नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले ईथर से आया था एनेस्थीसिया बनाने का विचार, बहुत दिलचस्प है कहानी
एक पार्टी के दौरान सर्जरी को दर्दमुक्त बनाने के लिए ईथर के इस्तेमाल का खयाल आया था, जिसने एनेस्थीसिया के खोज की नींव रखी। ...और पढ़ें

ईथर पार्टी से आया था एनेस्थीसिया बनाने का विचार (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में जब हम किसी ऑपरेशन की बात सुनते हैं, तो मन में सबसे पहला ख्याल एनेस्थीसिया का आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सर्जरी को दर्दमुक्त बनाने का यह क्रांतिकारी विचार आया कहां से?
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में 30 मार्च 1842 का दिन एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने मरीजों को असहनीय पीड़ा से मुक्ति दिलाई। आइए जानें यह क्रांतिकारी ख्याल आया कैसे और किसने यह महान आविष्कार किया।
एक पार्टी से आया इस आविष्कार का खयाल
एनेस्थीसिया की खोज की कहानी बड़ी दिलचस्प है। 19वीं सदी में ईथर का इस्तेमाल इलाज के लिए नहीं, बल्कि मनोरंजन के लिए किया जाता था। उस समय होने वाली पार्टियों में लोग ईथर का नशा करते थे, जिसे ईथर फ्रॉलिक्स कहा जाता था।
अमेरिकी सर्जन क्रॉफर्ड लॉन्ग ने इन पार्टियों के दौरान एक अनोखी बात गौर की। उन्होंने देखा कि ईथर के प्रभाव में आने के बाद जब लोगों को चोट लगती थी, तो उन्हें दर्द का अहसास बहुत कम होता था। इसी छोटे से ऑब्जर्वेशन ने चिकित्सा जगत का भविष्य बदल दिया।
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(Picture Courtesy: UMHS)
इतिहास का पहला सफल दर्दमुक्त ऑपरेशन
जॉर्जिया के जेफरसन शहर में रहने वाले डॉ. क्रॉफर्ड लॉन्ग ने अपने इस अनुभव को चिकित्सा में आजमाने का फैसला किया। 30 मार्च 1842 को उनके पास जेम्स वेनेबल नाम का एक मरीज आया, जिसकी गर्दन में ट्यूमर था। उस दौर में सर्जरी किसी बुरे सपने जैसी थी, क्योंकि बिना बेहोश किए चीरा लगाना बेहद दर्दनाक होता था।
डॉ. लॉन्ग ने जेम्स को ईथर सुंघाकर बेहोश किया और सफलतापूर्वक ट्यूमर निकाल दिया। जब मरीज होश में आया, तो उसने बताया कि उसे पूरी प्रक्रिया के दौरान जरा भी दर्द महसूस नहीं हुआ। यह प्रयोग सफल रहा और इसने साबित कर दिया कि बेहोशी की मदद से सुरक्षित सर्जरी करना मुमकिन है।
चुनौतियां और पहचान का सफर
डॉ. लॉन्ग ने अपनी इस सफलता को तुरंत दुनिया के सामने सार्वजनिक नहीं किया। इसके कुछ सालों बाद, 1846 में एक डेंटिस्ट विलियम टी. जी. मॉर्टन ने बोस्टन में ईथर एनेस्थीसिया का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। इसके बाद ही इस तकनीक को पूरी दुनिया में स्वीकृति मिली।
भले ही डॉ. लॉन्ग ने अपने प्रयोग को सार्वजनिक करने में देरी की, लेकिन बाद में उनके इस महान आविष्कार को एनेस्थीसिया की शुरुआत के रूप में मान्यता दी गई।
बदल गया सर्जरी का स्वरूप
इस खोज से पहले सर्जरी इतनी खतरनाक और दर्दनाक मानी जाती थी कि मरीज अक्सर ऑपरेशन करवाने से डरते थे। एनेस्थीसिया की शुरुआत के बाद ऑपरेशन की प्रक्रिया मेडिकल प्रोसीजर का एक नियमित हिस्सा बन गई। आज सर्जरी जितनी सुरक्षित और आसान है, उसकी नींव 1842 के उसी ईथर के प्रयोग ने रखी थी।
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