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    लालू-राबड़ी और तेजस्वी को दिल्ली कोर्ट से फौरी राहत, लारा परियोजना मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुरक्षित रखा फैसला

    Updated: Thu, 12 Feb 2026 03:27 PM (IST)

    लारा परियोजना मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। कोर्ट ने ...और पढ़ें

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लारा परियोजना मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू-राबड़ी और तेजस्वी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से फौरी राहत मिली है। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को लारा परियोजना मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोप तय करने पर अपना ऑर्डर सुरक्षित रख लिया है।

    यह केस लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव और दूसरे 16 आरोपियों के खिलाफ है। अब इस मामले में अदालत 3 मार्च को फैसला दे सकती है। 

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    उल्लेखनीय है कि इससे पहले, आआरसीटीसी घोटाले के मामले में बुधवार (11 फरवरी) को आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पूर्व रेल मंत्री नेता लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव की याचिका का सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में विरोध किया। सीबीआई ने तर्क दिया था कि लालू सहित अन्य यह तर्क देकर मुकदमें से बच नहीं सकते कि जब ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया था तब उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं थी।

    न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष सीबीआई की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल डी पी सिंह ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं पर मुकदमा चलाने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं था। उन्होंने अदालत को बताया कि इस संबंध में मार्च 2020 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी राय दी थी। डीपी सिंह ने आगे कहा था कि चूंकि मामला लंबा खिंच रहा था, इसलिए बाद में कानून के अनुसार मंजूरी ली गई थी।

    डीपी सिंह ने कहा था कि मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन मंजूरी ले ली गई। मंजूरी उस समय ली गई जब धारा 207 (सीआरपीसी) के तहत कार्यवाही चल रही थी। इसलिए, इससे कोई पूर्वाग्रह उत्पन्न नहीं हुआ। 13 अक्टूबर 2025 को राउज एवेन्यू की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 11 अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के कथित अपराधों के लिए आरोप तय किए थे।
    निर्णय के खिलाफ लालू, राबड़ी देवी और तेजस्वी ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 या दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के तहत मंजूरी के अभाव में संज्ञान लिया। इस मामले में कुल 14 आरोपित हैं।

    (समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)