सरकारी अफसरों की कुर्सी पर क्यों बिछा होता है सफेद तौलिया? ब्रिटिश काल से जुड़ा है इसका इतिहास
सरकारी अफसरों की कुर्सी पर सफेद तौलिया बिछाने की परंपरा ब्रिटिश काल से जुड़ी हुई है। ...और पढ़ें

सफेद तौलिया कैसे बना रुतबे का प्रतीक? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप किसी सरकारी दफ्तर में गए होंगे, तो देखा होगा कि बड़े अधिकारी की कुर्सी पर सफेद रंग का तौलिया बिछा होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि आधुनिक ऑफिस और आरामदायक कुर्सियों के बावजूद अफसरों की कुर्सी पर सफेद तौलिया क्यों रखा होता है?
आपको बता दें यह केवल एक कपड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे सदियों पुराना इतिहास छिपा है, जो ब्रिटिश काल से जुड़ा है। आइए जानें इस बारे में।
अंग्रेजी शासन की विरासत
दरअसल, कुर्सियों पर सफेद तौलिया बिछाने का रिवाज ब्रिटिश काल की देन है। उस दौर में आज की तरह पक्की सड़कें और गाड़ियां नहीं हुआ करती थीं। अंग्रेज अधिकारी अक्सर घोड़ों पर बैठकर लंबी दूरियां तय करते थे। धूल और पसीने से बचने के लिए तौलिया उनकी हाइजीन का एक अहम हिस्सा बन गया था और धीरे-धीरे यह उनकी पहचान और वर्दी का हिस्सा भी बन गया।

(AI Generated Image)
गर्मी और पसीना है बड़ा कारण
पुराने समय में दफ्तरों में एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं नहीं होती थीं। 80 के दशक तक दफ्तरों में केवल पंखे होते थे, जो गर्मी के मौसम में गर्म हवा फेंकते थे। ऐसे में पसीने को सोखने के लिए सफेद तौलिया एक साइलेंट वॉरियर की तरह काम करता था। यह न केवल अधिकारी के कपड़ों को खराब होने से बचाता था, बल्कि सफर के दौरान एम्बेसडर कारों और जीपों में भी राहत का जरिया बनता था। 90 के दशक के मध्य तक यह तौलिया अधिकारियों की जीवनशैली का एक अटूट हिस्सा बना रहा।
आधुनिक दौर और बदलती सोच
आज के समय में लगभग सभी सरकारी कार्यालय एयर कंडीशनिंग से लैस हैं। ऐसे में अब पसीने वाली समस्या लगभग खत्म हो चुकी है। लेकिन आज के दौर में भी यह परंपरा जारी है और सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों की कुर्सी पर आपको सफेद रंग का तौलिया बिछा मिल जाएगा। ऐसा कह सकते हैं कि आज के समय में इसे अधिकारी के रुतबे से जोड़कर देखा जाता है।
अधिकार और पद का प्रतीक
सरकारी सिस्टम में केवल तौलिया ही नहीं, बल्कि कई अन्य चीजें भी पद और प्रतिष्ठा से जुड़ी हैं। जिस तरह सीनियर अधिकारियों के लिए हरी स्याही का इस्तेमाल तय है, उसी तरह कुर्सी पर बिछा तौलिया, मेज का आकार और दरवाजे पर खड़े चपरासी को पद से जोड़कर देखा जाता है। यह ब्यूरोक्रेसी कल्चर का हिस्सा है, जहां नियमों और प्रतीकों को बहुत महत्व दिया जाता है।
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