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    दिल्ली के वायु प्रदूषण में 23 वर्षों में नहीं हुआ खास सुधार, घटने के बजाय बढ़ता ही गया पीएम-2.5

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 07:41 AM (IST)

    विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति में 1998 से 2023 तक कोई खास सुधार नहीं हुआ है। शिकागो विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के अनुसार पीएम 2.5 के स्तर में उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली की भौगोलिक स्थिति के कारण प्रदूषण के कण यहां जमते हैं। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता है।

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    एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स रिपोर्ट (एक्यूएलआई) के डेटा की रिपोर्ट में आया सामने।

    संजीव गुप्ता, जागरण। मानसून की मेहरबानी से फिलहाल भले ही राजधानी की हवा साफ चल रही हो और पूर्ववर्ती आप सरकार के बाद भाजपा सरकार भी इसके लिए अपनी पीठ थपथपाने में पीछे नहीं रहती हो।

    लेकिन वर्ष दर वर्ष बीतने के बावजूद वायु प्रदूषण के हालात में बहुत सुधार नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह जमीनी स्तर पर वर्ष भर कारगर कदम नहीं उठाना है।

    शिकागो विश्वविद्यालय के ऊर्जा नीति संस्थान की एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स रिपोर्ट (एक्यूएलआई) जिस डेटा पर तैयार की जाती है, वो एटमोस्फेरिक कंपोजिशन एनालेसिस ग्रुप, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से लिया जाता है।

    2010-11 और 2015-16 सर्वाधिक प्रदूषित वर्ष रहे

    यहीं से प्राप्त 23 साल (1998 से 2023 तक) के पीएम 2.5 के आंकड़े बताते हैं कि इतनी लंबी समयावधि में भी वायु प्रदूषण के स्तर में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ है।

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    थोड़ा बहुत ही अंतर देखने को मिलता है। 2010-11 और 2015-16 सर्वाधिक प्रदूषित वर्ष रहे हैं। एक्यूएलआई रिपोर्ट के अनुसार जीवन प्रत्याशा में कोई अहम बदलाव नजर नहीं आता।

    एन्वायरोकैटेलिस्ट के संस्थापक एवं मुख्य विश्लेषक सुनील दहिया कहते हैं, दिल्ली की भौगोलिक स्थिति और कम वायु प्रसार क्षमता के कारण प्रदूषण के कण यहां जमते हैं और लंबे समय तक टिके रहते हैं।

    हालांकि दिल्ली के प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा इसके बाहर से आता है, इसलिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और व्यापक एयर-शेड (300-400 किमी तक के दायरे) में स्थानीय उत्सर्जन स्रोतों को नियंत्रित करना बेहद आवश्यक है।

    शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता

    कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी, आईआईटी कानपुर के डीन प्रो. एसएन त्रिपाठी कहते हैं, दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार की भी आवश्यकता है, जैसे यातायात की भीड़ और संबंधित उत्सर्जन को कम करने के लिए पहले-मील और अंतिम-मील की कनेक्टिविटी को बढ़ाना।

    सार्वजनिक परिवहन तक निर्बाध पहुंच की सुविधा प्रदान करके प्रभावी संपर्क निजी वाहनों पर निर्भरता को कम करता है जो बदले में यातायात की मात्रा और उत्सर्जन को कम करता है।

    इसी तरह राइड-शेयरिंग नीतियां जो मार्गों को अनुकूलित करती हैं और वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाती हैं। इससे भीड़ कम होती हैं और वायु गुणवत्ता में भी सुधार नजर आता है।

    1998 से 2023 के दौरान पीएम 2.5 और जीवन प्रत्याशा

    वर्ष पीएम-2.5 जीवन प्रत्याशा
    1998 56.31 5.03
    1999 56.4 5.04
    2000 60.2 5.41
    2001 65.76 5.95
    2002 68.65 6.24
    2003 78.4 7.19
    2004 71.91 6.56
    2005 74.47 6.81
    2006 69.98 6.37
    2007 77.88 7.14
    2008 85.49 7.89
    2009 79.6 7.31
    2010 100.65 9.37
    2011 104.4 9.74
    2012 87.09 8.04
    2013 90.89 8.42
    2014 84.89 7.83
    2015 100.79 9.39
    2016 104.5 9.75
    2017 99.22 9.23
    2018 99.26 9.24
    2019 92.73 8.6
    2020 85.55 7.89
    2021 92.84 8.61
    2022 84.66 7.81
    2023 88.35 8.17

    नोट: पीएम 2.5 का स्तर माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में

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