Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    System Review: कोर्ट रूम ड्रामा में छाईं Sonakshi-Jyothika, आशुतोष गोवारिकर निकले सरप्राइज; क्या है कमी?

    Updated: Fri, 22 May 2026 01:05 PM (IST)

    Sonakshi Sinha और Jyothika स्टारर क्राइम थ्रिलर 'सिस्टम' प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है। यहां पढ़ें फिल्म का रिव्यू- ...और पढ़ें

    क्राइम थ्रिलर सिस्टम फिल्म रिव्यू

    क्राइम थ्रिलर सिस्टम फिल्म रिव्यू

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    एकता गुप्ता, नई दिल्ली। निल बटे सन्नाटा, बरेली की बर्फी और पंगा जैसी शानदार फिल्में बनाने वाली अश्विनी अय्यर तिवारी एक और जबरदस्त क्राइम थ्रिलर, 'सिस्टम' लेकर आई हैं, लेकिन इस बार ओटीटी पर।

    22 मई से प्राइम वीडियो (Prime Video) पर रिलीज हुई सिस्टम में सोनाक्षी सिन्हा (Sonakshi Sinha) और ज्योतिका (Jyothika) ने लीड रोल प्ले किया है। यहां पढ़ें फिल्म का रिव्यू-

    मूवी का नाम- सिस्टम (System)

    कलाकार- सोनाक्षी सिन्हा, ज्योतिका, आशुतोष गोवारिकर और विजयंत कोहली।

    निर्देशक- अश्विनी अय्यर तिवारी

    प्लेटफॉर्म- प्राइम वीडियो

    रन टाइम- 2 घंटे 5 मिनट

    सिस्टम की कहानी

    सिस्टम (System) की कहानी में सोनाक्षी सिन्हा का किरदार नेहा राजवंश एक हाई प्रोफाइल डिफेंस लॉयर (आशुतोष गोवारिकर) की बेटी हैं, जो कोर्ट में बड़े से बड़ा केस जीतने के लिए जाने जाते हैं और दूसरे वकील उनके सामने दलीलें देने से डरते हैं। वहीं सोनाक्षी भी उनके नक्शेकदम पर चलती हैं लेकिन बतौर प्रोसिक्यूटर।

    system (5)

    यह भी पढ़ें- System Trailer: OTT का 'सिस्टम' हिलाने आ रहीं सोनाक्षी सिन्हा, कोर्टरूम-ड्रामा का ट्रेलर खड़े कर देगा रोंगटे

    दूसरे वकीलों की तरह सोनाक्षी का भी सपना है कि वह अपने पिता के साथ काम करें लेकिन जितने सख्त उनके पिता कोर्ट में हैं उतने ही घर पर। उनकी जिद है कि जब तक उनकी बेटी उस लायक नहीं बन जाती है तब तक वे उसे आसानी से कोर्ट में अपने साथ नहीं बैठाएंगे।

    इसके बाद नेहा राजवंश अपने आपको साबित करने में लग जाती है। इसी बीच उसकी मुलाकात होती है उसी कोर्ट की स्टेनोग्राफर सारिका (Jyothika) से जो काम तो कंप्यूटर के पीछे करती है लेकिन कोर्ट की दलीलें सुन-सुनकर उसका एक्सपीरियंस किसी वकील से कम नहीं।

    WhatsApp Image 2026-05-22 at 9.12.10 AM

    सारिका, नेहा की मदद करती है और नेहा अपने पिता के दिए हुए चैलेंज 10 केस में से 9 केस जीत लेती है। पेंच 10 वें केस पर जाकर अड़ जाता है, क्योंकि दसवें केस में वह अपने पिता के खिलाफ ही खड़ी हो जाती है।

    खबरें और भी

    बाप-बेटी के बीच चलने वाला यह कोर्ट रूम ड्रामा देखने में सोनाक्षी और गोवारिकर की कहानी लगता है। लेकिन असल में कंप्यूटर के पीछे टिकी आंखें और कोर्ट रूम पर लगे कान उस पूरे केस को चला रहे होते हैं। क्योंकि इसके पीछे एक जबरदस्त सस्पेंस छिपा है। क्या सोनाक्षी पिता के खिलाफ ये केस जीतती है? या फिर कोई तीसरा ही इस कहानी का हीरो निकलता है? क्या सारिका ने जानबुझकर नेहा की मदद की थी? या माजरा कुछ और ही है? इन सवालों के जवाब आपको फिल्म देखने के बाद ही मिलेंगे।

    दिल जीत पाया ये 'सिस्टम'?

