विचार: उपभोक्ताओं में जागरूकता जरूरी
त्योहारों पर मिठाइयों और दूध में मिलावट एक गंभीर समस्या है, जिसके पीछे अधिक मुनाफा कमाने की चाह और कमजोर कानून व्यवस्था मुख्य कारण हैं। इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून, नियमित जांच और उपभोक्ताओं की जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
HighLights
त्योहारों पर मिठाइयों और दूध में मिलावट एक गंभीर समस्या।
मुनाफाखोरी, कमजोर कानून व्यवस्था मिलावट के मुख्य कारण।
सख्त कानून, नियमित जांच और उपभोक्ता जागरूकता अत्यंत आवश्यक।
डॉ. शंकर सुवन सिंह। भारत त्योहारों का देश है। दीपावली जैसे पावन पर्व पर मिठाइयों, दूध, मावा, पनीर और घी की मांग बहुत बढ़ जाती है। कुछ लोग अधिक पैसे कमाने के लालच में इनमें मिलावट करके लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हैं। हर साल ऐसी खबरें आने के बाद भी इस समस्या पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही है, यह सोचने का विषय है। मिलावट का मुख्य कारण ज्यादा मुनाफा कमाने की चाह है।
इसके अलावा, त्योहार पर मांग बढ़ने, जांच करने वाले अधिकारियों की कमी, लैब में जांच में देरी और अदालतों में फैसले मिलने में लंबा समय लगना भी इसके बड़े कारण हैं। जब दोषियों को समय पर सजा नहीं मिलती, तो कानून का डर कम हो जाता है। हालांकि, सभी व्यापारी बेईमान नहीं होते; कई लोग पूरी ईमानदारी से काम करते हैं। इसलिए ईमानदार व्यापारियों का हौसला बढ़ाना और मिलावट करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करना बहुत जरूरी है।
मिलावट रोकने के लिए हमारे देश में कानून मौजूद हैं। खाद्य सुरक्षा विभागों और सरकार को केवल त्योहारों पर ही नहीं, बल्कि पूरे साल बाजारों की निगरानी करनी चाहिए। दूध और मिठाइयों जैसी चीजों की नियमित जांच होनी चाहिए।
यदि कोई अधिकारी लापरवाही बरते, तो उसकी भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। जांच पारदर्शी तरीके से हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले। इस समस्या को हल करने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे।
हर जिले में आधुनिक लैब और पर्याप्त जांच अधिकारी होने चाहिए। मिलावट करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान हो। इसके साथ ही, गलत प्रचार और झूठे दावों पर भी रोक लगनी चाहिए। आम लोग आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकें, ऐसी डिजिटल व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। सिर्फ सरकार के भरोसे बैठने से काम नहीं चलेगा, उपभोक्ताओं को भी जागरूक होना होगा।
लोगों को हमेशा भरोसेमंद दुकानों से सामान खरीदना चाहिए, पक्का बिल लेना चाहिए और शक होने पर उसकी शिकायत विभाग से करनी चाहिए। स्कूलों और मीडिया के जरिए लोगों को खाद्य सुरक्षा के बारे में बताना चाहिए। त्योहार खुशियों और विश्वास का प्रतीक हैं।
यह सरकार, प्रशासन और व्यापारियों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को शुद्ध और सुरक्षित भोजन दें। केवल त्योहारों पर छापे मारने से यह समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि इसके लिए मजबूत निगरानी और सख्त कानून की जरूरत है ताकि किसी के मुनाफे के लिए किसी की सेहत दांव पर न लगे।
डॉ. शंकर सुवन सिंह
प्रोफेसर ,खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी
महर्षि मारकंडेश्वर विश्वविद्यालय
अम्बाला, हरियाणा











