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    हूबहू कहानी, एक जैसे सीन, खौफनाक क्लाइमैक्स; 67 साल पहले आई कल्ट फिल्म से मिलती है Om Shanti Om की कहानी

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 06:14 PM (IST)

    फराह खान की 'ओम शांति ओम' एक ऐसी क्लासिक फिल्म से इंस्पायर्ड थी, जिसकी कहानी समय से काफी आगे की थी। ...और पढ़ें

    'ओम शांति ओम' से पहले इस फिल्म में दिखी पीक डिटेलिंग

    'ओम शांति ओम' से पहले इस फिल्म में दिखी पीक डिटेलिंग

    HighLights

    1. 67 साल पहले आई फिल्म से मिलती है 'ओम शांति ओम' की कहानी

    2. दोनों फिल्मों में पुनर्जन्म की दिखी कहानी

    3. फराह खान ने क्लासिक फिल्म से ली प्रेरणा

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई ऐसी फिल्में बनी हैं, जो वक्त से बेहद आगे की रहीं। भले ही 'पीक डिटेलिंग' नाम का शब्द का आजकल चर्चा में हो, लेकिन असल में 'पीक डिटेलिंग' सिनेमा में सालों से होती आ रही है या यूं कहें कि 50 और 60 के दशक की फिल्मों में भी वही हुआ करता था।

    आज बात एक ऐसी फिल्म की जिसकी पीक डिटेलिंग फराह खान की ब्लॉबस्टर फिल्म में भी नजर आई। दोनों फिल्मों के सीन्स और कहानी लगभग एक जैसे थे। अब ये इत्तेफाक था या फिर सच, ये तो वहीं जानें, पर आज कहानी उसी फिल्म की...

    कौन सी हैं वो फिल्में?

    दरअसल जिस फिल्म की बात हम कर रहे हैं, इनमें पहला नाम है साल 2007 में आई फिल्म 'ओम शांति ओम' (Om Shanti Om) का और दूसरा नाम है साल 1958 में आई फिल्म 'मधुमती' (Madhumati) का। इन दोनों फिल्मों को अगर आपने देखा है तो आप यह समझ पाएंगे कि दोनों फिल्मों में क्या समानताएं हैं।

    हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों फिल्मों की कहानियां लगभग एक जैसी ही थीं। दोनों फिल्मों के गाने हिट रहे थे, यहां तक कि इन दोनों फिल्मों के सीन्स भी एक जैसे ही थे।

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    मधुमती में नजर आए दिलीप कुमार

    साल 1958 में आई 'मधुमती' बिमल रॉय (Bimal Roy) की उन क्लासिक फिल्मों में से एक है, जो कमाल के क्रिएशन में से एक रही। फिल्म में रूलर इंडिया में दुष्कर्म जैसे गंभीर मुद्दे को उठाया गया था। दिलीप कुमार और वैजयंती माला फिल्म में लीड रोल में नजर आए। वहीं फिल्म के गानों ने तो मानो कमाल ही कर दिया।

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    लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आवाज में गाया हुआ गाना 'आजा परदेसी' (Aaja Pardesi) ब्लॉकबस्टर हुआ, तो वहीं सुहाना सफर और ये मौसम हंसी जैसे गाने कल्ट गाने बन गए। फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड के हिस्सों में की गई। फिल्म के प्लॉट और कहानी को रित्विक घटक ने तैयार किया और इसका स्क्रीनप्ले राजेंद्र सिंह बेदी ने तैयार किया।

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    इस कमर्शियल फिल्म के क्लाईमैक्स को देखकर लोगों के मुंह खुले के खुले रह गए और इस फिल्म ने जमकर वाहवाही लूटी। फिल्म में विलेन बने प्राण ने भी अपनी दमदार अदाकारी दिखाई थी। पुर्नजन्म पर आधारित इस फिल्म को आज भी कल्ट माना जाता है और इसी फिल्म की समानताएं एक दूसरी फिल्म से मिलती हैं।

    'ओम शांति ओम' में 'मधुमती' का मैजिक

    साल 2007 में शाह रुख खान (Shah Rukh Khan) की फिल्म ओम शांति ओम आई। इस फिल्म को फराह खान ने बनाया था। फिल्म में शाह रुख के साथ दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) नजर आईं। दीपिका की यह डेब्यू फिल्म थी, ऐसे में एक नए चेहरे ने दर्शकों का दिल जीत लिया। शांतिप्रिया बनीं दीपिका को देखकर लोगों को मधुमती की याद आई।

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    फिल्म का झूमर वाला सीन हो, दीपिका और वैजयंती माला को देख दोनों के फिल्मों के विलेन का डर जाना हो, स्कैच सीन हो, सीढ़ियों वाला सीन हो या फिर शाह रुख का पुर्नजन्म हो, यह सब देख लोगों ने कल्ट क्लासिक मधुमती को ही याद किया। असल में फिल्म की कहानी कर्ज और मधुमती से ही इंस्पायर्ड बताई जाती है।

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    फिल्म का क्लाईमैक्स मधुमती से हुबहू मिलता है। फराह खान की इसी पीक डिटेलिंग की चर्चा सालों बाद होती है। यहां तक कि फिल्म के कुछ सीन फराह ने ऐसे डायरेक्टर किए, जिसमें पहले ही हिंट मिल गई कि ऐसा क्यों किया गया।

    इन दोनों फिल्मों की इन्हीं समानताओं को देख लोग आज भी इनमें समानताएं ढूंढते हैं। दोनों फिल्मों (Old Classic Movies) की शुरुआत एक हादसे से होती है, जिसमें प्रेमी-प्रेमिका बिछड़ जाते हैं और फिर दोनों ही फिल्मों में हीरो की मौत हो जाती है और फिर पुनर्जन्म होता है और फिर विलेन को सजा दिलाई जाती है। यही वजह है कि इन दोनों ही फिल्मों को कल्ट फिल्मों के रूप में याद किया जाता है।

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