छत के वजन से 8 मिमी धंस गई थी इमारत! पढ़ें लंदन की शान 'रॉयल अल्बर्ट हॉल' से जुड़े हैरान करने वाली बातें
लंदन में स्थित रॉयल अल्बर्ट हॉल का निर्माण एग्जीबिशन से इकट्ठा हुए पैसों से 1867 में शुरू हुआ था। ...और पढ़ें
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दिलचस्प है रॉयल अल्बर्ट हॉस का इतिहास (Picture Courtesy: Instagram)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। लंदन के बीचों-बीच स्थित रॉयल अल्बर्ट हॉल ऐक ऐसी इमारत है, जो इतिहास, कला और साहस की एक अनोखी मिसाल है। क्या आप जानते हैं कि दुनिया के इस सबसे प्रतिष्ठित परफॉर्मेंस वेन्यू का निर्माण एक एग्जीबिशन से इकट्ठा हुए पैसों से हुआ था?
जी हां, यह बिल्कुल सच है। आइए इस ऐतिहासिक स्मारक से जुड़ी ऐसी ही कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं, जिन्हें सुनकर आप हैरान हो जाएंगे।
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(Picture Courtesy: Facebook)
एक राजकुमार का अधूरा सपना
इस भव्य हॉल की नींव के पीछे क्वीन विक्टोरिया के पति प्रिंस अल्बर्ट का एक बड़ा सपना था। वे एक ऐसी जगह चाहते थे जहां कला, विज्ञान और उद्योग को एक साझा मंच मिल सके। साल 1851 में हुई ग्रेट एग्जीबिशन से जो पैसा इकट्ठा हुआ, उससे साउथ केंसिंग्टन इलाके को विकसित करने की योजना बनी, जिसके सेंटर में यह हॉल होना था।
हालांकि, 1861 में प्रिंस अल्बर्ट के आकस्मिक निधन ने इस सपने को अधर में छोड़ दिया। बाद में उनके सहयोगी हेनरी कोल ने इस मिशन को आगे बढ़ाया। 1867 में निर्माण शुरू हुआ और 29 मार्च 1871 को इसका उद्घाटन हुआ। प्रिंस अल्बर्ट की याद में ही इसका नाम रॉयल अल्बर्ट हॉल रखा गया।
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(Picture Courtesy: Facebook)
युद्ध में निभाई अहम भूमिका
विश्व युद्धों के दौरान इस हॉल ने मनोरंजन के साथ-साथ सेना की जरूरतों में भी अहम भूमिका निभाई। इसकी विशाल छत लंदन के आसमान में उड़ने वाले पायलट्स के लिए नेविगेशन पॉइंट का काम करती थी। प्रथम विश्व युद्ध (1914) में दुश्मन की नजरों से बचने के लिए इसकी कांच की छत को काले कपड़े से ढका गया था।
वहीं, द्वितीय विश्व युद्ध (1940) के दौरान बम धमाकों ने इसकी छत को काफी नुकसान पहुंचाया। इन हमलों से बचने के लिए इसके कांच के गुंबद पर काला पेंट और खास वार्निश भी लगाया गया था।
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(Picture Courtesy: Facebook)
मैनचेस्टर से लंदन का सफर
इस हॉल की वास्तुकला हैरान कर देने वाली है। इसे बनाने में 60 लाख लाल ईंटें और 80,000 टेराकोटा ब्लॉक्स लगे हैं। लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी 279 टन वजनी कांच और लोहे की छत है। दिलचस्प बात यह है कि यह छत लंदन में नहीं, बल्कि 300 किमी दूर मैनचेस्टर में बनी थी। वहां इसकी टेस्टिंग करने के बाद इसे डिसमेंटल करके घोड़ों और ट्रेनों के जरिए लंदन लाया गया। जब 1869 में छत को सेट किया गया, तो उसके वजन से इमारत 8 मिमी तक धंस गई थी, लेकिन ढांचा पूरी तरह सुरक्षित रहा।
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(Picture Courtesy: Instagram)
समय के साथ आए आधुनिक बदलाव
रॉयल अल्बर्ट हॉल समय के साथ और भी बेहतर होता गया-
- मशरूम्स का जादू- 1960 के दशक में हॉल की आवाज को बेहतर बनाने के लिए 'मशरूम्स' नाम के साउंड डिफ्यूजर लगाए गए।
- रिकॉर्ड तोड़ लोकप्रियता- 1977 में जब मशहूर ग्रुप एबीबीए यहां आया, तो टिकटों के लिए करीब 35 लाख आवेदन आए थे।
- ऐतिहासिक आयोजन- 1901 में दुनिया की पहली बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता इसी हॉल में आयोजित की गई थी।
- नया विस्तार- हाल के वर्षों (2017-2023) में रिनोवेशन के दौरान हॉल के नीचे एक पांच मंजिला बेसमेंट भी तैयार किया गया है। आज इस हॉल में 5,000 से ज्यादा लोग बैठ सकते हैं।
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