Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    दिल्ली के लोगों को याद आया 1971 का वो दौर... अब CM रेखा भी स्टूडेंट्स को राहत देने पर कर रही विचार

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 08:05 AM (IST)

    दिल्ली में यू-स्पेशल बस सेवा की फिर से शुरुआत होने पर पुराने छात्र यादों में खो गए। 1971 में शुरू हुई यह सेवा छात्रों के लिए सस्ती और सुरक्षित थी। 90 के दशक में 400 बसें चलती थीं। धीरे-धीरे यह सेवा कम हो गई लेकिन अब छात्र संगठन इसे फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं। सरकार रियायती मेट्रो पास पर भी विचार कर रही है।

    Hero Image
    याद आया 50 पैसे का किराया और 12.5 रुपये का पास

    उदय जगताप, नई दिल्ली। यू-स्पेशल बस सेवा की दोबारा शुरुआत होते ही विश्वविद्यालय में पढ़ चुके पूर्व छात्रों को गुजरे जमाने के दिन याद आ गए। राजधानी में 1971 में यू-स्पेशल बसें शुरू हुईं थीं। तब किराया 50 पैसे हुआ करता था। दीपावली के दिन मलकागंज डिपो से इसकी शुरुआत हुई थी।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    दिल्ली ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (डीटीसी) द्वारा शुरू की गई इस सेवा ने जल्द ही दिल्ली विश्वविद्यालय के सुरक्षा, किफायती और विश्वसनीय परिवहन का प्रतीक बनकर छात्रों के जीवन का हिस्सा बन गई।

    डूसू में उपाध्यक्ष रहे और वर्तमान में रामानुजन कालेज के प्राचार्य प्रो. रसाल सिंह ने कहा, बीसवीं सदी के नौवें दशक में यू-स्पेशल बस सेवा सर्वाधिक प्रचलित हो गई थी। तब लगभग 400 बसें रोजाना, करीब 1.90 लाख छात्रों को सेवा प्रदान करती थीं।

    उन्होंने कहा, साल 2000 में डूसू के पैनल में था। तब हम बसों की संख्या बढ़ाने की मांग करते थे। अब दोबारा सेवा का शुरू होना छात्रों के लिए सुखद खबर है। यह ऐसे वक्त में हुआ है जब चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के चलते कालेजों की समयावधि बढ़ाई गई है। बाहरी कालेजों में छात्राओं की सुरक्षा एक बड़ा सवाल होता है और इससे उन्हें परेशानी नहीं होगी। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आने वाले छात्रों को अधिक फायदा मिलेगा।

    राजधानी कालेज में प्रोफेसर और पूर्व छात्र प्रो. पंकज कुमार गर्ग ने पुराने दिन को याद करते हुए कहा कि यू स्पेशल बसें ही विश्वविद्यालय पहुंचने का जरिया हुआ करती थीं। बीसवीं सदी के आठवें दशक में जब वह पढ़ते थे तब 12.50 रुपये का महीने का पास बना करता था।

    बताया कि जनकपुरी से उत्तरी परिसर के एसजीबीटी खालसा कॉलेज पढ़ने जाया करते थे। बसें लाइफलाइन थीं। आने-जाने के लिए दोस्तों का ग्रुप बन गया था। लौटते वक्त 3.30 बजे पटेल चेस्ट से बस पकड़ते थे। सभी दोस्त एक साथ मिलकर जाते थे। अब मेट्रो का चलन है, लेकिन छात्रों के लिए उसका खर्च वहन करना आसान नहीं है।

    डीयू के शिक्षा विभाग में प्रोफेसर और पूर्व छात्र डा. लतिका गुप्ता ने कहा, मैं जीसस एंड मेरी कालेज में पढ़ती थी। तब सात रुपये का पास बनता था। यू स्पेशल बसें कक्षाओं के समयावधि के अनुसार चलती थीं। उस वक्त शाम को 4.25 पर आखिरी बस जाया करती थी। हमारी क्लास 4.20 पर छूटती थी। बसों पर नियमित चालकों की ड्यूटी होती थी। वह हम लोगों को पहचानते थे। कई बार इंतजार कर लेते थे।

    यह भी पढ़ें- दिल्ली के वायु प्रदूषण में 23 वर्षों में नहीं हुआ खास सुधार, घटने के बजाय बढ़ता ही गया पीएम-2.5

    बताया कि तब मैं गाजियाबाद में रहती थी। आइटीओ तक यू-स्पेशल बस से आती थी। तब मोबाइल फोन नहीं थे, लेकिन तब भी छात्राएं आपस में समन्वय बना लेती थीं। बसों के समय के चलते सब एक दूसरे के दोस्त बन गए थे। कई बसें छात्राएं स्पेशल होती थीं। इससे कभी असुरक्षित महसूस नहीं होता था। विद्यार्थी बसों में अंताक्षरी खेलते रहते थे। जो पढ़ना चाहते थे वह पढ़ भी लेते थे। उस दौरान कई दोस्त बने, जो आज भी टच में हैं।

    धीरे-धीरे बंद होती चली गईं

    यू स्पेशल बसों का दौर 2008-09 से कम होना शुरू हुआ था। इनकी संख्या लगातार घटती गई। 2019–20 तक ये घटकर 17 रह गईं। प्रो. रसाल सिंह ने कहा, छात्र स्वयं की गाड़ियों का इस्तेमाल करने लगे। बाद में मेट्रो के विस्तार और परिवहन विकल्पों के बढ़ने के कारण बसों का संचालन कम हो गया। डीटीसी को घाटे की बात भी सामने आई थी।

    अब रियायती मेट्रो पास पर सरकार कर रही विचार

    यू-स्पेशल बसों क लिए तमाम छात्र संगठन संघर्षरत रहे हैं। एबीवीपी ने हाल में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। मुख्यमंत्री ने बसों की शुरुआत के दौरान कहा कि "मेरे पास एबीवीपी नीत डूसू छात्रसंघ के पदाधिकारी यू-स्पेशल बसेज के लिए कई बार आए और ज्ञापन सौंपा जिसके परिणामस्वरूप यू स्पेशल बसेज आपके सामने है। साथ ही, उनकी एक और मांग मेट्रो रियायती पास पर भी विचार कर रही हैं और जल्दी इस पर निर्णय लिया जाएगा।