जब कैमरा चालू होते ही सच हो गए गाने के बोल, Sridevi का वो सुपरहिट गाना जब असली बारिश ने किया तैयारियों को चौपट
श्रीदेवी की फिल्म 'लम्हे' के गाने 'मेघा रे मेघा रे' की शूटिंग के दौरान एक अनोखा वाकया हुआ। यही एक वजह है जो 69 साल बाद भी इस गाने को खास बनाती है। ...और पढ़ें
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समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। श्रीदेवी (Sridevi) को बॉलीवुड की डांसिंग क्वीन कहा जाता था। एक बेहतरीन और ग्रेसफुल डांसर होने के नाते उन्होंने कई फिल्मों में अपने टैलेंट की छठा बिखेरी।
मिस्टर इंडिया (Mr India) के गाने 'हवा हवाई' (Hawa Hawai) को याद करते ही श्रीदेवी का वो एक्सप्रेशन आंखों के सामने आ जाता है जिसमें उन्होंने सिर्फ आंखों से ही कमाल कर दिया था। इसके अलावा 'मैं तेरी दुश्मन' गाने में उनके नागिन डांस (Naagin Dance) को भारतीय सिनेमा के बेहतरीन डांस नंबर्स में गिना जाता है।
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आज हम आपको श्रीदेवी के डांस नंबर के बारे में नहीं बल्कि एक ऐसे गाने के बारे में बताने वाले हैं जिसके लिए मेकर्स ने बहुत तैयारी करी लेकिन शूटिंग के समय भगवान ने एक ऐसा चमत्कार किया कि जिससे यश चोपड़ा भी हैरान रह गए।
फिल्म लम्हे के एक गाने के दौरान हुई घटना
दरअसल हम बात कर रहे हैं श्रीदेवी की फिल्म 'लम्हे' के गाने 'मेघा रे मेघा रे' (Megha Re Megha Re) की। इस गाने की शूटिंग असली बारिश में की गई थी। श्रीदेवी ने जब बारिश की बूंदों के साथ कदम ताल मिलाया तो देखने वाले भी ताली बजाने से खुद को नहीं रोक पाए। इस गाने के निर्देशक यश चोपड़ा ने पहले इसे नकली बारिश में शूट करने की सारी तैयारी कर रखी थी, लेकिन जैसे ही कैमरा ऑन हुआ, अचानक असली बरसात शुरू हो गई थी।
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इस कुदरती संयोग से पूरी टीम और यश चोपड़ा भी सरप्राइज रह गए। इस गाने के शूट के दौरान जैसे ही असली बारिश हुई तो यश चोपड़ा ने कहा,'कैमरा चलने दो क्योंकि ऐसे पल बनाए नहीं जाते।'
रिलीज होते ही बन गया था सुपरहिट
मेघा रे मेघा रे की शूटिंग राजस्थान के मांडवा में हुई थी। 4 मिनट के इस हिट सॉन्ग ने 1957 में रिलीज के समय धूम मचा दी थी। इस गाने को अपनी आवाज दी थी दिग्गज गायिका लता मंगेशकर ने और साथ-साथ राजस्थानी स्वाद जोड़ा था इला अरुण ने। दरअसल यह गाना सिर्फ एक बॉलीवुड ट्रैक नहीं था, बल्कि इसे राजस्थान के पारंपरिक लोक नृत्यों और संगीत का बेहतरीन मिश्रण बनाकर तैयार किया गया था।
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इस सदाबहार गाने को मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लिखा था और इसका संगीत शिव-हरि (शिवकुमार शर्मा और हरिप्रसाद चौरसिया) की जोड़ी ने तैयार किया था। आज भी जब ये बारिश होती है तो इसके बोल कानों में पड़ते ही बस यूं ही थिरकने का मन करने लगता है।