विजिलेंस के छापे के बाद CM रेखा गुप्ता का एक्शन, पद से हटाए गए CPA प्रमुख; 40 से अधिक कर्मियों का भी ट्रांसफर
विजिलेंस छापे के बाद दिल्ली सरकार ने केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। सीपीए प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा समेत 40 से अधिक ...और पढ़ें
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HighLights
सीपीए प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा पद से हटाए गए।
40 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों का सीपीए से स्थानांतरण।
खरीद व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता लाने का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) पर हालिया विजिलेंस छापे के बाद सोमवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ी प्रशासनिक सर्जरी कर दी। सीपीए प्रमुख डा. विनोद कुमार रंगा को उनके पद से हटाते हुए उनके साथ 40 से अधिक मेडिकल, पैरामेडिकल और प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों का सीपीए से स्थानांतरण कर दिया।
इससे पहले विजिलेंस छापे के बाद दिल्ली स्वास्थ्य सेवाओं की महानिदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल को उनके पद से हटाया जा चुका था। दिल्ली सरकार की इस मामले में की इस दूसरी बड़ी कार्रवाई को विभाग में जवाबदेही तय करने और खरीद व्यवस्था पर नियंत्रण मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
सीपीए में कार्यरत 10 डॉक्टरों का स्थानांतरण किया गया
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आदेश के अनुसार सीपीए में कार्यरत 10 डाक्टरों का स्थानांतरण किया गया है। इनमें डा. विनोद कुमार रंगा सबसे प्रमुख नाम हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट, जूनियर मेडिकल लैब टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट और ड्राइवर सहित 20 पैरामेडिकल कर्मचारियों को भी बदला गया है। प्रशासनिक स्तर पर सेक्शन आफिसर, सीनियर असिस्टेंट और जूनियर असिस्टेंट श्रेणी के 10 कर्मचारियों का भी तबादला किया गया है।
सरकार ने केवल अधिकारियों को हटाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि सीपीए की पूरी कार्यप्रणाली को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से 12 चिकित्सा अधिकारियों को सीपीए में तैनात किया गया है। इनमें वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इनकी जिम्मेदारी खरीद, भंडारण, आपूर्ति और निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना होगी।
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प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं की समीक्षा
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार हाल में हुई विजिलेंस छापेमारी के दौरान खरीद प्रक्रियाओं, मानव संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं की समीक्षा की गई थी। इसके बाद सरकार ने सीपीए में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती का व्यापक आकलन कराया। ऐसे कर्मचारियों का भी विवरण जुटाया गया जो सीपीए के वेतनमान पर होने के बावजूद अन्य कार्यालयों में कार्यरत थे।
दिल्ली सरकार के लिए सीपीए बेहद महत्वपूर्ण इकाई है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में उपयोग होने वाली अधिकांश दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य सामग्रियों की खरीद यहीं से होती है। इसका बजट भी काफी बड़ा है। ऐसे में यहां की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों को सरकार गंभीरता से ले रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े किसी भी विभाग में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: CM
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े किसी भी विभाग में लापरवाही, मनमानी या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि डीजीएचएस को हटाने के बाद सीपीए में किया गया यह व्यापक फेरबदल पूरे विभाग के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अब जवाबदेही तय होगी और खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
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