'मन में मानवीय मूल्य और दिल मे हनुमान...', राजनाथ सिंह बोले- जाबांज जवानों ने किया चुन-चुन कर आतंकियों का सफाया
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनुमंत भवन का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है। 100 से अधिक देशों को सैन्य साम ...और पढ़ें

दिल्ली में हनुमत भवन के उद्घाटन पर पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। फोटो: जागरण
HighLights
भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर, निर्यात 100 से अधिक देशों को
हनुमंत भवन सेवा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का बड़ा केंद्र
आधुनिक शिक्षा को संस्कारों के साथ जोड़ने का किया आग्रह
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को हनुमंत भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज का भारत रक्षा उत्पादन के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने वाला है।
घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। जो पहले के मुकाबले चार गुना ज्यादा है। आज भारत में बने सैन्य गोले और टैंक दुनिया के 100 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं।
उन्होंने सैन्य अभियानों के दौरान जवानों के शौर्य की चर्चा करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के भारतीय जांबाज जवानों ने भगवान हनुमान को अपने हृदय में रखकर मिशन को अंजाम दिया था।
आतंकियों का चुन-चुनकर खात्मा किया
सैनिकों पर हमला करने वाले आतंकियाें का चुन-चुनकर खात्मा किया। हमारे पास उस वक्त आतंकवादियों के खात्मे से भी बहुत आगे बढ़कर कार्रवाई करने की क्षमता थी, लेकिन भगवान हनुमान से संयम की प्रेरणा लेते हुए हमने खुद को मर्यादित रखा।
रक्षा मंत्री ने हनुमंत भवन को सेवा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का एक बड़ा केंद्र बताया और स्वतंत्रता आंदोलन में संतों और ऋषियों के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।
भारत ऋषियों, मुनियों और संतों की भूमि
उन्होंने कहा कि भारत मूल रूप से ऋषियों, मुनियों और संतों की तपस्या की भूमि है। हमारी असली पहचान संतों की परंपरा और उनके दिए मानवीय मूल्यों से ही है। प्राचीन काल में राजा-महाराजा भी संतों के चरणों में बैठकर उनकी सेवा करना अपना परम सौभाग्य मानते थे।
संतों ने न सिर्फ देश के स्वतंत्रता आंदोलन में जन-जन के भीतर राष्ट्रवाद की अलख जगाई, बल्कि आजादी के बाद चले राम मंदिर आंदोलन में भी उनकी भूमिका से परिचित है। जिस देश में संतों का आदर और सम्मान होता है, वहां की संस्कृति कभी धूमिल नहीं होती।
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रक्षा मंत्री ने सदाशिव मंदिर ट्रस्ट से अपील करते हुए कहा कि आज के विज्ञान और तकनीक के युग में वह आधुनिक शिक्षा को संस्कारों के साथ जोड़ें।
इसके लिए आश्रम में नियमित रूप से योग, ध्यान, संस्कृत के साथ-साथ कंप्यूटर और नई तकनीक से जुड़े कैंप भी आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपनी ऐतिहासिक पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण कर रहा है, जो नए भारत की तस्वीर है।