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    दो दशक में दूसरी बार... दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में मार्च में देखने को मिली धुंध, थमी वाहनों की रफ्तार

    Updated: Tue, 10 Mar 2026 02:50 PM (IST)

    उत्तर भारत में मार्च में असामान्य रूप से घना कोहरा देखा गया, खासकर दिल्ली-एनसीआर, मेरठ और पश्चिमी यूपी में, जिससे दृश्यता कम हुई। मौसम विभाग ने इसे 20 ...और पढ़ें

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    उत्तर भारत में मार्च में असामान्य रूप से घना कोहरा देखा गया। जागरण

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर भारत में मार्च का महीना आमतौर पर चटक धूप और बढ़ती गर्मी के लिए जाना जाता है, लेकिन इस साल मौसम के मिजाज ने सबको हैरान कर दिया है। आज सुबह दिल्ली-एनसीआर, मेरठ, हापुड़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्से घने स्मॉग नजर आए। सड़कों पर विजिबिलिटी इतनी कम रही कि यमुना एक्सप्रेस-वे समेत कई राजमार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई।

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    2008 की यादें हुई ताजा

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, मार्च के महीने में इस तरह का घना कोहरा कोई पहली बार नहीं देखा गया है। मौसम विभाग ने साल 2008 का उदाहरण देते हुए बताया कि 6 से 8 मार्च के बीच भी ऐसी ही भीषण स्थिति बनी थी।

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    उस वक्त कोहरे के कारण उत्तर भारत की पावर ट्रांसमिशन लाइनें फेल हो गई थीं, जिससे बड़ा बिजली संकट पैदा हो गया था। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस बार अभी तक किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।

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    कोहरे के पीछे का वैज्ञानिक कारण

    मौसम वैज्ञानिकों ने इस 'बेमौसम' बदलाव के पीछे किसी चमत्कार के बजाय ठोस भौगोलिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:-

    • पश्चिमी विक्षोभ: हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय विक्षोभ के कारण मैदानी इलाकों में हवाओं का रुख बदला है।
    • नमी का भारी प्रवेश: पिछले दिनों हुई हल्की बूंदाबांदी और निचले वायुमंडल में स्थिर 'बाउंड्री लेयर' की वजह से नमी संघनित होकर घने कोहरे में बदल गई।
    • तापमान में गिरावट: रात के समय तापमान गिरने और पूर्वी हवाओं के संगम ने 'दिसंबर जैसी' धुंध की स्थिति पैदा कर दी।

    ईरान-इजरायल युद्ध का कनेक्शन: अफवाह या हकीकत?

    इंटरनेट मीडिया पर इस कोहरे को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ नेटिजन्स इसे ईरान-इजरायल युद्ध में इस्तेमाल हो रहे हथियारों और रसायनों के धुएं से जोड़ रहे हैं। उनका तर्क है कि युद्ध के कारण वैश्विक जलवायु प्रभावित हो रही है।

    विशेषज्ञों की राय: रक्षा और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हजारों किलोमीटर दूर चल रहे युद्ध के धुएं का उत्तर भारत के स्थानीय मौसम पर ऐसा असर पड़ना वैज्ञानिक रूप से संभव नहीं है। यह विशुद्ध रूप से एक स्थानीय मौसमी घटना है।

    आगे क्या?

    मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों तक सुबह के समय हल्की धुंध बनी रह सकती है। हालांकि, जैसे-जैसे सूरज की तपिश बढ़ेगी, कोहरा छंटने लगेगा। प्रशासन ने वाहन चालकों को एक्सप्रेस-वे पर सावधानी बरतने और फॉग लाइट्स का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।

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