साइंटिस्ट नहीं, एक पादरी ने बनाया था दुनिया का पहला सोडा वॉटर; 99% लोग नहीं जानते ये कहानी
जोसेफ प्रिस्टली, जो एक पादरी और दार्शनिक थे, ने ऑक्सीजन और सोडा वॉटर की खोज की। ...और पढ़ें

ऑक्सीजन और सोडा वॉटर के जनक पादरी जोसेफ प्रिस्टली की कहानी (Picture Credit- AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। चाहे अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर हो या गर्मी से राहत दिलाने वाली कोल्ड ड्रिंक, इन दोनों को ही बनाने का श्रेय एक ही इंसान को जाता है, जिनका जोसेफ प्रिस्टली है।
इनसे जुड़ी सबसे दिलचस्प बात यह है कि जोसेफ कोई पेशेवर साइंटिस्ट नहीं, बल्कि एक पादरी यानी प्रीस्ट और दार्शनिक हुआ करते थे। आइए जानते हैं कैसे एक पादरी बना ऑक्सीजन गैस और सोडा वॉटर का जनक-
किताबों और भाषाओं के शौकीन
बचपन से ही पढ़ाई में तेज प्रिस्टली ने बेहद कम उम्र में ही लैटिन, ग्रीक और हिब्रू जैसी कई भाषाएं सीख ली थीं। 'डेवेंट्री अकादमी' से धर्मशास्त्र (Theology) की पढ़ाई करने के बाद यह एक पादरी बन गए, लेकिन जब उन्होंने बेंजामिन फ्रैंकलिन जैसे महान वैज्ञानिकों के बिजली और गैस से जुड़े एक्सपेरिमेंट्स के बारे में पढ़ा, तो उनके अंदर विज्ञान के प्रति लगाव पैदा हुआ।
ऐसे की 'ऑक्सीजन' की खोज
इतिहास के पन्नों में 1 अगस्त, 1774 का दिन बेहद खास माना जाता है। दरअसल, यह वही दिन था, जब ऑक्सीजन की खोज हुई थी। दरअसल, प्रिस्टली ने एक बड़ा-सा 12 इंच का बर्निंग लेंस लिया और सूरज की किरणों को 'मर्क्युरिक ऑक्साइड' नाम के केमिकल पर फोकस किया।
इस दौरान एक ऐसी गैस निकली, जिसमें न कोई रंग था और न ही कोई महक। जब उन्होंने इस गैस के पास एक जलती हुई मोमबत्ती रखी, तो उसकी लौ अचानक से तेज हो गई। फिर उन्होंने एक बंद कांच के जार में एक चूहे को उस गैस के साथ रखा।
और भी कई गैसों की पहचान की
उन्होंने देखा कि साधारण हवा के मुकाबले चूहा उस गैस में चार गुना ज्यादा समय तक जिंदा और फुर्तीला रहा। प्रिस्टली की खोजी हुई इस जादुई हवा को 'डीफ्लोगिस्टिकेटेड एयर' नाम दिया, जिसे आज पूरी दुनिया ऑक्सीजन के नाम से जानती है। सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं, उन्होंने लाफिंग गैस (नाइट्रस ऑक्साइड), अमोनिया और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी कई और गैसों की भी पहचान की।
कोल्ड ड्रिंक के असली 'जनक'
आपको जानकर हैरानी होगी कि आज हम जो सॉफ्ट ड्रिंक्स और सोडा पीते हैं, उसकी शुरुआत भी प्रिस्टली ने ही की थी। 1767 में उन्होंने चॉक (Chalk) पर सल्फ्यूरिक एसिड डालकर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाई और उसे सादे पानी में घोल दिया और इस तरह यह दुनिया का सबसे पहला 'आर्टिफिशियल सोडा वॉटर' बना, जो पीने में एकदम ताजा और स्वादिष्ट था।
बाद में 1772 में उन्होंने अपनी इस शानदार रेसिपी को एक किताब के जरिए दुनिया तक पहुंचाया। अपनी इस ऐतिहासिक खोज के लिए उन्हें प्रतिष्ठित रॉयल सोसाइटी ने उन्हें अपने सबसे बड़े सम्मान 'कोपले मेडल' (Copley Medal) से सम्मानित भी किया।
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