Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    ट्रेन के रुकने का इंतजार, रात को शूटिंग, पेड़ों के पीछे दिया संगीत; 95 साल पहले ऐसे हुई पहले गाने की शूटिंग

    Updated: Tue, 26 May 2026 01:27 PM (IST)

    क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा के पहले गाने की शूटिंग कैसे हुई थी? इसके पीछे की कहानी जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। ...और पढ़ें

    ऐसे हुई सिनेमा के पहले गाने की शूटिंग

    ऐसे हुई सिनेमा के पहले गाने की शूटिंग

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में जितना प्यार फिल्मों को मिला है, उतना ही प्यार उन फिल्मों के संगीत से भी किया गया है। अब तो मानो हर फिल्म की रूह उसके संगीत को ही माना जाता है। फिल्मों में अगर संगीत ना हो तो मानो वह फिल्में अधूरी सी लगती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा का पहला गाना कौन सा था? इस गाने की कहानी क्या थी? आज बात इसी की...

    95 साल पहले आया पहला गाना

    अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि जिन गानों पर असल में हम झूमते हैं और डांस करते हैं आखिर उन्हीं गानों की सिनेमा में कहानी क्या है? फिल्मों का पहला गाना (First Song of Bollywood) क्या था, तो इसका जवाब है कि सिनेमा का पहला गाना साल 1931 में आया था।

    जी हां, भारतीय सिनेमा का पहला गाना है, 'दे दे खुदा के नाम पर प्यारे, ताकत हो गर देने की...'। यह गाना साल 1931 में रिलीज हुई भारत की पहली बोलती फिल्म (Talking Movie) 'आलम आरा' (Alam Ara) का है। इसी गाने को सिनेमा का पहला गाना कहा जाता है।

    यह भी पढ़ें- 200 साल पुराना गीत जो 'तवायफ' की नाकाम मोहब्बत का दर्द करता है बयां, रेडियो के जरिए घर-घर में उठी विरह की टीस

    Alam Ara

    सिंगर नहीं एक्टर ने गाया था गाना

    इस गाने को किसी पेशेवर सिंगर ने अपनी आवाज नहीं दी थी। उस दौर में 'प्लेबैक सिंगिंग' की तकनीक तब उतनी प्रचलित नहीं थी। इस गाने को फिल्म आलम आरा के ही एक अभिनेता डब्ल्यू. एम. खान (Wazir Mohammed Khan) ने गाया था। फिल्म में उन्होंने एक फकीर का किरदार निभाया था और यह गाना उसी फकीर पर फिल्माया गया था, जिसमें उन्होंने ही इसे आवाज दी और उन्होंने ही इस पर एक्ट भी किया था।

    खबरें और भी

    कैमरे के सामने गाया था लाइव गाना

    कुछ आर्काइव रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दौर में बड़े वाद्य यंत्र या फिर कोई खास उपकरण नहीं होते थे। ऐसे में डब्ल्यू. एम. खान ने कैमरे के सामने इस गाने को लाइव गाया था और उनके साथ बजने वाले वाद्य यंत्रों को भी उसी वक्त लाइव बजाया गया था।

    गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान हारमोनियम और एक तबला बजाया गया था। कहा जाता है कि, संगीतकार फिरोजशाह मिस्त्री हारमोनियम और तबला लेकर कैमरे के पीछे, स्टूडियो के एक कोने में छिपकर बैठ गए थे ताकि वह फ्रेम में न आएं, और उनकी आवाज सीधे माइक्रोफोन में रिकॉर्ड हो सके।

    Gemini_Generated_Image_1a54nv1a54nv1a54

    ट्रेन के रुकने का होता था इंतजार

    जब ये गाना रिकॉर्ड हुआ तो उस दौरान काफी कुछ नया हुआ था। दरअसल 'आलम आरा' फिल्म और इसके गानों की शूटिंग मुंबई के 'ज्योति स्टूडियो' में की गई थी। परेशानी की बात तो यह थी कि ये स्टूडियो रेलवे ट्रैक के पास ही मौजूद था, ऐसे में दिनभर यहां पर ट्रेनों की आवाजाही रहती थी।

    जब गाने की शूटिंग होती थी तो उस वक्त ट्रेनों का शोर नहीं होता था। उस दौर में सिंगल साउंड सिस्टम से ही रिकॉर्डिंग की जाती थी। ऐसे में हल्का सा भी शोर इसके लिए परेशानी बन जाता, तो जब ट्रेनें रुक जाती थीं तभी गाने की रिकॉर्डिंग की जाती थी। इसलिए गाने और फिल्म की शूटिंग रात के 1 बजे से सुबह 4 बजे के बीच की जाती थी।

    इन बीते वर्षों में भारत की पहली बोलती फिल्म का कोई रिकॉर्ड अब नहीं बचा है। आलम आरा (Alam Ara) फिल्म के प्रिंट्स और इसके गानों के ओरिजिनल साउंड ट्रैक अब खो चुके हैं। महज कुछ ही तस्वीरें और रिकॉर्ड्स बाकी हैं, जिन्हें संजोकर रखा गया है।

    यह भी पढ़ें- 300 लड़कियों के बीच में फंसे थे Rajesh Khanna, 57 साल पहले Cult गाने की शूटिंग के दौरान का है दिलचस्प किस्सा