तलवार ही नहीं, इस अनोखी पिस्तौल के भी शौकीन थे नेपोलियन; पेरिस के म्यूजियम में आज भी है सुरक्षित
इतिहास के पन्नों में फ्रांस के मशहूर शासक नेपोलियन बोनापार्ट का नाम बहुत ही दिलचस्पी के साथ पढ़ा जाता है। ...और पढ़ें

सम्राट बनने से पहले नेपोलियन ने क्यों बनवाई थी यह खास पिस्तौल? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि नेपोलियन बोनापार्ट के पास एक बेहद खास और अनोखी पिस्तौल हुआ करती थी? जी हां, हम बात कर रहे हैं नेपोलियन की तीन बैरल वाली शानदार फ्लिंटलॉक पिस्तौल की। इसे साल 1802 में खासतौर पर उनके लिए तैयार किया गया था और आज यह एक बेहद अनमोल ऐतिहासिक धरोहर बन चुकी है।
बढ़ती ताकत का प्रतीक थी यह पिस्तौल
साल 1802 का समय नेपोलियन के लिए बदलाव का दौर था। यह वह समय था जब फ्रांस के 'प्रथम कॉउन्सल' के रूप में उनकी ताकत और प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ रहा था। वह सिर्फ एक क्रांतिकारी सैन्य नायक नहीं रहे थे, बल्कि एक मजबूत शासक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहे थे। उनके इसी रुतबे को ध्यान में रखते हुए इस शाही पिस्तौल का निर्माण किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि इस पिस्तौल के बनने के महज दो साल बाद, 1804 में नेपोलियन ने खुद को फ्रांस का सम्राट घोषित कर दिया था।
बेहतरीन कारीगरी और खास डिजाइन
इस अद्भुत पिस्तौल को बनाने का श्रेय उस समय के मशहूर फ्रांसीसी हथियार निर्माता 'निकोलस नोल' को जाता है। निकोलस अपने जमाने के सबसे बेहतरीन कारीगरों में गिने जाते थे। उनके बनाए हुए हथियार अपनी बारीक नक्काशी, सुंदर कलाकारी और एकदम सटीक यांत्रिकी के लिए जाने जाते थे। इस पिस्तौल की सबसे बड़ी खासियत इसका तीन नली वाला डिजाइन था। इसकी मदद से नेपोलियन बिना तुरंत रीलोड किए एक से ज्यादा फायर कर सकते थे। इसकी शानदार सजावट ने इसे एक विलासितापूर्ण वस्तु बना दिया था, जो नेपोलियन की शान और सत्ता के बिल्कुल अनुकूल थी।
आज कहां है यह ऐतिहासिक धरोहर?
नेपोलियन की गरिमा को दर्शाने वाली यह ऐतिहासिक पिस्तौल आज भी पूरी तरह सुरक्षित है। उनके कई हथियार दुनिया भर के विभिन्न संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रहे हैं। अगर विशेष रूप से नेपोलियन युग की दुर्लभ वस्तुओं की बात करें, तो फ्रांस की राजधानी पेरिस में स्थित 'मुसी डे ल 'आर्मी' म्यूजियम में इन्हें देखा जा सकता है। वहां रखी ये वस्तुएं आज भी फ्रांस के सैन्य कौशल और वहां की बेहतरीन शिल्पकला की याद दिलाती हैं।
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