लता-रफी ने गाए जिनके गीत, ताउम्र झेलनी पड़ी 'बी-ग्रेड' फिल्मों की मार; मौत से ठीक पहले दिए दो ब्लॉकबस्टर गाने
गीतकार असद भोपाली ने लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे गायकों के लिए गीत लिखे, लेकिन उन्हें ताउम्र संघर्ष करना पड़ा, पर मौत से पहले उन्होंने रच डाला इति ...और पढ़ें

लता-रफी ने गाए जिनके लिखे गाने (फोटो- एक्स)
HighLights
असद भोपाली ने लता-रफी के लिए 400 से अधिक गीत लिखे
'मैंने प्यार किया' से मिली ब्लॉकबस्टर सफलता और पहचान
'दिल दीवाना' के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड, फिर हुआ निधन
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में कई संगीतकार और गीतकार ऐसे रहे हैं, जिन्होंने ताउम्र मेहनत की, लेकिन शायद उन्हें सफलता तब हासिल हुई, जब जिंदगी के वह आखिरी पड़ाव पर थे। सिनेमा में एक ऐसे ही गीतकार रहे, जिन्होंने खूब मेहनत की, जिनके लिखे गीतों को लता मंगेशकर ने गाया। मोहम्मद रफी भी जिनके लिखे गीतों को गा चुके हैं। आज कहानी उसी फनकार की...
कौन थे असद भोपाली?
आज जिस फनकार का जिक्र हम कर रहे हैं उनका नाम था असद भोपाली। असद भोपाली ने अपने करियर में कम लेकिन बेहद कल्ट गाने लिखे, जिन्हें पसंद करने वालों की फेहरिस्त आज भी है। यहां तक कि उनके गाने आज भी सुपरहिट हैं। हालांकि उन्हें वो पहचान नहीं मिल पाई, जिसके वह हकदार थे।
असद भोपाली का जन्म मध्यप्रदेश के भोपाल में 10 जुलाई 1921 को को हुआ था। उनका असली नाम असदुल्लाह खान था। हालांकि फिल्मों में आने के बाद उनका नाम बदल गया। उनके पिता अरबी और फारसी भाषाओं के शिक्षक थे, तो ऐसे में उन्हें इन भाषाओं का अच्छा ज्ञान था।
ऐसे हुई करियर की शुरूआत
असद भोपाली कॉलेज के दिनों से ही शेर-ओ-शायरी करते थे। वो मुशायरों में जाते थे। वो दौर आजाजी के बाद का था जब साल 1949 में मशहूर फिल्म निर्माता फाजली ब्रदर्स अपनी फिल्म 'दुनिया' के लिए नए गीतकार की तलाश में थे। दरअसल उनकी फिल्म मुख्य गीतकार आरजू लखनवी महज दो गाने लिखकर पाकिस्तान चले गए थे।
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ऐसे में फाजली ब्रदर्स को नए गीतकार की तलाश थी और फिर वह भोपाल एक मुशायरे में गए, जहां उनकी मुलाकात असद भोपाली से हुई। ये मुशायरा भोपाल के एक सिनेमा हॉल मालिक सुगम कपड़िया की सलाह पर फाजली ब्रदर्स ने भोपाल के 'भोपाल टॉकीज' में आयोजित करवाया। यहीं पर फाजली ब्रदर्स ने असद भोपाली को अपनी फिल्म में गीतकार के लिए साइन कर लिया।

सिनेमा को दिए कई हिट गाने
आखिरकार फिल्म दुनिया से असद भोपाली ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। इस फिल्म के लिए उन्होंने 'रोना है तो चुपके चुपके' और सुरैया की आवाज में 'अरमान लुटे, दिल टूट गया' जैसे गाने लिखे। हालांकि उनके करियर में बड़ा ब्रेक उन्हें मिला साल 1951 में आई फिल्म अफसाना से। इस फिल्म को बी.आर चोपड़ा ने बनाया था।
इस फिल्म के लिए उन्होंने 6 गाने लिखे। फिल्म के एक गाने को लता मंगेशकर ने गाया और उसे असद भोपाली ने ही लिखा था। यह गाना हिट रहा और यहीं से असद भोपाली की किस्मत बदली। धीरे-धीरे ही सही लेकिन हां असद भोपाली का नाम सिनेमा में चल पड़ा। हालांकि कई और दिग्गज गीतकारों के चलते असद भोपाली को वो मौके नहीं मिले।
100 से ज्यादा फिल्मों में 400 से ज्यादा गाने
असद भोपाली ने अपने 40 साल के करियर (1949-1990) में लगभग 100 से अधिक फिल्मों के लिए 400 से ज्यादा गाने लिखे। हालांकि यह नहीं है कि उनके गाने हिट नहीं हुए। उनके कुछ ऐसे कल्ट गाने भी बने, जो ब्लॉकबस्टर बने। साल 1963 में उन्होंने फिल्म पारसमणि के लिए गीत लिखे। इस फिल्म के गाने हिट रहे।
फिल्म का एक गाना 'हंसता हुआ नूरानी चेहरा' (hansta hua noorani chehra) आज भी सुपरहिट है। इस गाने को लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) और कमल बरोत ने गाया था। इसके अलावा उन्होंने साल 1972 में आई फिल्म रूप तेरा मस्ताना के लिए 'सौ बार जनम लेंगे, सौ बार फना होंगे', 1965 में आई फिल्म एक सपेरा एक लुटेरा के लिए 'हम तुमसे जुदा होके, मर जाएंगे रो-रो के' समेत कई गाने गाए।
सलमान के करियर को दिए ब्लॉबस्टर गाने
असद भोपाली ने अपनी जिंदगी के अंतिम पड़ाव में भी वो कमाल किया, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। साल 1989 में आई राजश्री प्रोडक्शंस की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'मैंने प्यार किया' (Maine Pyaar kiya songs) असद भोपाली के करियर की सबसे बड़ी फिल्म साबित हुई। इस फिल्म के लिए उन्होंने 'कबूतर जा जा जा' (Kabootar Ja Ja) और 'दिल दीवाना' (Dil Deewana) जैसे हिट गाने लिखे।
ये गाने लिखकर ये साबित किया कि वे बदलते दौर के साथ भी खुद को ढाल सकते हैं। साल 1990 में उन्हें फिल्म मैंने प्यार किया के गाने 'दिल दीवाना' के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। हालांकि अपनी बीमारी के चलते वो खुद मुंबई आकर ये अवॉर्ड नहीं ले सके।
असद भोपाली का हुनर कमाल का था, लेकिन मजरूह सुल्तानपुरी, साहिर लुधियानवी और कई बड़े नामों की चमक के चलते असद भोपाली की चमक फीकी पड़ गई। उन्हें बी-ग्रेड फिल्मों में गाने लिखने पड़ते थे। उन्होंने कभी काम के लिए हाथ नहीं फैलाया, जो मिला उसे पूरी शिद्दत से निभाया।
ये किस्मत का खेल ही था कि एक तरफ जहां उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी फिल्म (Maine Pyaar kiya) में हिट गाने दिए और उसी वक्त उन्हें लकवा मार गया। तबीयत खराब होने के कारण उनका परिवार उन्हें वापस भोपाल ले आया। अवॉर्ड मिलने के कुछ ही वक्त बाद 9 जून 1990 को महज 68 साल की उम्र में असद भोपाली का भोपाल में निधन हो गया।