Trending

    loading ads...
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    एक अखबार बांटने वाले ने दिया था शॉपिंग पर 'डिस्काउंट' का आइडिया, पढ़ें सैम वॉल्टन की असली कहानी

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 07:01 PM (IST)

    आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे सैम वॉल्टन की कहानी बताता है, जिन्होंने 'डिस्काउंट' शॉपिंग का विचार दिया। ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    अखबार बांटने वाले सैम वॉल्टन ने कैसे दिया डिस्काउंट का आइडिया (Picture Credit- AI Generated)

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में शायद ही कोई ऐसा होगा, जो शॉपिंग नहीं करता होगा। खासकर अगर शॉपिंग पर भारी डिस्कॉउंट मिल रहा हो, तो पैसे खर्च करने से खुद को रोक पाना लगभग मुश्किल होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर डिस्काउंट का यह आइडिया सबसे पहले कब और कैसे आया होगा? 

    आपको जानकर यह हैरानी होगी कि सुबह-सुबह साइकिल पर अखबार बांटने वाला एक बेहद आम-सा लड़का डिस्कॉउंट का आइडिया लेकर आया था। आज इस आर्टिकल में हम इसी लड़के और इसके इस आइडिया के बारे में जानेंगे। 

    कहानी सैम वॉल्टन की

    यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि 'वॉलमार्ट' (Walmart) के संस्थापक सैम वॉल्टन की असल जिंदगी की दास्तान है। सैम ने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि व्यापार में सफल होने के लिए महंगे शहरों में बड़े शोरूम खोलने की जरूरत नहीं है, बल्कि अगर आप कम मुनाफे पर ज्यादा सामान बेचते हैं, तो भी आप दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन सकते हैं।

    शुरुआती संघर्ष की दास्तान

    सैम वॉल्टन ने अपने बचपन में ही अमेरिका में आई 'महामंदी' का भयानक दौर देखा था। आर्थिक तंगी ने उन्हें बहुत कम उम्र में ही मेहनत करना सिखा दिया। खेतों में मजदूरी करने से लेकर घर-घर अखबार बांटने तक, उन्होंने जीवन जीने के लिए हर काम किया। साल 1940 में अर्थशास्त्र में अपनी डिग्री पूरी करने के लिए बाद उन्होंने 'जे.सी. पेनी' कंपनी में नौकरी करके रिटेल बिजनेस की बारीकियां सीखीं।

    छोटे शहरों में शुरू किया बिजनेस

    दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सेना में अपनी सेवाएं देने के बाद, सैम ने अपनी कुछ जमापूंजी और ससुर से उधार लेकर एक छोटा सा स्टोर खरीदा। यहीं से उन्होंने इस बात पर फोकस किया कि छोटे कस्बों के लोग भी बेहतरीन सामान खरीदना चाहते हैं, लेकिन कम कीमत पर।

    'हर दिन कम कीमत' पर किया काम

    2 जुलाई, 1962 को सैम ने अपना पहला 'वॉलमार्ट' स्टोर खोला। उस समय जब सभी बड़े व्यापारी सिर्फ महानगरों पर फोकस कर रहे थे, सैम ने जानबूझकर छोटे शहरों को चुना। उनके इस फैसले के पीछे कुछ खास कारँ पीछे थे- 

    • बिचौलियों की छुट्टी: उन्होंने बीच के दलालों को हटाकर सीधे फैक्ट्री और कंपनियों से थोक में सामान खरीदना शुरू किया।
    • सस्ता माल, ज्यादा बिक्री: उनका मंत्र था 'हर दिन कम कीमत' (Everyday Low Prices)। यानी कि माल सस्ता खरीदो और ग्राहकों को भारी डिस्काउंट दो, जिससे ग्राहक बार-बार लौटकर आता है।
    • बेहतरीन ट्रांसपोर्टेशन: उन्होंने सामान को स्टोर तक पहुंचाने का ऐसा सिस्टम बनाया, जिससे डिलीवरी का खर्च कम से कम आए।

    कर्मचारियों को माना 'पार्टनर' 

    सैम की सबसे बड़ी ताकत उनके साथ काम करने वाले लोग थे। वे अपने स्टाफ को 'कर्मचारी' कहने के बजाय 'एसोसिएट्स' या 'पार्टनर' कहते थे। उन्होंने कंपनी के फायदे में अपने स्टाफ को भी हिस्सा दिया, जिससे लोग दिल लगाकर काम करने लगे।

    इतना ही नहीं वह कर्मचारियों की सलाह को सुनकर नोट करते थे और उन पर तुरंत काम करते थे। जमीन से जुड़े रहते हुए और अपने काम पर फोकस कर उन्होंने डिस्काउंट रिटेलिंग के मॉडल को घर-घर पहुंचाया और यह साबित किया कि कम मुनाफे पर ज्यादा सामान बेचकर भी दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति बना जा सकता है।