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    98 साल पहले खुला था भारत का पहला पेट्रोल पंप, मशीन से नहीं, हाथ से भरा जाता था गाड़ियों में ईंधन

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 01:34 PM (IST)

    भारत का पहला पेट्रोल पंप 1928 में बर्मा शेल ने खोला था, जो देश का पहला सार्वजनिक फ्यूल स्टेशन था। ...और पढ़ें

    भारत के पहले पेट्रोल स्टेशन की दिलचस्प कहानी (Picture Courtesy: Freepik)

    भारत के पहले पेट्रोल स्टेशन की दिलचस्प कहानी (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज सड़क पर निकलो, तो हर कुछ किलोमीटर के बाद पेट्रोल पंप नजर आ जाते हैं, जो डिजिटली काम करते हैं। इनके कारण ट्रांसपोर्ट की सुविधा काफी बेहतर हो गई है, लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में सबसे पहली बार पेट्रोल पंप कहां खुला था और कैसे काम करता था? दरअसल, इसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है। आइए जानें कि देश का पहला पेट्रोल पंप खुलने की कहानी।

    देश का पहला पेट्रोल पंप

    भारत में पहला पेट्रोल पंप 98 साल पहले 1928 में मुंबई यानी तब के बॉम्बे में खुला था। यह देश का पहला सार्वजनिक फ्यूल स्टेशन था और इसकी शुरुआत का श्रेय बर्मा शेल कंपनी को जाता है। नेशनलाइजेशन के बाद यह कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का हिस्सा बनी।

     उस जमाने में सड़कों पर आज की तरह गाड़ियों की कतार देखने को नहीं मिलती थीं, क्योंकि उस समय गाड़ी खरीदना सबके बस की बात नहीं थी। ऐसे में पहला पेट्रोल पंप खुलना एक ऐताहिसक कदम था। 

    ड्रम और टिन के डिब्बों से मिलता था ईंधन

    पेट्रोल पंप खुलने से पहले ईंधन बड़े-बडे़ ड्रमों और टिन के डिब्बों में बेचा जाता था। फिर जब पहला पेट्रोल पंप खुला, तो लोगों की ये मुश्किल हल हुई और लोग ही जगह पर आसानी से अपनी गाड़ी के लिए पेट्रोल खरीद पाते थे।  

    हाथ से चलते थे शुरुआती पंप

    आज पेट्रोल पंप पर जाओ, तो गाड़ी के फ्यूल टैंक में नोजल डालते हैं और जितना पेट्रोल चाहिए उतना डलवा लेते हैं, लेकिन पहले ऐसा नहीं होता था। उस समय पेट्रोल पंप पर ऐसी आधुनिक मशीनें नहीं थीं। उस समय पेट्रोल पंप पर कर्मचारी हाथ से चलने वाले डिस्पेंसर का इस्तेमाल करते थे और पेट्रोल की मात्रा नापने के लिए मकैनिकल मीटर्स का इस्तेमाल किया जाता था। 

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    ग्राहकों का भरोसा जीतना था बड़ी चुनौती

    आज की तरह उस समय स्क्रीन पर तुरंत पेट्रोल की मात्रा और कीमत दिखाई नहीं देते थे। इसलिए पारदर्शिता बनाए रखना बड़ी चुनौती थी। इस चुनौती से निपटने के लिए बर्मा शेल ने बाद में ऐसे उपकरणों को अपनाना शुरू किया, जिसमें ग्राहक खुद अपनी आंखों से देख सकते थे कि उन्हें कितनी मात्रा में पेट्रोल मिल रहा है। इसी से आधुनिक पेट्रोल पंप की नींव पड़ी।