बिजली से नहीं, हाथों से चलाना पड़ता था दुनिया का पहला वैक्यूम क्लीनर, पढ़ें कैसे हुई इसकी शुरुआत
वैक्यूम क्लीनर की शुरुआत बिना बिजली के हाथों से चलने वाली मशीनों से हुई थी, जो धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक और पोर्टेबल उपकरणों में विकसित हुई। जेम्स मरे स्पै ...और पढ़ें

पहले वैक्यूम क्लीनर का रोचक इतिहास (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
पहला वैक्यूम क्लीनर बिना बिजली के हाथों से चलता था
ह्यूबर्ट सेसिल बूथ ने 1901 में पहला इलेक्ट्रिक वैक्यूम बनाया
जेम्स स्पैंगलर ने पोर्टेबल इलेक्ट्रिक वैक्यूम क्लीनर का आविष्कार किया
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बदलते समय के साथ लाइफ को आसान बनाने वाले कई डिवाइस का भी जन्म हुआ। चाहे कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन हो या बात करने के लिए मोबाइल, इन आविष्कारों ने समय के साथ हमारे रोजमर्रा के कामों को काफी आसान बना दिया है। वैक्यूम क्लीनर इन्हीं में एक है, जिसके बिना आजकल कई लोगों को अपनी लाइफ इमेजिन करना मुश्किल हो सकता है।
19वीं सदी के आखिर में बना यह आसान-सा आविष्कार आज एक शक्तिशाली मशीन बन गई है, जो आपके घर से धूल, गंदगी और पालतू जानवरों के बाल आसानी से साफ कर देती है। अब तो समय के साथ नई-नई तकनीक ने वैक्यूम क्लीनर्स को और भी ज्यादा एडवांस बना दिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का पहला वैक्यून क्लीनर बिना बिजली से चलता था। आइए आज आपको बताते हैं इसकी पूरी कहानी-
कब बना था पहला वैक्यूम क्लीनर?
अगर बात करें पहले इलेक्ट्रिक वैक्यूम क्लीनर की, तो इसे साल 1901 में ह्यूबर्ट सेसिल बूथ ने बनाया था, लेकिन अगर बात सबले पहले बनाए गए वैक्यूम क्लीनर की करें, तो इसके बादे में जानने के लिए 1800 के दशक में जाना होगा। उस दौर में औद्योगिक क्रांति की वजह से घरों को साफ रखना मुश्किल होता जा रहा था। शहरी आबादी बढ़ने के साथ ही मध्यम-वर्गीय घरों में कालीन और अपहोल्स्ट्री का इस्तेमाल आम हो गया था। ऐसे में धूल, गंदगी और कचरे से निपटना एक बड़ी चुनौती बन गई थी और झाड़ू लगाने या कालीनों को झाड़ने जैसे पारंपरिक सफाई के तरीके अब बेअसर हो गए थे।
1860 में हुई पहली कोशिश
इसी का समाधान निकालने के लिए 1860 के दशक में, मैकेनिकल कारपेट क्लीनर बनाने की पहली कोशिश में धूल खींचने के लिए हाथ से चलने वाले बेलोज (धौंकनी) का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद फिर 1870 के दशक में, आइव्स मैकगैफी ने "व्हर्लविंड" नाम की पहली स्वीपिंग मशीन का पेटेंट कराया, जो बिना बिजली के काम करता था।
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इसमें सक्शन बनाने के लिए हाथ से घुमाए जाने वाले पंखे का इस्तेमाल किया जाता था। सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि इसे इस्तेमाल करना मुश्किल था, क्योंकि ऑपरेटर को हाथ से लीवर घुमाना पड़ता था और मशीन को फर्श पर धकेलना पड़ता था।
धीरे के साथ हुए बदलाव
उसी समय के आसपास, मेलविले बिसेल ने घूमने वाले पहियों और घूमने वाले ब्रश वाला कारपेट स्वीपर बनाया, जो गंदगी और धूल को साफ करके स्वीपर की बॉडी के अंदर जमा कर देता था। फिर 1899 में, जॉन एस. थर्मन ने पेट्रोल से चलने वाला पहला मोटराइज्ड वैक्यूम क्लीनर बनाया। हालांकि, इन शुरुआती प्रोटोटाइप में एक कमी यह थी कि उनमें कारपेट की गहराई से सफाई करने की ताकत नहीं थी।
भले ही मोटराइज्ड वैक्यूम क्लीनर का आविष्कार हो चुका था, लेकिन लोग अब भी मैनुअल कारपेट स्वीपर का इस्तेमाल करते रहे, क्योंकि वे सस्ते थे और उन्हें चलाने के लिए बिजली की जरूरत नहीं पड़ती थी। वे झाड़ू, डस्टर और कपड़े जैसे दूसरे औजारों का भी इस्तेमाल करते थे, लेकिन इन सबसे घर को साफ रखने में बहुत समय, ऊर्जा और मेहनत लगती थी।,ऐसे में अमेरिका में, 1920 के दशक में हूवर वैक्यूम मॉडल बनाया गया और अमेरिकियों के बीच इसे मेहनत बचाने वाले उपकरण के तौर पर बेचा गया, जिसने मध्यम-वर्गीय महिलाओं को घर के कामों से आजादी दिलाने का वादा किया था।
इसके बाद 1901 में ह्यूबर्ट सेसिल बूथ ने पहले इलेक्ट्रिक वैक्यूम क्लीनर का पेटेंट कराया। हालांकि, इसके साथ दिक्कत यह थी कि इसे एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जाया सकता था, इसलिए इसे उस जगह के बाहर खड़ा किया जाता था, जहां सफाई करनी होती थी और खिड़कियों से लंबे पाइप अंदर डाले जाते थे।
कैसे आया पहला पोर्टेबल वैक्यूम क्लीनर
जेम्स मरे स्पैंगलर ने पहला कमर्शियल रूप से सफल पोर्टेबल इलेक्ट्रिक वैक्यूम क्लीनर बनाया। उन्होंने एक पुराने पंखे की मोटर, झाड़ू के हैंडल से जुड़े एक डिब्बे और धूल जमा करने के लिए तकिए के कवर का इस्तेमाल करके इसे तैयार किया था। उन्होंने इसका पेटेंट विलियम हूवर को बेच दिया, जिससे 1922 में हूवर कंपनी बनी। इसके बाद तकनीक में हुए बदलाव और तरक्की के चलते जरूरत के हिसाब से वैक्यूम क्लीनर में बदलाव होते गए और आज हम जिसका इस्तेमाल करते हैं, उन वैक्यूम क्लीनर का जन्म हुआ।