    अश्विनी अय्यर तिवारी ने फिल्म का नाम एकदम सटीक रखा है- सिस्टम (System)। वो सिस्टम जो पावर और पैसों की ओर झुकता है, वो सिस्टम जिसमें पक्के सबूत ना होने, असली सबूत मिटाने के चलते आरोपी छूट जाते हैं। इस फिल्म की कहानी इसी सच से पर्दा उठाती है।

    हालांकि अश्विनी ने इसी कहीना को आधार बनाया है और बेहतर तरीके से पर्दे पर उतराने की कोशिश की है। एक नाबालिग बच्ची जिसे बालिग बताकर सेक्स रैकेट चलाना- इसका केस किसी एवरेज ड्रामा की तरह इमोशनल तरीके से नहीं बल्कि प्रैक्टिकल और फैक्चुअल डेटा के बेस पर जीता है। हालांकि ये फिल्म का लीड केस नहीं है, बस एक कड़ी है लेकिन प्रभावी है।

    system (4)

    कहानी में ड्रामा कम प्रेक्टिकल अप्रोच ज्यादा है जो इसे अलग बनाती है। हालांकि फिल्म की कहानी में थोड़ी कमियां जरूर हैं। कहीं-कहीं फिल्म कानूनी लड़ाई से ज्यादा पारिवारिक लड़ाई लगती है। वहीं 2 घंटे 5 मिनट के रनिंग टाइम भी स्टोरीटेलिंग थोड़ी धीमी तो है लेकिन सधी हुई लगती है।

    ज्योतिका ने सारिका का किरदार बहुत ही बेहतरीन ढंग से निभाया है। कंप्यूटर के पीछे बैठकर वे कैसे एक हाई प्रोफाइल बाप-बेटी की जोड़ी को अपने इशारों पर नचाती है यह काबिल-ए-तारीफ है।

    सोनाक्षी सिन्हा ने भी अच्छी परफॉर्मेंस दी है, लॉयर के किरदार में वह जंची है। ओटीटी पर सोनाक्षी अपनी कला को ज्यादा अच्छे से दिखा पा रही हैं। सरप्राइज ओशुतोष गोवारिकर ( Ashutosh Gowarikar) हैं जो पर्दे के पीछे के तो जादू बिखेरते ही हैं लेकिन पर्दे के सामने भी उन्होंने शानदार काम किया है। वहीं विजयंत कोहली का स्क्रीनटाइम कम और एक्टिंग का प्रभाव भी उतना ज्यादा नहीं है।

    system (1)

    फिल्म का म्यूजिक अच्छा तो है, लेकिन कुछ यादगार नहीं है। फिल्म के संगीत को और बेहतर बनाया जा सकता था। स्टोरीटेलिंग आपको बांधकर रखती है, कैमरा वर्क भी ठीक-ठाक है। लेकिन डायलॉग और कहानी को बेहतर कि या जा सकता था।

    कहां है कमी?

    लीड केस को थोड़ी गहराई की जरूरत थी और विजयंत कोहली को थोड़े स्क्रीन टाइम की। अगर फिल्म में किसी किरदार को मुजरिम बनाया जाता है तो उसे थोड़ा स्क्रीनटाइम देना बनता है। वहीं जिसके साथ अपराध हुआ उसे भी अच्छी तरह से स्क्रीन टाइम नहीं मिला। शायद चेहरा याद भी ना रहे। इस वजह से केस से इमोशनल अटेचमेंट कम जुड़ता है। कहानी की धीमी गति को थोड़ा बढ़ाया जा सकता था। 

    system (2)

    क्यों देखें?

    सिस्टम एक आम कोर्ट रूम ड्रामा (Courtroom Drama) से अलग है क्योंकि इसमें किसी भी केस को इमोशनल नहीं प्रेक्टिकल तरीके से सुलझाया गया है। कुछ यूनिक बिंज वॉच करना है तो सिस्टम देखने लायक है।

    यह भी पढ़ें- 27 साल पहले 'रहमान डकैत' संग फ्लॉप हुई फिल्म तो छोड़ दिया बॉलीवुड, अब OTT का 'सिस्टम' हैंग कर रही ये हीरोइन