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    जब इंसान की रगों में दौड़ा भेड़ का खून! जानिए दुनिया के सबसे पहले 'ब्लड ट्रांसफ्यूजन' की कहानी

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 03:16 PM (IST)

    फ्रांस के चिकित्सक जीन-बैप्टिस्ट डेनिस ने 1667 में एक बुखार से पीड़ित लड़के को भेड़ का खून चढ़ाकर दुनिया का पहला सफल ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया था। ...और पढ़ें

    भयानक था दुनिया का पहला ब्लड ट्रांसफ्यूजन (Image Source: X)

    भयानक था दुनिया का पहला ब्लड ट्रांसफ्यूजन (Image Source: X) 

    HighLights

    1. 1667 में जीन-बैप्टिस्ट डेनिस ने किया पहला ब्लड ट्रांसफ्यूजन

    2. बुखार से पीड़ित लड़के को चढ़ाया गया भेड़ का खून

    3. कार्ल लैंडस्टेनर ने 1900 में ब्लड ग्रुप सिस्टम खोजा

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मेडिकल साइंस आज बहुत आगे निकल चुका है और किसी मरीज को खून चढ़ाना आज एक आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे पहला ब्लड ट्रांसफ्यूजन कैसे हुआ था? इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है।

    आपको यह जानकर हैरानी होगी कि पहली बार किसी इंसान को इंसान का नहीं, बल्कि एक भेड़ का खून चढ़ाया गया था। आइए जानते हैं इस साहसिक और ऐतिहासिक घटना के बारे में। 

    बुखार से तड़पते 15 वर्षीय लड़के पर प्रयोग

    दुनिया में सबसे पहले दर्ज किए गए सफल ब्लड ट्रांसफ्यूजन का इतिहास फ्रांस के एक चिकित्सक जीन-बैप्टिस्ट डेनिस से जुड़ा है। बात 15 जून 1667 की है। उस समय एक 15 साल का लड़का तेज बुखार से बुरी तरह ग्रसित था।

    उस लड़के की जान बचाने के लिए डॉक्टर डेनिस ने एक बेहद जोखिम भरा कदम उठाया और उसके शरीर में एक भेड़ का खून चढ़ा दिया। उस दौर में रक्ताधान को लेकर वैज्ञानिकों के पास ना के बराबर जानकारी थी, इसलिए इसे एक बहुत ही साहसिक और खतरनाक प्रयोग माना गया था।

    भेड़ का खून चढ़ने से बची लड़के की जान

    इस खतरनाक प्रयोग का नतीजा बेहद चौंकाने वाला रहा। भेड़ का खून चढ़ने के बाद वह लड़का न सिर्फ जिंदा बच गया, बल्कि उसकी सेहत में भी काफी सुधार देखने को मिला।

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    इस पहली कामयाबी से उत्साहित होकर डॉक्टर डेनिस ने कुछ अन्य मरीजों पर भी यही तरीका आजमाया, लेकिन हर बार किस्मत मेहरबान नहीं रही। आगे चलकर प्रयोग के नतीजे अच्छे नहीं आए और कुछ मरीजों की जान चली गई।

    डॉक्टर पर चला हत्या का मुकदमा

    मरीजों की मौत के बाद मामला बिगड़ गया। एक मरीज की मौत हो जाने पर डॉक्टर डेनिस पर बाकायदा हत्या का मुकदमा तक चलाया गया। हालांकि, अदालत ने सुनवाई के बाद उन्हें हत्या के आरोपों से दोषमुक्त करार दे दिया।

    रखी सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की नींव

    इस घटना के बाद एक लंबा ठहराव आ गया। करीब 200 सालों तक इस पर काम रुका रहा, जिसके बाद वैज्ञानिकों ने एक इंसान से दूसरे इंसान में खून चढ़ाने को लेकर दोबारा शोध शुरू किया।

    आखिरकार साल 1900 में इस क्षेत्र में सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी। ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टेनर ने 'ब्लड ग्रुप सिस्टम' की खोज कर ली। उनकी इसी अहम खोज ने आगे चलकर सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की मजबूत नींव रखी और आधुनिक रक्ताधान विज्ञान के विकास का रास्ता पूरी तरह से खोल दिया।

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