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    एक गलती ने बदल दी दुनिया के पहले सुपरहीरो ‘द फैंटम’ की पहचान, भारत में वेताल बनकर जीता सबका दिल

    Updated: Tue, 17 Feb 2026 12:36 PM (IST)

    सुपरमैन और बैटमैन से भी पहले, दुनिया का पहला कॉमिक सुपरहीरो 'द फैंटम' था, जिसे ली फॉक ने 24 साल की उम्र में बनाया था। उसका प्रसिद्ध बैंगनी रंग का कॉस् ...और पढ़ें

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    सुपरमैन-बैटमैन से पहले 'द फैंटम' था बच्चों का पसंदीदा सुपरहीरो (Picture Courtesy: Instagram)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे पहला कॉमिक सुपरहीरो कौन था? वह सुपरमैन या बैटमैन नहीं, बल्कि 'द फैंटम' था। एक समय था बच्चों के बीच द फैंटम के लिए गजब का क्रेज देखने को मिलता था। क्या आप इससे जुड़ी एक दिलचस्प बात जानते हैं कि जिस बैंगनी रंग की पोशाक के लिए वह आज दुनिया भर में मशहूर है, वह असल में लेखक की पसंद नहीं बल्कि एक प्रिंटिंग की गलती का नतीजा थी? 

    जी हां, द फैंटम की कॉस्ट्यूम के लिए लेखक की पसंद कुछ और थी, लेकिन एक गलती के कारण दुनियाभर में फैंटम अपने पर्पल कॉस्ट्यूम के लिए जाना जाने लगा। आइए जानते हैं चलता-फिरता भूत कहे जाने वाले इस किरदार से जुड़ी और भी कुछ दिलचस्प बातें।

    The Phantom (4)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    24 साल के युवा का कमाल

    द फैंटम की रचना अमेरिका के मिसौरी में जन्मे ली फॉक ने की थी। विज्ञापन की दुनिया में काम करने के बाद, उन्होंने मात्र 24 साल की उम्र में इस ऐतिहासिक किरदार को गढ़ा। 17 फरवरी 1936 को पहली बार द फैंटम का प्रकाशन हुआ। ली फॉक ने इस किरदार को बनाने के लिए किंग आर्थर, टार्जन और जंगल बुक जैसी कहानियों से प्रेरणा ली थी। वहीं, उनकी पहली कहानी ‘द सिंह ब्रदरहुड’ भारत के समुद्री लुटेरों की काल्पनिक कहानियों पर आधारित मानी जाती है।

    रॉबिन हुड से प्रेरित कॉस्ट्यूम

    फैंटम का लुक अपने समय के अन्य किरदारों से बहुत अलग था। उसकी स्किन-फिट ड्रेस रॉबिन हुड से प्रेरित थी, जिसने बाद के कई सुपरहीरो किरदारों के पहनावे को प्रभावित किया। वहीं, उसकी आंखों पर लगा बिना पुतलियों वाला मास्क ग्रीक मूर्तियों से प्रेरणा लेकर बनाया गया था।

    The Phantom (1)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    ग्रे से पर्पल बनने का दिलचस्प किस्सा

    शुरुआत में फैंटम की कॉमिक स्ट्रिप्स ब्लैक एंड व्हाइट में छपती थीं। लेखक ली फॉक ने हमेशा से यह सोचा था कि फैंटम की ड्रेस का रंग ग्रे होगा और शुरुआती कहानियों में इसे वैसा ही बताया भी गया, लेकिन बदलाव तब आया जब 1939 में संडे स्ट्रिप्स का रंगीन संस्करण शुरू हुआ। एक कलरिस्ट ने गलती से फैंटम की ड्रेस में पर्पल रंग भर दिया, लेकिन बच्चों को यह रंग इतना पसंद आया कि यह फैंटम की स्थायी पहचान बन गया। हालांकि, अलग-अलग देशों में यह अलग रंगों में भी दिखा; जैसे इटली और ब्राजील में लाल, स्कैंडिनेविया में नीला और न्यूजीलैंड में इसे भूरे रंग में छापा गया।

    The Phantom (2)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    भारत में 'वेताल' बनकर मचाई धूम

    भारत में द फैंटम की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां इसे वेताल के नाम से घर-घर में पहचाना गया। 1964 में अनंत पाई के नेतृत्व में इंद्रजाल कॉमिक्स ने इसे भारत में लॉन्च किया। हिंदी, बंगाली और तमिल जैसी भाषाओं में प्रकाशित होने के कारण भारतीय पाठकों को बंगाला के जंगलों और रहस्यमयी गुफाओं की कहानियों से गहरा जुड़ाव महसूस हुआ।

    The Phantom (5)

    (Picture Courtesy: Instagram)

    1980 के दशक में वेताल की लोकप्रियता अपने चरम पर थी। कॉमिक्स की दुकानों पर नए अंकों के लिए बच्चों की लंबी कतारें लगती थीं। 1960 के दशक तक यह कॉमिक स्ट्रिप दुनिया भर के 583 अखबारों में छपकर एक मिसाल कायम कर चुकी थी।

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