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    इमरजेंसी की वजह से बदल गया था Sholay का क्लाइमेक्स, अगर ऐसा होता तो हिट नहीं होती फिल्म?

    Updated: Wed, 06 Aug 2025 10:42 AM (IST)

    इस 15 अगस्त को शोले अपनी 50वीं वर्षगांठ के करीब पहुंच रही है। इस फिल्म में धर्मेंद्र हेमा मालिनी अमिताभ बच्चन जैसे कई दिग्गज कलाकार नजर आए थे। फिल्म की कहानी लिखी थी सलीम जावेद ने। अब हाल ही में जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर ने फिल्म से जुड़े कई जबरदस्त किस्सों को लेकर चर्चा की।

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    शोले के क्लाइमेक्स सीन में करना था बदलाव (फोटो-इंस्टाग्राम)

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। आने वाले 15 अगस्त को बॉलीवुड की सबसे चर्चित फिल्म शोले (Sholay) को रिलीज हुए 50 साल पूरे हो जाएंगे। रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित इस फिल्म ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े सभी लोगों का करियर बदल दिया जिसमें लेखक सलीम-जावेद (सलीम खान और जावेद अख्तर) भी शामिल थे। वहीं फिल्म की कास्ट किसी ऑल-स्टार टीम से कम नहीं थी, जिसमें अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, संजीव कुमार, अमजद खान और जया बच्चन जैसे नाम प्रमुख भूमिकाओं में थे।

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    शोले के सारे ही किरदार थे मजेदार

    इसे बॉलीवुड की कल्ट फिल्मों में गिना जाता है। अब अपनी अपकमिंग फिल्म "120 बहादुर" के प्रमोशन के लिए फरहान प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट पर आए हुए थे, जहां उन्होंने शोले से जुड़े कुछ अनसुने किस्सों को लेकर चर्चा की। फरहान ने बताया कि फिल्म इतनी कामयाब क्यों रही। एक्टर ने कहा,"यह फिल्म आप पर गहरा असर छोड़ती है। जिस तरह से इसे बनाया गया था और सभी किरदार मजेदार थे। ऐसा नहीं था कि सिर्फ़ जय और वीरू ही रोमांचक थे। जेलर, सूरमा भोपाली, गब्बर और बसंती, सभी बेहतरीन किरदार थे। यह एक बड़ी हिट थी।"

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    फरहान ने शोले को बताया इमोशनल फिल्म

    उन्होंने आगे कहा कि दृश्यात्मक रूप से यह फिल्म बाकी फिल्मों से कहीं बेहतर थी और सिनेमाघरों में इसने जो अनुभव दिया उसे भुलाया नहीं जा सकता है। मेरे लिए यह एक बेहद भावुक फिल्म थी और इसमें जबरदस्त मनोरंजन भी था। फिल्म का निर्देशन और फिल्मांकन बेहद शानदार था और यह कुछ ऐसा था जो शायद मुग़ल-ए-आज़म के अलावा पहले कभी नहीं हुआ था। आप इसके दृश्य देखते हैं, और ये आपको सोचने पर मजबूर कर देते हैं।'

    क्या था ओरिजनल सीन?

    फरहान ने याद किया कि शोले के क्लाइमेक्स का ओरिजनल वर्जन कितना प्रभावशाली था और उसे क्यों बदलना पड़ा। एक्टर ने कहा, “फिल्म का भावनात्मक केंद्र बहुत मजबूत था, जिसमें ठाकुर के हाथ कट जाने के बाद बदला लेने की पूरी कहानी थी। हम जय वीरू की बातचीत में खो जाते हैं, लेकिन फिल्म की रीढ़ एक ईमानदार पुलिस अधिकारी था जो एक डाकू के पीछे पड़ जाता है जब वह अपने परिवार को मार डालता है। वह इन दो निकम्मे लोगों को काम पर रखता है और फिर वो गब्बर को मार देता है। आपातकाल के कारण उन्हें इसे बदलना पड़ा और अब ओरिजनल एंडिंग कुछ और है। यही वह समय है जब वह गब्बर को अपने पैरों से कुचलने के बाद रोता है।”

    फरहान ने कहा कि उनके पिता जावेद अख्तर, जिन्होंने सलीम खान के साथ मिलकर शोले फिल्म लिखी थी जबरन किये गए बदलावों से नाखुश थे।

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