दिल्ली में यमुना के पानी की क्वालिटी पर निगरानी रखेंगे 41 ऑनलाइन स्टेशन, नालों पर भी रखी जाएगी नजर
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने यमुना और शहर के मुख्य नालों की जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए 41 ऑनलाइन निगरानी स्टेशन स्थापित करने का फैसला किया है। यह निर्णय उच्च न्यायालय के आदेश के बाद लिया गया है। इन स्टेशनों से जल में मौजूद प्रदूषकों पर नजर रखी जाएगी जिसमें बीओडी सीओडी और टीएसएस जैसे तत्व शामिल होंगे। इसका उद्देश्य जल प्रदूषण को कम करना है।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने यमुना और शहर के प्रमुख नालों की जल गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए 41 ऑनलाइन निगरानी स्टेशनों (ओएलएमएस) की आपूर्ति, स्थापना और संचालन हेतु निविदा जारी की है।
पहले 32 इकाइयों की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना में पांच वर्षों का संचालन और रखरखाव भी शामिल होगा, जिससे चौबीसों घंटे निगरानी और डीपीसीसी सर्वर पर डेटा का प्रसारण सुनिश्चित होगा।
निविदा के अनुसार, यमुना और अन्य नदियों के हिस्सों सहित छह नदी स्थलों पर प्रवाह, पीएच, जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी), रासायनिक ऑक्सीजन मांग (सीओडी), कुल निलंबित ठोस (टीएसएस), कुल नाइट्रोजन (टीएन), कुल फास्फोरस (टीपी), अमोनियम, घुलित ऑक्सीजन और तापमान मापने के लिए प्रणाली स्थापित की जाएंगी।
इसके अलावा, यमुना में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गिरने वाले 35 नालों में प्रवाह, पीएच, बीओडी, सीओडी, टीएसएस और कुल कार्बनिक कार्बन (टीओसी) जैसे मापदंडों पर नजर रखने के लिए ओएलएमएस लगाया जाएगा।
यह निर्णय दिल्ली हाईकोर्ट के आठ अप्रैल 2024 के आदेश के बाद लिया गया है। इसे डीपीसीसी बोर्ड की 70वीं बैठक और 24 जुलाई 2025 को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अंतिम रूप दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि ये ऑनलाइन स्टेशन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी नवीनतम दिशानिर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुरूप काम करेंगे।
पहले, प्रदूषकों पर वास्तविक समय के आंकड़े प्राप्त करने के लिए यमुना नदी और विभिन्न खुले नालों के किनारे 32 ऑनलाइन निगरानी स्टेशन स्थापित करने की योजना थी। अब यह संख्या बढ़ाकर 41 कर दी गई है।
इस परियोजना का उद्देश्य अत्यधिक प्रदूषित जल निकायों में प्रवेश करने वाले प्रदूषकों पर नज़र रखना और उन्हें कम करने के लिए समय पर कार्रवाई करना है।
डीपीसीसी इन जल गुणवत्ता निगरानी प्रणालियों को स्थापित करने के लिए ज़िम्मेदार है, जो बीओडी, सीओडी, टीएसएस, टीएन और अमोनिया सहित कई मापदंडों को मापेंगे।
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