खूब सुनी परिवार और समाज की खरी खोटी पर डटी रहीं, कहानी भारत की पहली महिला डॉक्टर की
किसी भी हारी बीमारी में हम पहले डॉक्टर के भरोसे रहते हैं और उसके बाद भगवान याद आते हैं। ...और पढ़ें

भारत की पहली महिला डॉक्टर की कहानी (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हमारे समाज में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है, किसी भी हारी बीमारी में हम पहले डॉक्टर के भरोसे रहते हैं और उसके बाद भगवान याद आते हैं। हर साल 1 जुलाई को डॉक्टर की इसी अहमियत को ध्यान में रखते हुए नेशनल डॉक्टर डे मनाया जाता है, पर कभी आपने सोचा है कि भारत की पहली डॉक्टर कौन थी और वो डॉक्टर कैसे बनीं? चलिए आज इतिहास के पन्नों में दर्ज भारत की पहली महिला डॉक्टर अनसुनी कहानी जानते हैं।
भारत की पहली महिला डॉक्टर
भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी थीं। एक पुरुष प्रधान देश में पहली महिला डॉक्टर होना उस समय बड़ी बात थी। 31 मार्च 1865 को पुणे के जमींदार परिवार में जन्मीं डॉ. जोशी को शादी से पहले यमुना कहकर बुलाया करते थे। ये वो समय था जब शादी के बाद लड़कियों के सरनेम के साथ नाम तक बदल दिया जाता था।
फिर आनंदीबाई की शादी भी बहुत जल्दी हुई, क्योंकि महज 9 साल की उम्र में उनकी शादी 16 साल बड़े गोपालराव से करवा दी गई। यह गोपालराव की दूसरी शादी थी क्योंकि उनकी पहली पत्नी का निधन हो गया था। शादी जल्दी होने के कारण उन्होंने महज 14 साल की उम्र में नवजात शिशु को भी जन्म दे दिया, पर 10 दिन के अंदर उसकी मौत हो गई।
बच्चे की मौत ने तैयार किया डॉक्टर बनने का रास्ता
आनंदीबाई के 10 दिन के बच्चे की मौत ने उन्हें डॉक्टर बनने के लिए आगे का रास्ता दिखाया। उन्होंने इस बात पर गौर किया कि अगर उनके बच्चे को कोई बीमारी न होती तो वह आज जिंदा होता। इसी सोच ने उन्हें डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया ताकि कोई भी बच्चा बीमारी से अपनी जान न गंवाए।
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गहने बेचकर की पढ़ाई
सबसे बड़ी बात कि भले ही परिवार और समाज ने आनंदीबाई को उनके इस काम के लिए खूब खरी खोटी सुनाई हो, लेकिन उनके पट्टी गोपालराव ने साथ नहीं छोड़ा। आनंदीबाई को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए गहने तक बेचने पड़े थे, पर उन्होंने पढ़ाई बीच में नहीं छोड़ी।
एमडी की डिग्री हासिल करने वाली पहली महिला बनीं
आनंदीबाई ने भारत से नहीं बल्कि पेंसिलवेनिया के वुमन मेडिकल कॉलेज से डिग्री हासिल की और इस तरह वो 19 साल की उम्र में डॉक्टर ऑफ मेडिसिन की डिग्री पूरी करने वाली पहली महिला बनीं। बताते चलें कि आनंदीबाई ने फिर भारत लौटकर कोल्हापुर रियासत के अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल के महिला वार्ड में प्रभारी चिकित्सक पद पर अपनी सेवाएं दी थीं।