्रेड किया जा सके।