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    'उतनी इज्जत नहीं दी जाती,' टीवी कलाकारों के लिए राष्ट्रीय सम्मान को लेकर 'अनुपमा' की दो टूक

    By Deepesh PandeyEdited By: Ashish Rajendra
    Updated: Thu, 09 Jul 2026 04:37 PM (IST)

    छोटे पर्दे की मशहूर अदाकारा रूपाली गांगुली ने टीवी कलाकारों को राष्ट्रीय सम्मान मिलने को लेकर खुलकर बात की है ...और पढ़ें

    टीवी एक्ट्रेस रूपाली गांगुली (फोटो क्रेडिट- एक्स)

    टीवी एक्ट्रेस रूपाली गांगुली (फोटो क्रेडिट- एक्स)

    HighLights

    1. रूपाली गांगुली टीवी की मशहूर अदाकारा

    2. नेशनल अवॉर्ड को लेकर बोलीं रूपाली

    3. अनुपमा टीवी शो से जीता सबका दिल

    दीपेश पांडे, मुंबई। धारावाहिक अनुपमा से अभिनेत्री रूपाली गांगुली ने बीते छह वर्ष में घर-घर में अपनी जगह बनाई। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यह शो इन वर्षों में टीआरपी के मामले में लगातार शीर्ष पांच धारावाहिकों में बना रहा। अब स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाले इस धारावाहिक में ‘अपना घर’ ट्रैक शुरू किया गया है। रूपाली से इस ट्रैक, उनके घर, शो तथा टीवी से जुड़े अहम विषयों पर दीपेश पांडेय ने की बातचीत...

    पूंजी, गर्व सब कुछ है अपना घ

    शो में दिखाए जा रहे ‘अपना घर’ ट्रैक की आज के दौर में प्रासंगिकता को लेकर रुपाली कहती हैं, आज की औरतें इतनी हिम्मत कर रही हैं कि वे पुराने सोच से आगे बढ़कर अपना घर बना रही हैं। पुराना सोच था कि औरतों का या तो मायका होता है या ससुराल। उनका अपना कोई घर नहीं होता है।

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    हालांकि, हर औरत की एक दिली तमन्ना होती है कि दुनिया में कोई एक कोना ऐसा होना चाहिए, जो सिर्फ उनका हो। अब लड़कियां अपने घर के सपने देख रही हैं और उन्हें पूरा भी कर रही हैं। वह एक घर उनकी अपनी सुरक्षा की भावना, पूंजी, सहजता और गर्व सब कुछ दर्शाता है। सिर्फ औरतों का ही नहीं, हमारे देश के हर व्यक्ति का सपना होता है कि मेरा अपना एक घर हो।

    तब बनाया अपना घर

    अपने पहले घर को लेकर रुपाली बताती हैं, मेरे पिता (निर्देशक अनिल गांगुली) का सपना था कि मुंबई में अपना घर हो। इसके लिए उन्होंने और मैंने बहुत कोशिश की, लेकिन उस समय तो डाउन पेमेंट के भी पैसे नहीं जुटा पाई थी। फिर जब मैं अनुपमा धारावाहिक से जुड़ी तो मेरे सिर पर निर्माता राजन शाही जी का हाथ आया तो मैंने वर्ष 2022 में अपनी कमाई से पहला घर लिया। मैं उस पल की भावनाएं कभी नहीं भूलूंगी।

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    अपना घर लेने के बाद मैं राजन जी के पास जाकर रोई थी कि मैंने अपना घर ले लिया है, जिसके बाहर मेरे नाम की नेमप्लेट लगी है। कई बार पति या ससुराल वाले मजाक-मजाक में ही बोल देते हैं कि मेरे घर से निकल जाओ, जो समाज के सोच को दर्शाता है। घर को सजाती हैं औरतें, बसाती हैं औरतें, बच्चों को पालती-पोषती हैं औरतें, लेकिन फिर भी वो घर उनका नहीं हो पाता है।

    साथ है आशीर्वाद

    टीआरपी सूची में अपने धारावाहिक को लगातार शीर्ष पांच में बने रहने के कारणों पर रूपाली कहती हैं, हमारे साथ बेजुबानों का आशीर्वाद है। हमारे निर्माता राजन जी और उनकी बेटी इशिका बेजुबानों के लिए बहुत काम करते हैं। मेरे लिए तो जानवरों और पशु-पक्षियों के लिए काम करना मेरी जीवनरेखा है।

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    हमारे निर्माता ने चलन के विपरीत हटकर कुछ अलग करने की हिम्मत दिखाई। ये हर उस मां की कहानी है, जो हर किसी के घर में है, लेकिन अनदेखी हो गई है, वो खुद से प्यार करना भी भूल गई है। हमारे शो पर सभी मांओं का आशीर्वाद है।

    टीवी कलाकारों को भी मिले सम्मान

    बीते काफी समय से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की तरह टीवी कलाकारों के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कारों की मांग हो रही है। इस पर रूपाली कहती हैं, फिल्मों के सेट पर यह विकल्प होता है कि आज बहुत ज्यादा बारिश हो रही है या कोई दूसरी समस्या है तो हम शूट नहीं करेंगे।

    मुंबई में भारी बारिश के बावजूद हम सुबह से लेकर शाम तक शूटिंग करते रहते हैं। हमारे पास छुट्टी लेने का विकल्प नहीं होता है। ऐसे में सरकार से मेरी हाथ जोड़कर विनती है कि टीवी कलाकारों और धारावाहिकों को भी राष्ट्रीय पुरस्कारों में क्यों नहीं शामिल किया जाता है।

    हमारी पहुंच कई फिल्मों से ज्यादा है। क्या हमारी परफार्मेंस फिल्म कलाकारों से कम होती है। हमारी टीवी इंडस्ट्री में ऐसे कई कलाकार हैं, जो कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेताओं से बेहतर काम करते हैं, लेकिन हमारी इंडस्ट्री को उतनी इज्जत नहीं दी जाती है। कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी राष्ट्रीय पुरस्कार हैं। फिर हम टीवी कलाकारों के बारे में क्यों नहीं विचार किया जाता है।

    मीडिया से कहूंगी अपनी बात

    रूपाली केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की सदस्य भी हैं। ऐसे में टीवी कलाकारों के लिए भी राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए सरकार से बातचीत पर वह कहती हैं, मैं घर पर कहती हूं कि मैं मोदी भक्त हूं। जब मुझे पार्टी से जुड़ने का प्रस्ताव मिला था, तब मेरा पूरा ध्यान अनुपमा पर ही था और मैं अपना ध्यान नहीं भटकाना चाहती थी, लेकिन मैं सपोर्ट के लिए जुड़ गई थी। मैं अब भी एक सामान्य नागरिक हूं। मुझे जो कुछ कहना होगा अपनी आवाज मीडिया के माध्यम से ही सरकार तक पहुंचाऊंगी।

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