बिना फेफड़ों के लेता है सांस, गर्दन कटने पर भी नहीं बहता खून; पढ़ें कॉकरोच से जुड़े कुछ अनसुने सच
कॉकरोच न सिर्फ डायनासोर को खत्म करने वाले महाविनाश से बच निकला, बल्कि इसने परमाणु बम के हमले को भी मात दी है। ...और पढ़ें

करोड़ों सालों से धरती पर राज कर रहे हैं कॉकरोच (Image Source: AI-Generated)
HighLights
डायनासोर से भी पुराना वजूद, 35 करोड़ साल के जीवाश्म
चार महाविनाशों और परमाणु हमलों को सफलतापूर्वक झेला
बिना सिर के हफ्तों तक जीवित, मादा बिना नर के प्रजनन
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम अपने घरों में कॉकरोच को देखकर या तो डर जाते हैं या फिर घिन महसूस करते हैं। दुनिया भर में इनकी 4500 से भी ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से केवल 30 ही हमारे घरों या इंसानों के बीच रहती हैं।
क्या आप जानते हैं कि यह छोटा-सा जीव कितना शक्तिशाली है? यह धरती के चार सबसे बड़े महाविनाशों और यहां तक कि परमाणु बम के हमले को भी झेल चुका है। आइए जानते हैं कॉकरोच से जुड़े कुछ बेहद चौंकाने वाले तथ्य।

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करोड़ों साल पुराना वजूद
कॉकरोच का इतिहास डायनासोर से भी पुराना है। साल 1889 में 'सैमुअल हबर्ड स्कडर' नाम के एक वैज्ञानिक ने अमेरिका की कोयला खदानों से कॉकरोच के पंख खोजे थे, जो करीब 35 करोड़ साल पुराने थे। उस दौर में इन पंखों की लंबाई 7 से 9 सेंटीमीटर हुआ करती थी।
बाद में साल 2010 में, लंदन के 'इम्पीरियल कॉलेज' के वैज्ञानिकों ने 30 करोड़ साल पुराने एक जीवाश्म का 3D वर्चुअल मॉडल तैयार किया, जिससे इतने पुराने कॉकरोच के शरीर की असली बनावट सामने आई। इसके अलावा, साल 2012 में चीन में भी 31 करोड़ साल पुराने जीवाश्म पंख मिले, जो बिल्कुल आज के कॉकरोचों जैसे ही थे।
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चार महाविनाशों को दी मात
इस जीव की सबसे बड़ी खासियत इसके जीवित रहने की असीम क्षमता है। इसने धरती पर आए 4 सबसे बड़े महाविनाश का डटकर सामना किया:
- लेट डेवोनियन महाविनाश (37.2 अरब साल पहले): जब महासागरों में ऑक्सीजन खत्म हो गई और 75% प्रजातियां मारी गईं, तब भी कॉकरोच जीवित रहे।
- पर्मियन-ट्रायसिक महाविनाश (25.2 अरब साल पहले): साइबेरिया में ज्वालामुखी फटने और भयानक एसिड रेन के कारण समुद्र के 96% और जमीन के 70% जीव मारे गए। इस दौरान कॉकरोच दलदल के नीचे छिप गए और सड़ा-गला खाना खाकर अपनी जान बचाई।
- ट्रायसिक-जुरासिक महाविनाश (20.1 अरब साल पहले): 'ग्रेट लीप्स' के ढहने से एक विशाल ज्वालामुखी फटा, जिसमें 80% प्रजातियां नष्ट हो गईं। लेकिन कॉकरोच फिर भी बच गए।
- डायनासोर का अंत (6.6 अरब साल पहले): जब 10 किलोमीटर चौड़ा एक ज्वालामुखी धरती पर फटा और डायनासोर खत्म हो गए, तब भी इस जीव ने खुद को सुरक्षित रखा।

