'संवाद सबसे बड़ा हथियार,' टीवी एक्टर Hiten Tejwani ने बच्चों को डील करने का बताया 'गुरु मंत्र'
टीवी एक्टर हितेन तेजवानी ने हाल ही में दैनिक जागरण को दिए लेटेस्ट इंटरव्यू में बच्चों को डील करने को लेकर खुलकर बात की है। ...और पढ़ें
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हितेन तेजवानी का परिवार (फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम)
HighLights
टीवी के मशहूर एक्टर हैं हितेन तेजवानी
बच्चों को लेकर हितेन ने की खुलकर बात
अपने बच्चों को इस तरह से करते हैं डील
दीपेश पांडेय, मुंबई। पिता एक ऐसा शब्द जिसमें अनुशासन भी है और अगाध प्रेम भी। यूं तो माता-पिता बच्चों को संस्कार और जीवन की सीख देते हैं, लेकिन पिता बनने के बाद पुरुष भी बच्चों से कई नई चीजें सीखते हैं।
उन्हें एक बार फिर से बचपन जीने का मौका मिलता है। फादर्स डे के मौके पर कुछ टीवी कलाकारों ने बच्चों के पालन-पोषण से मिल रही सीख और अपने पिता से मिले संस्कारों की विरासत पर अपने अनुभव साझा किए...
बच्चों से रोज कुछ सीख रहा हूं- हितेन तेजवानी
धारावाहिक क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 के अभिनेता हितेन तेजवानी बताते हैं- जब बच्चे दुनिया में आते हैं तो आप उनके साथ फिर से दुनिया को नई नजर से देखना शुरू कर देते हैं। मेरे दोनों बच्चे बहुत जिज्ञासु हैं। मैंने उनसे सबसे बड़ी चीज सीखी है कि वर्तमान में कैसे जिया जाए।
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हम बड़े होते-होते बहुत ज्यादा भविष्य और जिम्मेदारियों के बारे में सोचने लगते हैं, जबकि बच्चे हर पल को पूरी तरह जीते हैं। आज की पीढ़ी बहुत जागरूक है, उन्हें समझाना पड़ता है और उनकी बात भी सुननी पड़ती है।
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मुझे लगता है कि मैं आज भी रोज अपने बच्चों से कुछ नया सीख रहा हूं। एक पिता के तौर पर मेरे लिए सबसे जरूरी है कि बच्चे अच्छे इंसान बनें। पढ़ाई, करियर और सफलता अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इंसानियत, ईमानदारी और दूसरों के प्रति सम्मान उससे भी ज्यादा जरूरी है।
मैं यह भी ध्यान रखता हूं कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव न हो। हमारे समय में अगर कोई गलती हो जाती थी तो पिता जी से डांट या कभी-कभी थप्पड़ भी पड़ जाता था, लेकिन आज का समय अलग है।
संवाद सबसे बड़ा हथियार
मॉर्डन डेज में बच्चों को डील करने के मामले पर हितेन कहते हैं- आज बच्चों के साथ संवाद सबसे बड़ा हथियार है। आज बच्चों को समझाना पड़ता है कि कोई बात सही क्यों है और गलत क्यों है। मेरी पत्नी गौरी और मुझमें मैं थोड़ा ज्यादा नर्म हूं और गौरी कई बार ज्यादा अनुशासित रहती हैं।
मेरे माता-पिता ने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। अभिनय करियर के तौर चुनना उस समय कोई बहुत सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता था, लेकिन उन्होंने कभी मेरा हौसला नहीं तोड़ा। उन्होंने मुझे मेहनत और ईमानदारी की अहमियत सिखाई।
मेरे माता-पिता ने मुझे संस्कार, सम्मान और जमीन से जुड़े रहने की सीख दी। आज मैं वही मूल्य अपने बच्चों को सिखाना चाहता हूं। जैसे मेरे माता-पिता ने मुझे अपनी राह चुनने की आजादी दी और भरोसा किया, वैसे ही मैं भी अपने बच्चों पर भरोसा करता हूं।