Trending

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    खुदाई में मिले बेशकीमती पत्थर से कैसे बनी बुद्ध की विश्व प्रसिद्ध प्रतिमा? बेहद रोमांचक है कहानी

    Updated: Fri, 08 May 2026 05:00 PM (IST)

    कनाडा में खुदाई के दौरान मिले 18 टन के 'पोलर प्राइड' नामक बेशकीमती जेड पत्थर से 'जेड बुद्ध फॉर यूनिवर्सल पीस' प्रतिमा बनाई गई। ...और पढ़ें

    preferred source google
    News Article Hero Image

    भगवान बुद्ध की अनोखी प्रतिमा: जानिए 18 टन वजनी 'पोलर प्राइड' की कहानी (Image Source: X) 

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। प्रकृति अक्सर हमें अपने छिपे हुए अनमोल उपहारों से चौंका देती है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जमीन की खुदाई में एक ऐसा बेशकीमती पत्थर मिले, जिसे बाद में भगवान बुद्ध की एक शानदार और विशाल मूर्ति में बदल दिया जाए?

    यह कोई कहानी नहीं, बल्कि सच है। इस अद्भुत प्रतिमा को आज पूरी दुनिया में 'जेड बुद्ध फॉर यूनिवर्सल पीस' के नाम से जाना जाता है।

    buddha statue

    (Image Source: X) 

    जमीन से निकला 'पोलर प्राइड'

    इस मूर्ति की कहानी साल 2000 में शुरू हुई थी, जब कनाडा के उत्तर-पश्चिम ब्रिटिश कोलंबिया इलाके में खुदाई का काम चल रहा था। इसी दौरान जमीन के अंदर से करीब 18 टन का एक बेहद भारी और उत्कृष्ट श्रेणी का पत्थर निकला। इस विशाल चट्टान को 'पोलर प्राइड' का नाम दिया गया। विशेषज्ञों ने जब इसकी जांच की, तो पाया कि इसका गहरा हरा रंग और इसमें मौजूद शुद्धता एकदम 'जेम क्वालिटी' है। इतनी बेहतरीन और विशाल जेड चट्टान का मिलना दुनिया के इतिहास में एक बेहद दुर्लभ घटना मानी जाती है।

    मठ ने तराशा शांति का प्रतीक

    इस नायाब खोज के बाद, एक बौद्ध मठ ने इस 18 टन की चट्टान का आधा हिस्सा खरीद लिया। मठ ने इसे बड़े ही जतन से तराश कर भगवान बुद्ध की एक सुंदर और शांतिदायी प्रतिमा का रूप दे दिया। आज यह मूर्ति ऑस्ट्रेलिया के 'सार्वभौमिक करुणा के महान स्तूप' में हमेशा के लिए स्थापित कर दी गई है। हालांकि, दुनिया भर के लोग इसकी झलक पा सकें, इसलिए इसे बीच-बीच में दूसरे देशों की प्रदर्शनियों में भी भेजा जाता है।

    क्या है 'नेफ्राइट जेड' पत्थर की खासियत?

    जिस पत्थर से यह खूबसूरत मूर्ति बनी है, उसे विज्ञान की भाषा में 'नेफ्राइट जेड' कहा जाता है। जेड पत्थर मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं, जिनमें से नेफ्राइट अपनी बेजोड़ मजबूती, चमकदार सतह और मनमोहक हरे रंग के लिए मशहूर है। यह इतनी आसानी से नहीं टूटता और बेहद टिकाऊ होता है। इसी खूबी के कारण प्राचीन काल से ही इसका इस्तेमाल गहने, मूर्तियां और पूजा-पाठ से जुड़ी चीजें बनाने में होता आया है।

    खबरें और भी

    कनाडा की खदानों का महत्व

    कनाडा का ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत इस तरह के खास पत्थरों का एक बहुत बड़ा और प्रमुख केंद्र है। यहां की खदानें बेहतरीन क्वालिटी वाले नेफ्राइट जेड के लिए पूरी दुनिया में पहचानी जाती हैं। यही वजह है कि कनाडा जेड पत्थरों के उत्पादन और इसे दूसरे देशों में भेजने के मामले में विश्व स्तर पर एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    यह भी पढ़ें- क्या सच में इस झील का पानी छूते ही पत्थर बन जाते हैं जीव? जानिए लेक नेट्रॉन की डरावनी सच्चाई

    यह भी पढ़ें- धरती को नापकर तय हुई थी एक मीटर की लंबाई, दिलचस्प है माप की इकाई बनने की कहानी