बिना चीर-फाड़ शरीर के अंदर देखना कैसे हुआ मुमकिन? दुनिया को कब मिला पहला फुल-बॉडी CT स्कैनर
रॉबर्ट लेडली ने दुनिया को पहला फुल-बॉडी सीटी स्कैनर दिया, जिससे बिना सर्जरी बीमारियों का पता लगाना संभव हुआ। ...और पढ़ें

क्या आप जानते हैं? जिस CT स्कैन ने बचाई करोड़ों जानें, उसका आविष्कार एक डेंटिस्ट ने किया था (Image Source: Instagram)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कल्पना कीजिए कि डॉक्टर बिना कोई चीरा लगाए या ऑपरेशन किए आपके शरीर के अंदर की हर हड्डी को देख लें। आज 'सीटी स्कैन' हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था का एक आम हिस्सा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह करिश्माई तकनीक आखिर किसकी देन है?
बता दें, अमेरिका के महान वैज्ञानिक रॉबर्ट लेडली ही वह शख्स हैं, जिन्होंने दुनिया को पहला होल-बॉडी सीटी स्कैनर दिया। उन्हें आधुनिक डायग्नोस्टिक इमेजिंग और 'मेडिकल इन्फॉर्मेटिक्स' का जनक कहा जाता है। आइए, इस महान आविष्कारक की दिलचस्प कहानी पर एक नजर डालते हैं।

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दांतों के डॉक्टर से लेकर फिजिक्स के महारथी तक
28 जून 1926 को न्यूयॉर्क के फ्लशिंग में जन्मे रॉबर्ट लेडली की पढ़ाई-लिखाई किसी आम डॉक्टर जैसी नहीं थी। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय से फिजिक्स पढ़ी। इसके बाद उनका रुझान बदला और उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से डेंटिस्ट्री की डिग्री हासिल की। मगर विज्ञान से उनका प्रेम उन्हें वापस कोलंबिया विश्वविद्यालय ले गया, जहां उन्होंने सैद्धांतिक भौतिकी में मास्टर्स किया।
अपने करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने अमेरिकी सेना में एक डेंटिस्ट के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। कोरियाई युद्ध के समय आर्मी की 'डेंटल कोर' में रहते हुए उन्होंने नकली दांतों की डिजाइनिंग पर रिसर्च की। उनका सोचने का नज़रिया इतना अलग था कि वे दांतों की बनावट और खाना चबाने के तरीके को भी फिजिक्स और गणित के फॉर्मूलों से समझने की कोशिश करते थे।
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जब मशीनों ने सीखी बीमारियों की पहचान
1950 के दशक में जब कंप्यूटर बस आकार ही ले रहे थे, तब लेडली ने भविष्य देख लिया था। उन्हें यकीन था कि ये बड़ी मशीनें एक दिन मेडिकल फील्ड की पूरी तस्वीर बदल देंगी।
साल 1959 में उन्होंने 'रीजनिंग फाउंडेशन ऑफ मेडिकल डायग्नोसिस' नाम से एक ऐतिहासिक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया। इसी पब्लिकेशन से 'मेडिकल इन्फॉर्मेटिक्स' का जन्म हुआ। लेडली दुनिया के पहले इंसान थे जिन्होंने यह विचार सामने रखा कि कंप्यूटर, मरीजों की बीमारियों की सटीक पहचान करने में डॉक्टरों की मदद कर सकते हैं।

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कब बना दुनिया का पहला सीटी स्कैनर?
लेडली के जीवन की सबसे बड़ी कामयाबी साल 1973 में सामने आई। उन्होंने 'एसीटीए' (ACTA - ऑटोमेटिक कम्यूटराइज्ड ट्रांसवर्स एक्साइल) नाम से दुनिया का पहला फुल-बॉडी सीटी स्कैनर तैयार किया।
इस मशीन ने तहलका मचा दिया, क्योंकि अब शरीर के किसी भी हिस्से की क्रॉस-सेक्शनल तस्वीरें खींचना मुमकिन हो गया था। इस एक खोज से ब्रेन स्ट्रोक, अंदरूनी ब्लीडिंग, ट्यूमर, कैंसर और दिल की बीमारियों का बिना सर्जरी के पता लगाना आसान हो गया। आज की जो आधुनिक इमरजेंसी मेडिकल व्यवस्था है, वह लेडली की इसी तकनीक के दम पर इतनी मजबूत है।
एक ऐसी विरासत जो आज भी महफूज है
रॉबर्ट लेडली का यह आविष्कार इतना ऐतिहासिक है कि उनके द्वारा बनाया गया पहला सीटी स्कैनर आज भी अमेरिका के 'स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ अमेरिकन हिस्ट्री' में संभाल कर रखा गया है। इसके साथ ही, इस विषय को दुनिया भर में पहचान दिलाने के लिए उन्होंने 'पैटर्न रिकॉग्नेशन' और 'कम्प्यूटर्स इन बायोलॉजी एंड मेडिसिन' जैसी अहम पत्रिकाओं की शुरुआत भी की।
ढेरों रिसर्च और बेशुमार सम्मान
24 जुलाई 2012 को दुनिया से विदा लेने वाले इस महान वैज्ञानिक ने अपने जीवन में 300 से अधिक रिसर्च पेपर लिखे और 10 से ज्यादा पेटेंट अपने नाम किए। उनके इस शानदार योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया:
- 1990: उन्हें 'नेशनल इन्वेंटर्स हॉल ऑफ फेम' में शामिल किया गया।
- 1994: विज्ञान जगत के खास 'आईईईई मेडिकल इंजीनियरिंग अवार्ड' से नवाजा गया।
- 1997: उन्हें 'नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन' का सर्वोच्च सम्मान मिला।
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