सुरों के जादूगर थे अमेदियस मोजार्ट, मात्र 3 साल की उम्र में पूरी संगीत की दुनिया को हैरान कर दिया
वुल्फगैंग अमेदियस मोजार्ट, जिन्हें महान शास्त्रीय संगीतकार और बाल प्रतिभा माना जाता है, का जन्म 27 जनवरी 1756 को ऑस्ट्रिया में हुआ था। उन्होंने 3 साल ...और पढ़ें
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कौन थे वुल्फगैंग अमेदियस मोजार्ट? (Picture Courtesy: Instagram)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शास्त्रीय संगीत की दुनिया में जब भी मधुरता, संतुलन और गहरी भावनाओं की बात होती है, तो एक नाम सबसे ऊपर आता है- वुल्फगैंग अमेदियस मोजार्ट। उन्हें दुनिया का महान शास्त्रीय संगीतकार और बाल प्रतिभा माना जाता है।
मोजार्ट का मानना था कि संगीत प्रयोग और चिंतन का विषय है, और इसी सोच ने उन्हें अमर बना दिया। आइए उनके जन्मदिवस पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।
बचपन से ही असाधारण प्रतिभा का परिचय
मोजार्ट का जन्म 27 जनवरी 1756 को ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग में हुआ था। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस उम्र में बच्चे ठीक से बोलना सीखते हैं, उस 3 वर्ष की आयु में मोजार्ट हार्पसिकोर्ड बजाने में निपुण हो गए थे।
मात्र 5 वर्ष की उम्र तक आते-आते वे की-बोर्ड और वायलिन बजाने के साथ-साथ खुद की संगीत रचनाएं भी करने लगे थे। उनकी याददाश्त इतनी तेज थी कि वे बिना किसी गलती के लंबे म्यूजिक पीस याद रख लेते थे। इसी छोटी-सी उम्र में उन्होंने यूरोप के राजघरानों के सामने अपनी शानदार प्रस्तुति देकर सबको दंग कर दिया था।

(Picture Courtesy: Instagram)
पिता की शिक्षा और यूरोप की यात्राएं
मोजार्ट के शुरुआती और एकमात्र शिक्षक उनके पिता लियोपोल्ड मोजार्ट थे, जो खुद एक मशहूर वायलिन वादक थे। लियोपोल्ड ने न केवल उन्हें संगीत सिखाया, बल्कि अन्य भाषाएं और शैक्षणिक विषयों का ज्ञान भी दिया। मोजार्ट को नई चीजें सीखने का काफी शौक था।
अपने पिता के साथ यूरोप और इटली की यात्राओं के दौरान उनकी मुलाकात कई महान संगीतकारों से हुई। लंदन में उनकी मुलाकात योहान क्रिस्तियान बाख से हुई, जिनका मोजार्ट के संगीत पर गहरा असर पड़ा। 17 वर्ष की उम्र में उनकी नियुक्ति साल्जबर्ग के दरबार में हुई, लेकिन बेहतर अवसरों की तलाश में उन्होंने निरंतर यात्राएं जारी रखीं।
600 से अधिक रचनाएं और बीथोवन पर प्रभाव
मोजार्ट ने अपने छोटे से जीवनकाल में 600 से ज्यादा संगीत रचनाएं कीं। उनके संगीत का दायरा बहुत व्यापक था, जिसमें शामिल हैं-
- सिम्फनी- सिम्फनी नं. 40 और 41 (जुपिटर)।
- ओपेरा- द मैजिक फ्लूट और द मैरिज ऑफ फिगारो।
- पियानो रचनाएं- टर्किश मार्च (पियानो सोनाटा नं. 11)।
- धार्मिक संगीत- रेक्वेइम मास इन डी माइनर।
उनकी रचनाएं इतनी प्रभावशाली थीं कि महान संगीतकार बीथोवन भी उनसे प्रेरित थे और मोजार्ट को अपना आइडल मानते थे।
संघर्षपूर्ण जीवन और दुखद अंत
हैरानी की बात यह है कि इतनी अपार प्रतिभा के बावजूद मोजार्ट का व्यक्तिगत जीवन काफी मुश्किल रहा। उन्हें कभी स्थायी नौकरी या सम्मान नहीं मिला। वे अक्सर कर्ज और मानसिक तनाव से जूझते रहे। 5 दिसंबर 1791 को मात्र 35 वर्ष की आयु में इस महान संगीतकार ने अंतिम सांस ली।
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