दो पन्नों का वो अखबार, जिसने हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की नींव; 246 साल पहले हुआ था शुरू
भारत में पत्रकारिता की शुरुआत 29 जनवरी 1780 को जेम्स ऑगस्टस हिक्की की 'हिक्की गजट' (बंगाल गजट) से हुई। यह देश का पहला साप्ताहिक अखबार था, जिसने ब्रिटि ...और पढ़ें

किसने शुरू किया था भारत का पहला अखबार? (Picture Courtesy: Instagram)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में हमारे पास सूचनाओं के हजारों माध्यम हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में खबरों का यह सिलसिला शुरू कैसे हुआ? इस सफर की शुरुआत आज से करीब 246 साल पहले हुई थी, जब एक साहसी पत्रकार ने सत्ता की परवाह किए बिना देश का पहला अखबार दुनिया के सामने रखा।
29 जनवरी 1780- एक ऐतिहासिक शुरुआत
भारत में औपचारिक पत्रकारिता के युग का आगाज 29 जनवरी 1780 को हुआ। जेम्स ऑगस्टस हिक्की नाम के एक व्यक्ति ने कलकत्ता से देश के पहले समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया। यह एक साप्ताहिक अखबार था, जिसे 'हिक्की गजट', 'बंगाल गजट' या 'कलकत्ता जनरल एडवर्टाइजर' जैसे अलग-अलग नामों से जाना गया।
यह वह दौर था जब सूचनाओं पर केवल सत्ता का एकाधिकार हुआ करता था। ऐसे मुश्किल समय में हिक्की ने दो पन्नों का अखबार निकालकर संचार की दुनिया में क्रांति ला दी।

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निष्पक्षता और साहस का प्रतीक
हिक्की ने इस अखबार को केवल सूचना का साधन नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र मंच के रूप में स्थापित किया। उनके अखबार की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों की आलोचना करने से भी पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने प्रशासन की खामियों को जनता के सामने रखा और समाज व सरकार के बीच एक मजबूत सेतु का काम किया। उनकी इसी निडर पत्रकारिता ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की नींव रखी।

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संघर्ष और पाबंदी का दौर
ईस्ट इंडिया कंपनी को हिक्की की यह निष्पक्षता और आलोचनात्मक रवैया बिल्कुल पसंद नहीं आया। इसके कारण हिक्की को कंपनी के गुस्से का सामना करना पड़ा। उन पर भारी जुर्माने लगाए गए और उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ी।
सरकारी दबाव और दमनकारी नीतियों के कारण यह अखबार केवल दो साल ही चल सका। आखिरकार, 1782 में हिक्की की प्रिंटिंग प्रेस को जब्त कर लिया गया और इस ऐतिहासिक अखबार का प्रकाशन हमेशा के लिए बंद हो गया।

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विरासत जो आज भी सुरक्षित है
भले ही यह अखबार महज दो साल तक ही अस्तित्व में रहा, लेकिन इसने भारतीय इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी। आज भी इस अखबार की मूल प्रतियां लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी और भारत के कुछ चुनिंदा आर्काइव्स में सुरक्षित रखी गई हैं।
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