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13 हिस्सों में बंटा दिल और 360 डिग्री विजन
कॉकरोच के शरीर की संरचना इसे अन्य जीवों से बिल्कुल अलग बनाती है। इसका शरीर मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटा होता है: सिर, पेट और पूंछ।
- सिर: इसमें दो ऐसी आंखें होती हैं जो 360 डिग्री तक देख सकती हैं। इसके अलावा, सेंसर का काम करने वाले दो एंटीना और खाने-पीने के लिए एक मुंह होता है।
- धड़ और पूंछ: इस हिस्से में छह पैर, चार पंख और एक दिल होता है। इनका दिल 13 हिस्सों में बंटा होता है।
हैरानी की बात यह है कि इनमें फेफड़े नहीं होते; ये शरीर के किनारों पर मौजूद छोटे-छोटे छेदों से सांस लेते हैं। खून में हीमोग्लोबिन न होने के कारण इनका खून सफेद या पीला होता है।

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सिर कटने पर भी जिंदा रहता है कॉकरोच
दरअसल, कॉकरोच का दिमाग केवल उसके सिर में नहीं होता, बल्कि पूरे शरीर में नौ अलग-अलग हिस्सों में बंटा होता है। अगर कोई एक हिस्सा डैमेज भी हो जाए, तो बाकी हिस्से काम करते रहते हैं। सिर कटने पर इनकी गर्दन तुरंत बंद हो जाती है जिससे खून बाहर नहीं निकलता। हालांकि, मुंह न होने के कारण ये पानी नहीं पी पाते और कुछ हफ्तों बाद प्यास की वजह से इनकी मौत हो जाती है।

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बिना मेल पार्टनर के बढ़ा सकते हैं आबादी
कॉकरोच दुनिया में कहीं भी रह सकते हैं और फूल, पत्ते, मांस- कुछ भी खाकर जिंदा रह सकते हैं, लेकिन इनका प्रजनन तंत्र और भी ज्यादा हैरान करने वाला है।
आम तौर पर, मादा कॉकरोच नर के साथ मेटिंग करने के बाद हर महीने एक 'ऊथिका' बनाती है। यह एक हरे रंग के कैप्सूल जैसा होता है, जिसमें 16 से 40 अंडे सुरक्षित रहते हैं। यह कैप्सूल इतना मजबूत होता है कि कोई भी कीड़ा इसे तोड़ नहीं सकता। मादा कॉकरोच अपने शरीर में नर के स्पर्म को 6 महीने तक सुरक्षित रख सकती है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि मादा बिना नर के भी बच्चे पैदा कर सकती है। इस प्रक्रिया को पार्थेनोजेनेसिस कहते हैं। इसमें मां के अपने ही डीएनए की कॉपियां आपस में मिलकर बच्चों को जन्म देती हैं।

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शरीर के अंग भले फट जाएं, पर नहीं टूटते इनके अंडे
कहा जाता है कि अगर दुनिया में कभी भीषण युद्ध हुआ, तो सिर्फ कॉकरोच ही जिंदा बचेंगे। यह सिर्फ एक कहावत नहीं है। 1945 में हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले में 2.5 लाख से ज्यादा इंसानों की मौत हो गई थी, लेकिन जब रेस्क्यू टीम वहां पहुंची, तो गटर से कॉकरोच मजे से बाहर आ रहे थे। वैज्ञानिकों के अनुसार, जहां एक इंसान 400 रेड रेडिएशन में दम तोड़ देता है, वहीं एक जर्मन कॉकरोच 9500 रेड रेडिएशन को आसानी से झेल सकता है।
सच तो यह है कि कॉकरोच के शरीर की ऊपरी परत बहुत मजबूत होती है और यह अपने वजन का 900 गुना भार उठा सकती है, लेकिन जब हम पूरी ताकत से चप्पल मारते हैं, तो यह परत टूट जाती है और अंदर के सारे नाजुक अंग फट जाते हैं। इसके बावजूद, चप्पल के इतने खतरनाक हमले से भी उनके अंडे नहीं टूटते।
आज के समय में वैज्ञानिक इस अनोखे जीव पर दुनिया भर में कई प्रयोग कर रहे हैं।
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