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    गोल्ड ETF क्या है, कैसे बना भारतीय निवेशकों की पहली पसंद? A TO Z जानकारी

    Updated: Fri, 30 Jan 2026 03:57 PM (IST)

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निवेशक गोल्ड ईटीएफ को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। 2025 में इसमें 2.9 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश हुआ, जिससे भारत शीर् ...और पढ़ें

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    भारतीय निवेशक गोल्ड ईटीएफ को सुरक्षित ठिकाना मानते हैं।

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निवेशक सोने को अपनी संपत्ति का सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं।

    गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश ने 2025 में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। आइए जानते हैं कि कैसे गोल्ड ईटीएफ भारतीय बाजार में लोकप्रियता हासिल कर रहा है और इसके पीछे क्या कारण हैं।

    GOLD

    गोल्ड ईटीएफ क्या है?

    गोल्ड ईटीएफ एक ऐसा निवेश आप्शन है जो स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होता है. इसके जरिए निवेशकों को भौतिक सोने की खरीदारी किए बिना सोने की कीमतों पर लाभ कमाने का मौका मिलता है।

    यह फंड सोने की कीमतों को ट्रैक करता है और निवेशकों के लिए आसान, पारदर्शी और कम लागत वाला तरीका देता है।

    पारंपरिक सोने की खरीदारी से अलग, ईटीएफ में कोई स्टोरेज या सुरक्षा की टेंशन नहीं होती, जिससे यह आधुनिक निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है

    GOLD ETF

    2025 में रिकॉर्ड-तोड़ निवेश

    वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारत में गोल्ड ईटीएफ में निवेश तेजी से बढ़ा है। 2025 के पहले 10 महीनों में लगभग 2.9 अरब डॉलर, यानी करीब 24 हजार करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जो अब तक का ऊंचा स्तर है।

    सितंबर 2025 में यह निवेश चार गुना बढ़कर 8,363 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो किसी एक महीने का रिकॉर्ड है। अक्टूबर में भी यह तेजी बनी रही।

    भारत गोल्ड ईटीएफ निवेश के मामले में शीर्ष देशों में शुमार हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस समय में यूके और जर्मनी जैसे विकसित देशों में निवेशकों ने निकासी की।

    CURRENCY

    गोल्ड ईटीएफ में निवेश जोखिम कम 

    बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध जैसे हालात और नीतिगत अनिश्चितताओं ने निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता को कम कर दिया है।

    शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका के बीच सोना महंगाई और बाजार गिरावट के खिलाफ सुरक्षा कवच के रूप में उभरा है। निवेशक अब गोल्ड ईटीएफ को अपने पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे हैं।

    इसके पीछे सेंट्रल बैंकों की बढ़ती सोना खरीदारी, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और डी-डॉलराइजेशन की वैश्विक प्रक्रिया को प्रमुख कारक माना जा रहा है।

    ये फैक्टर सोने को एक स्थिर संपत्ति के रूप में मजबूत कर रहे हैं, जिससे निवेशकों का विश्वास और बढ़ रहा है।