Cocktail 2 Review: सिसिली की खूबसूरत वादियों में नहीं मिला 'कॉकटेल' जैसा नशा, कहां चूके शाहिद-कृति और रश्मिका?
कॉकटेल 2 आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म में निर्देशक होमी अदजानिया ने लोकेशन की खूबसूरती को तो अच्छे से दिखाया, लेकिन भावनाएं दिखाने से ...और पढ़ें
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कॉकटेल 2 मूवी रिव्यू/ फोटो- Jagran Graphics

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। साल 2012 में आई सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण और डायना पेंटी अभिनीत और होमी अजदानिया निर्देशित फिल्म कॉकटेल तीन युवाओं की कहानी थी, जिसमें रिश्तों की जटिलताओं को आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत किया गया था। बाद में यह भावनात्मक प्रेम त्रिकोण बन जाती है।
अब करीब 14 साल बाद इस फ्रेंचाइज को आगे बढ़ाते हुए कॉकटेल 2 आई है। यहां पर भी कहानी का आधार तीन युवा, दोस्ती, प्यार, सच्चे प्यार की पहचान, दिल का टूटना जैसे पुराने मुद्दे हैं, लेकिन इन रिश्तों से जुड़ाव महसूस नहीं करते।
प्यार और आकर्षण के बीच फंसी कॉकटेल 2 की कहानी
कहानी दिल्ली में लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे कुणाल (शाहिद कपूर) और दीया (रश्मिका मंदाना) की है। दोनों कॉलेज के समय से एकदूसरे के साथ प्रेम संबंधों में हैं। दोनों सिसिली (Sicily इटली) में दस दिन की छुट्टियां मनाने जाते हैं। वहां पर दीया को उसकी कॉलेज के जमाने की दोस्त एली (कृति सैनन) दस साल बाद मिलती है। दीया को लगता है कुणाल उससे प्यार करता है, लेकिन इतना नहीं कि शादी करें।
करीब 16 साल साथ होने के बावजूद दिया समझ नहीं पा रही है कि दोनों को एकदूसरे से प्यार हैं या आदत। कुणाल उसके लिए कैसा महसूस करता है? उससे प्यार करता है या नहीं? रिश्ते में वफादार है या नहीं ? दीया यह परखने के लिए एली से उसे आकर्षित करने को कहती है। एली की कोशिशों के बाद आखिरकार दीया वहीं पर कुणाल को शादी के लिए प्रपोज करती हैं। दोनों वापस दिल्ली आते हैं। शादी की तैयारी में जुटे होते हैं तभी एली की वापसी होती है। वह कुणाल से अपने प्रेम का इजहार करती है। कुणाल भी उसे अपनी ओर आकर्षित दिखता है। पर कुणाल दीया से प्यार करता है या एली है? कहानी इस संबंध है।
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खूबसूरत लोकेशन पर कमजोर है कहानी
फिल्म 'तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी' की तरह कॉकटेल 2 भी इंटरवल तक सिसिली की सैर कराती है। सिनेमेटोग्राफर संताना कृष्णन रविचंद्रन की तारीफ बनती है कि उन्होंने सिसिली की नयनाभिरामी लोकेशन को बखूबी अपने कैमरे से दर्शाया है। इंटरवल तक यह खूबसूरत नजारे कमजोर पटकथा पर पर्दा डालने का काम करते हैं, लेकिन इंटरवल के बाद यह जादू भी फीका पड़ जाता है। मूल फिल्म का निर्देशन करने के बाद कॉकटेल 2 के निर्देशन की बागडोर संभालने वाले होमी अजदानिया यहां पर त्रिकोणीय प्रेम कहानी की भावनाओं और जज्बातों को उभारने में चूक गए हैं।
तरूण जैन और लव रंजन की लिखी कहानी में एली के आने से कुणाल और दीया के रिश्ते में नई जटिलताएं पैदा होती हैं, मगर कहानी भावनात्मक गहराई हासिल करने के बजाय बेवजह के नाटकीय मोड़ों में उलझ जाती है। नतीजन न तो घटनाक्रम स्वाभाविक लगते है और न ही दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ पाते है। फिल्म रश्मिका मंदाना के किरदार को इतना भी अवसर नहीं देती कि वह अपनी स्वतंत्र सोच या मजबूत व्यक्तित्व का परिचय दे सके। लेखकों का ध्यान कृति के पात्र को स्टाइलिश दिखाने पर ज्यादा रहा। बेहतर होता कि उसकी भावनाओं और दर्द को उबारा जाता।

पहली कॉकटेल की तरह प्रभावी नहीं है म्यूजिक
दरअसल, सिसिली की सैर के दौरान एक बुजुर्ग को गले लगाने पर उसका भावुक होना दिखाया है, लेकिन वजह स्पष्ट नहीं है। शादी के माहौल को गढ़ने के लिए कुणाल के माता-पिता और तमाम रिश्तेदार दिखते हैं, लेकिन कहानी में उनकी कोई प्रभाव नहीं दिखता। पुलकित सम्राट का कैमियो मूल फिल्म में सैफ अली खान के एक दृश्य की यादें ताजा करता है, लेकिन जोड़ता कुछ नहीं है। आखिर दस मिनट में फिल्म रिश्तों की सच्चाई और उस पर सोशल मीडिया के प्रभाव की बात करती है, लेकिन तब तक आपके धैर्य की काफी परीक्षा हो चुकी होती है।
प्रीतम का संगीत अच्छा है, लेकिन मूल फिल्म की तरह प्रभावी नहीं बन पाया है। मूल फिल्म का गाना तुम ही हो बंधु का यहां पर भी इस्तेमाल हुआ है। उसे सुनना अच्छा लगता है।

कलाकारों ने फिल्म में की कैसी एक्टिंग?
कलाकारों में शाहिद कपूर पिछले कुछ समय से धीर गंभीर भूमिकाओं में नजर आए हैं। यहां पर उन्हें डांस, रोमांस और फ्लर्ट सब करने का मौका मिला है, लेकिन भावनात्मक दृश्यों में कमजोर दिखाई दिए हैं। रश्मिका मंदाना खूबसूरत दिखी है, लेकिन मासूम नहीं लगती। रिश्तों में उलझन के भावों को दर्शाने में कमजोर लगी हैं। कृति सेनन का पात्र मूल फिल्म की वेरोनिका (दीपिका पादुकोण) सरीखा ग्लैमरस, आकर्षक और बोल्ड है, लेकिन वेरोनिका जैसा अहसास नहीं दे पाती।
वेरोनिका अपने लिए सहानुभूति बटोरती है, जबकि एली चालाक और शातिर लगती है। शाहिद कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री भी प्रभावी नहीं बन पाई है। कुणाल के पिता की भूमिका में टीकू तलसानिया की प्रतिभा का कोई उपयोग नहीं हुआ है। उनके हिस्से में कोई दमदार संवाद या सीन नहीं है। कॉकटेल-2 भले ही भव्यता, ग्लैमर और आकर्षक दृश्यों से भरपूर हो, लेकिन भावनात्मक स्तर पर मूल फिल्म जैसा प्रभाव नहीं छोड़ पाती है।