चीनी वीजा रिश्वत केस में कार्ति चिदंबरम ने कहा-रिश्वत या साजिश का कोई आधार नहीं, हाईकोर्ट में 19 को होगी सुनवाई
कार्ति चिदंबरम ने चीनी वीजा घोटाले मामले में भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। ...और पढ़ें

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने चीनी वीजा घोटाले के मामले में भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय करने के फैसले को चुनौती दी है। यह याचिका न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा के समक्ष सूचीबद्ध की गई थी और हाईकोर्ट में इस पर 19 जनवरी को सुनवाई होगी।
भ्रष्टाचार के आरोप तय करने का दिया था आदेश
अक्टूबर 2024 में सीबीआई ने कार्ति चिदंबरम और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जो 2011 में उनके पिता पी. चिदंबरम के केंद्रीय गृह मंत्री रहते हुए एक पावर कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के लिए चीनी नागरिकों के वीजा में कथित रिश्वत के मामले से जुड़ी थी। 23 दिसंबर 2025 को एक ट्रायल कोर्ट ने कार्ति चिदंबरम और छह अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने का आदेश दिया था।
प्रभाव का गलत उपयोग कर मांगी रिश्वत
कोर्ट ने कहा था कि 'प्रथम दृष्टया' पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। इसके आधार पर कार्ति चिदंबरम के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 (रिश्वत लेकर किसी लोक सेवक को प्रभावित करने के लिए भ्रष्ट या अवैध साधनों का उपयोग) और धारा 9 (लोक सेवक के साथ व्यक्तिगत प्रभाव का प्रयोग करने के लिए रिश्वत लेना) के तहत आरोप तय किए जा सकते हैं।
दावा-रिश्वत या साजिश का कोई आधार नहीं
हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में शिवगंगा से लोकसभा सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और दस्तावेजों पर अपना न्यायिक विवेक नहीं लगाया और उन दस्तावेजों, सबूतों तथा गवाहों के बयानों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जो उन्हें बेगुनाह दर्शाते हैं। याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए किसी भी रिश्वत या साजिश का कोई आधार नहीं है।
50 लाख रुपये की मांग की गई
कार्ति की ओर से कहा गया कि आरोपी द्वारा रुपये या किसी और चीज की मांग, उसका भुगतान और आरोपी द्वारा स्वीकृति का सबूत होना चाहिए। माननीय ट्रायल कोर्ट ने गलत तरीके से यह टिप्पणी की है कि याचिकाकर्ता ने काम के बदले 50 लाख रुपये की मांग की थी। याचिकाकर्ता द्वारा कोई मांग किए जाने का न तो कोई आरोप है और न ही कोई सबूत (प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य)।
वीजा के 'री-यूज' पर भी किया स्पष्ट
याचिका में वकील अक्षत गुप्ता के माध्यम से याचिका में आगे कहा गया, 'माननीय ट्रायल कोर्ट यह नहीं समझ पाया कि वीजा का 'री-यूज' पहले से ही एक मौजूदा प्रथा थी, और किसी भी रूटीन प्रशासनिक स्पष्टीकरण के लिए साजिश की कोई आवश्यकता नहीं थी।'
कंपनी पर लग सकता था जुर्माना
सीबीआई ने 2022 में दर्ज अपनी एफआईआर के बाद दो साल की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की थी। एफआईआर में प्रारंभिक जांच के दौरान जांच अधिकारी के निष्कर्ष शामिल थे। इसमें आरोप लगाया गया था कि पंजाब स्थित टीएसपीएल 1980 मेगावाट की थर्मल पावर प्लांट स्थापित कर रही थी और इसका काम चीनी कंपनी शैनडोंगे इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्प (एसईपीसीओ) को आउटसोर्स किया गया था। प्रोजेक्ट समय से पीछे चल रहा था और कंपनी पर जुर्माने की संभावना थी।
सीबीआई ने क्या लगाया था आरोप
सीबीआई की एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि टीएसपीएल के एक कार्यकारी ने कार्ति चिदंबरम से उनके "नजदीकी सहयोगी/फ्रंटमैन" एस. भास्कररमण के माध्यम से संपर्क किया था।चार्जशीट में कार्ति चिदंबरम के अलावा उनके कथित नजदीकी सहयोगी और चार्टर्ड अकाउंटेंट एस. भास्कररमण, वेदांता की सहायक कंपनी टीएसपीएल और मुंबई स्थित बेल टूल्स को नामित किया गया है, जिसके माध्यम से कथित तौर पर रिश्वत दी गई थी।
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