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    'मैंने कोर्ट में अपनी बात रख दी है...', जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के फैसले पर आया केजरीवाल का बयान

    By AgencyEdited By: Sonu Suman
    Updated: Tue, 21 Apr 2026 04:09 PM (IST)

    आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कथित शराब घोटाला मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की याचिका खारिज होने पर टिप्पणी करने से इनका ...और पढ़ें

    एएनआई, नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कथित शराब घोटाला मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग खारिज होने के बाद कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए केजरीवाल ने कहा कि तमिलनाडु में व्यस्तता के कारण उन्होंने कोर्ट का आदेश नहीं पढ़ा है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल 2026 को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले वे मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के लिए प्रचार कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा, "मैं कल यहां था। मुझे वापस जाकर आदेश पढ़ना होगा। मैंने अदालत में अपनी बात रख दी है, इसलिए मैं इससे आगे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा।"

    केजरीवाल ने पक्षपात की आशंका होने की कही थी बात

    केजरीवाल ने कथित शराब घोटाला मामले में जस्टिस शर्मा को इस मामले से हटाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने उनके बच्चों को केंद्र सरकार के वकील के रूप में नियुक्त किए जाने से हितों के टकराव का आरोप लगाया था और तर्क दिया था कि इससे पक्षपात की आशंका पैदा होती है।

    इसी बीच, भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने केजरीवाल पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख ने न्यायपालिका की एक महिला सदस्य पर दबाव डालने की कोशिश की।

    न्यायपालिका की महिला सदस्य पर दबाव बनाने की कोशिश: बांसुरी स्वराज

    बांसुरी स्वराज ने कहा, "अरविंद केजरीवाल दबंग हैं। उन्होंने देश की न्यायपालिका की एक महिला सदस्य पर दबाव डालने की कोशिश की। न्यायपालिका पर दबाव बनाने की उनकी राजनीति को खारिज करते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले को स्थानांतरित करने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया। अब यह साबित हो गया है कि आम आदमी पार्टी एक नाटक कंपनी है और अरविंद केजरीवाल इस कंपनी के निदेशक हैं।"

    दिल्ली उच्च न्यायालय ने केजरीवाल की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आरोप अनुमान पर आधारित थे और पूर्वाग्रह की उचित आशंका के कानूनी मानक को पूरा नहीं करते।

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