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    सैदुलाजाब इमारत हादसा: 48 घंटे बाद भी बचाव कार्य जारी, मलबे में अभी भी लोगों के दबे होने की आशंका

    By Rais Rais Edited By: Sonu Suman
    Updated: Tue, 02 Jun 2026 05:50 AM (IST)

    सैदुलाजाब गांव में इमारत ढहने के 48 घंटे बाद भी राहत अभियान जारी है, जिसमें मलबे के नीचे और लोगों के फंसे होने की आशंका है। बचाव दल सीमित जगह और झुकी ...और पढ़ें

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    सैदुलाजाबा हादसे में अभी भी बचाव कार्य जारी।

    HighLights

    1. सैदुलाजाब इमारत ढहने के 48 घंटे बाद भी राहत जारी।

    2. कई लोग अभी भी लापता, मोबाइल लोकेशन घटनास्थल पर।

    3. सीमित जगह, झुकी इमारत से बचाव कार्य में चुनौती।

    जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। सैदुलाजाब गांव में इमारत गिरने के 48 घंटे बाद भी राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मलबा पूरी तरह हटाने में अभी 24 घंटे से अधिक समय लग सकता है। हादसे के बाद से एनडीआरएफ, दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से मौके पर काम कर रही हैं। मलबे को हटाने के लिए एक हाइड्रा क्रेन और दो बड़ी क्रेनें लगाई गई हैं। अब तक करीब 55 ट्रक मलबा हटाया जा चुका है।

    एनडीआरएफ के अधिकारियों के अनुसार हादसे के समय इमारत के साथ बने कैंटीन में लोगों के मौजूद होने की सूचना मिली थी। इसी वजह से शुरुआती चरण में बचाव दलों की प्राथमिकता कैंटीन के ऊपर गिरे मलबे को जल्द से जल्द हटाने की रही। अधिकारियों ने बताया कि कैंटीन वाले हिस्से का मलबा पूरी तरह साफ कर दिया गया है और रविवार शाम के बाद से वहां से कोई व्यक्ति नहीं मिला है।

    फिलहाल करीब 250 वर्ग गज क्षेत्र में मलबा फैला हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक राहत कार्य में कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। घटना स्थल पर काफी कम जगह है और हादसे के बाद बगल की एक इमारत झुक गई है। गिरने की आशंका को देखते हुए उसे जैक लगाकर सहारा दिया गया है।

    साथ ही अतिरिक्त गार्डर भी मंगवाए गए हैं, ताकि बचाव अभियान के दौरान आसपास की संरचना सुरक्षित रहे और किसी नए हादसे की आशंका न हो। जगह कम होने के चलते एक साथ कई क्रेन काम नहीं कर पा रही है। जैसे जैसे मलबा हटाया जा रहा है और जगह बन रही है, उससे बचाव कार्य में तेजी आ रही है।

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    कई लोग अब भी लापता, मोबाइल की मिल रहे लोकेशन

    पांच मंजिला जो इमारत ढही है, उसमें कई कार्यालय संचालित होते थे। शनिवार और रविवार को अधिकांश कार्यालय बंद रहते हैं, पर कुछ दफ्तरों में कर्मचारियों और अन्य लोगों का आना-जाना बना रहता है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि हादसे के समय भी इमारत में कई लोग मौजूद थे। इस वजह से आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोग दबे हो सकते हैं।

    फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन अध्यक्ष डा. जसवंत सिंह यादव ने बताया कि कई लोग अभी भी लापता हैं, जिनके मोबाइल की लोकेशन घटनास्थल की ही दिखाई दे रही है। ऐसे में वह मलबे के नीचे हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि बचाव कार्य के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मलबा नीचे की ओर न धंसे, ताकि यदि कहीं कोई जीवित व्यक्ति फंसा हो तो उसकी सुरक्षा बनी रहे।

    हादसे के बाद बदल गई इलाके की तस्वीर

    पिछले कुछ वर्षों में यूपीएससी, एसएससी, एफएमजीई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए सैदुलाजाब गांव एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। साकेत मेट्रो स्टेशन के नजदीक होने और अपेक्षाकृत कम किराये पर कमरे, पीजी और फ्लैट उपलब्ध होने से बड़ी संख्या में छात्र यहां रहते हैं।

    इलाके में कई लाइब्रेरी, को-वर्किंग स्पेस, इंटरनेट कैफे और छोटे रेस्तरां मौजूद हैं, जो छात्रों की जरूरतों को पूरा करते हैं। शनिवार शाम हुए हादसे के बाद यहां की तस्वीर बदल गई है। जहां पहले चहल-पहल दिखाई देती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद लोगों में डर और चिंता का माहौल है।